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रात की नींद के बाद भी दिन भर बार-बार आती है झपकी, चेक करें हो सकते हैं हाइपरसोमनिया के लक्षण

Updated at : 21 Dec 2023 6:28 AM (IST)
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रात की नींद के बाद भी दिन भर बार-बार आती है झपकी, चेक करें हो सकते हैं हाइपरसोमनिया के लक्षण

Hypersomnia :क्या आपको भी ऐसा महसूस होता है कि रात को पर्याप्त नींद लेने के बावजूद हर वक्त थकान सी महसूस होती है. काम के बीच में झपकी आती रहती है. मन करता है सब काम छोड़कर सो जाएं. तो इसे अनदेखा ना करें ये हाइपरसोमनिया के लक्षण हो सकते हैं .

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दिन में अत्यधिक नींद आना

हाइपरसोमनिया एक चिकित्सीय स्थिति है जिसमें दिन में अत्यधिक नींद आना या रात में लंबे समय तक सोना शामिल है. हाइपरसोमनिया से पीड़ित व्यक्तियों को अक्सर पूरी रात सोने के बाद भी दिन में जागते रहना चुनौतीपूर्ण लगता है. अनिद्रा के विपरीत, जहां व्यक्तियों को सोने के लिए संघर्ष करना पड़ता है, हाइपरसोमनिया से पीड़ित लोगों को जागते रहने में कठिनाई का अनुभव हो सकता है.

हाइपरसोमनिया के लक्षण

दिन में अत्यधिक नींद आना: लगातार उनींदापन महसूस होना और दिन में बार-बार झपकी लेने की जरूरत महसूस होना

लंबी नींद की अवधि: रात की लंबी नींद जो दिन की नींद को कम नहीं करती है

जागने में कठिनाई: पर्याप्त नींद लेने के बावजूद, हाइपरसोमनिया वाले व्यक्तियों को सुबह उठने में कठिनाई हो सकती है और जागने पर भ्रम का अनुभव हो सकता है.

हाइपरसोमनिया के कारण

हाइपरसोमनिया की समस्या नींद पूरी ना होना, नैक्रोप्लास्टी, शराब और नशीली दवाइयों के सेवन, कैफिन, स्लीप एप्निया, मोटापा, न्यूरोलॉजिकल समस्या, हाइपो-थाइरॉएडिज्म और किडनी के रोग की वजह से हो सकती है. हाइपरसोमनिया 2 प्रकार का होता है

प्राइमरी हाइपरसोमनिया- जब किसी व्यक्ति के मस्तिष्क के तंत्र नींद में जागने और नींद से उठने की क्रिया को ठीक से संचालित नहीं कर पाते हैं तो यह प्राइमरी हाइपरसोमनिया की समस्या है.

सेकेंडरी हाइपरसोमनिया- अगर किसी व्यक्ति को हर पल गहरी नींद की समस्या रहती है और वह हमेशा थकान से परेशान रहता है तो यह सेकेंडरी हाइपरसोमनिया है.

हाइपरसोमनिया का निदान

निदान के लिए संपूर्ण चिकित्सा इतिहास और नींद का इतिहास आवश्यक है.रात के दौरान नींद के पैटर्न, मस्तिष्क गतिविधि और अन्य कारकों की निगरानी के लिए नींद के अध्ययन, जैसे कि पॉलीसोम्नोग्राफी, आयोजित किए जा सकते हैं.

उपचार अंतर्निहित कारण पर निर्भर करता है.प्राथमिक हाइपरसोमनिया के लिए, दिन के दौरान जागने में सुधार करने में मदद के लिए उत्तेजक दवाएं निर्धारित की जा सकती हैं.

जीवनशैली में बदलाव, जैसे नियमित नींद का कार्यक्रम बनाए रखना, सोने के समय शराब और कैफीन से परहेज करना और अनुकूल नींद का माहौल बनाना भी अनुशंसित किया जा सकता है.

दैनिक जीवन पर प्रभाव

हाइपरसोम्निया किसी व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकता है, जिससे काम, सामाजिक रिश्तों और दैनिक कामकाज में कठिनाइयां पैदा हो सकती हैं.दिन के समय अत्यधिक नींद आना सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकता है, खासकर मशीनरी चलाते समय या गाड़ी चलाते समय.

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Meenakshi Rai

लेखक के बारे में

By Meenakshi Rai

Meenakshi Rai is a contributor at Prabhat Khabar.

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