डायबिटीज मरीजों के लिए वरदान है इंसुलिन, 100 साल पहले हुई थी खोज, जानिये इससे जुड़े भ्रम और उसकी सच्चाई

Updated at : 29 Jan 2021 9:19 AM (IST)
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डायबिटीज मरीजों के लिए वरदान है इंसुलिन, 100 साल पहले हुई थी खोज, जानिये इससे जुड़े भ्रम और उसकी सच्चाई

डायबिटीज मरीजों के इलाज में आज से ठीक 100 साल पहले वर्ष 1921 में इंसुलिन का इजाद हुआ था. इंसुलिन आने के बाद डायबिटीज मरीजाें के लिए यह वरदान साबित हो रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि मेडिकल साइंस भी 100 साल पहले हुए इस शोध को कारगर व सटीक मान रहा है

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डायबिटीज मरीजों के इलाज में आज से ठीक 100 साल पहले वर्ष 1921 में इंसुलिन का इजाद हुआ था. इंसुलिन आने के बाद डायबिटीज मरीजाें के लिए यह वरदान साबित हो रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि मेडिकल साइंस भी 100 साल पहले हुए इस शोध को कारगर व सटीक मान रहा है. इंसुलिन को लेकर रोज नये शोध किये जा रहे हैं, जिससे जटिलता कम होती जा रही है.

मरीजों का विश्वास इंसुलिन पर बढ़ता जा रहा है. संकट काल में यह जीवनरक्षक बना है. कोरोना काल में डायबिटीज मरीज जब कोरोना से संक्रमित हुए, तो इंसुलिन ने ही जान बचायी है. इस इजाद (इंसुलिन) के 100 साल के सफर पर पढ़िये मुख्य संवाददाता राजीव पांडेय की रिपोर्ट.

10 फीसदी मरीज भ्रम के कारण नहीं लेते हैं इंसुलिन : वर्ष 2019 के आंकड़ों के अनुसार देश में डायबिटीज के करीब 7.50 करोड़ मरीज हैं. झारखंड की करीब 15 फीसदी शहरी और सात फीसदी ग्रामीण आबादी डायबिटीज से पीड़ित है. वहीं झारखंड में इंसुलिन के माध्यम से इलाज करानेवाले डायबिटीज मरीजों की संख्या करीब 30 फीसदी है. हालांकि इसमेंं आठ से 10 फीसदी ऐसे मरीज भी हैं, जो भ्रम और मिथ्या के कारण इंसुलिन नहीं लेते हैं.

इसलिए जरूरी है : डायबिटीज के मरीज में इंसुलिन हार्मोन का स्राव कम होने लगता है. पैंक्रियाज (अग्न्याशय) में पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन नहीं होता है, जिससे शुगर का स्तर अनियंत्रित हो जाता है. इंसुलिन का श्राव नहीं होने या कम होने पर बाहर से इंसुलिन और दवा दी जाती है. अनियंत्रित इंसुलिन के कारण महत्वपूर्ण अंगों पर असर पड़ने लगता है. डायबिटीज आनुवांशिक, अनियंत्रित जीवनशैली, तनाव व मोटापा के कारण होनेवाली बीमारी है.

13 साल की उम्र से ले रहे इंसुलिन : मेरी उम्र 13 साल की थी, तब डायबिटीज की समस्या की जानकारी हुई. क्रिटिकल स्थिति थी, इसलिए इंसुलिन पर रखकर इलाज किया गया. अब तो इंसुलिन जीने का जरिया बन गया है. हर दिन चार वक्त इंसुलिन लेती हूं. समय-समय पर डॉक्टर की सलाह भी लेनी पड़ती है. शुरुआत में इंसुलिन को लेकर भ्रम की स्थिति थी, लेकिन डॉक्टरों ने कहा कि शुगर को नियंत्रित करने में यह कारगर है. फिर भ्रम त्याग कर इंसुलिन लेना शुरू की. इससे शुगर लेवल नियंत्रित रहता है.

-भाग्यश्री मिश्रा, डायबिटीज मरीज

कोरोना काल में 30 फीसदी डायबिटीज मरीजों का रक्षक बना इंसुलिन

7.5 करोड़ डायबिटीज के मरीज हैं देश में

इंसुलिन से जुड़े भ्रम और सच्चाई

भ्रम : इंसुलिन से आदत लग जाती है

सच्चाई : यह जरूरत है, आदत नहीं

भ्रम : इंसुलिन किडनी को प्रभावित करता है

सच्चाई : अधिकतर लोग अंतिम समय में इंसुलिन लेना शुरू करते हैं, तब तक किडनी को क्षति पहुंच चुकी होती है.

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