Fake Medicines: कहीं आप भी तो नहीं खा रहे नकली दवाई? ऐसे करें पहचान

Edited by Saurabh Poddar
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how to identify fake medicines

Fake Medicine: क्या आप जानते हैं जो आप दवाई खा रहे हैं वह नकली है या असली है? आजकल नकली दवाइयों का कारोबार तेजी से फैल रहा है, ऐसे में यह सबके लिए जानना आवश्यक है कि जिन दवाइयों को आप खरीद रहें हैं वह असली है या नकली. तो चलिए जनतें है कि आखिर कैसे पता करें असली और नकली दवाइयों के बारे में.

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Fake Medicines: आजकल जितनी अधिक बीमारियां हो रहीं हैं, उतनी अधिक दवाइयों का सेवन भी किया जा रहा है. जब भी दवाइयां लेते हैं, तो उसकी जांच करना भूल जाते हैं. जो हमारे लिए हानिकारक हो सकता है क्योंकि, बाजार में नकली दवाइयों का कारोबार तेजी से फैल रहा है. आपने कई बार सुना होगा कि नकली दवाइयों के कारोबार पर अक्सर छापे पड़ते हैं और कानूनी कार्यवाही की जाति है. कई लोग ऐसे हैं जो तबियत खराब होने पर ज्यादातर मेडिकल स्टोर से दवाइयां खरीदकर खा लेते हैं और ठीक भी हो जाते हैं लेकिन अगर आप जाने अनजाने मे नकली दवाइयों का सेवन कर लेंगे तो आपके जान को खतरा हो सकता है. इसलिए आपको दवाई खरीदने समय उसकी जांच कर लेनी चाहिए कि वह दवाई नकली है या असली. तो चलिए जानते हैं कि असली दवाइयों की पहचान कैसे कर सकते हैं.

डॉक्टर को दिखाकर ही करें दवाइयों का सेवन

हमें खुद से या मेडिकल स्टोर से दवाई लेने की बजाय डॉक्टर को दिखाकर कर दवाइयों का सेवन करना चाहिए. इससे आप नकली दवाओं को लेने से बच सकतें हैं और आपके बीमारी का भी सही इलाज हो जायेगा जो समय रहते ठीक हो सकता है. नकली दवाइयों का कारोबार अपना पैर तेजी से पसार रहा है ऐसे में आप जब भी दवाओं का सेवन करें तो एक बार डॉक्टर से जरूर दिखाएं। यह आपके स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है.

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दवा लेने से पहले क्यूआर कोड स्कैन

आप जब भी दवा खरीदें तो सबसे पहले उसपे लगा क्यूआर कोड जरूर स्कैन करें. क्यूआर कोड स्कैन करते ही आपको दवा के बारे में पूरी जानकारी मिल जाती है. क्यूआर कोड दवा के रैपर के ऊपर लगा होता है, जिसको स्कैन कर आप दवा असली है या नकली यह पता कर सकतें हैं. जिन दवाओं पर क्यूआर कोड नहीं लगा होता है वह दवाएं नकली होती हैं. नियम के अनुसार 100 रुपये से ज्यादा कीमत वाली दवाइयों पर क्यूआर कोड लगाना अनिवार्य होता है. जिन दवाओं पर क्यूआर कोड ना हो उस दवा को खरीदने से बचें या फिर आप दवाओं के रैपर पर जो हेल्पलाइन नंबर होता है उसपर सम्पर्क करके दवाइयों के बारे में पता कर सकतें हैं. दवाइयों पर लगा क्यूआर कोड एडवांस वर्जन का होता है और इसकी जानकारी सेंट्रल डेटाबेस एजेंसी जारी करती है साथ ही हर दवा के साथ क्यूआर कोड बदल दिया जाता है, जिससे नकली क्यूआर कोड बनाना मुश्किल है. इनपुट: आस्था सिंह राजपूत

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Saurabh Poddar

लेखक के बारे में

By Saurabh Poddar

सौरभ पोद्दार एक लाइफस्टाइल जर्नलिस्ट हैं और पिछले 4 सालों से डिजिटल मीडिया में एक्टिव हैं. उन्होंने रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है. फिलहाल, सौरभ 'प्रभात खबर' के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रहे हैं. सौरभ को उन विषयों पर लिखना सबसे ज्यादा पसंद है, जो हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हैं. उनके आर्टिकल्स में आपको हेल्थ, फिटनेस, स्किन-हेयर केयर, पेरेंटिंग, हेल्दी रेसिपीज, घरेलू नुस्खे, रिलेशनशिप और वास्तु शास्त्र जैसी उपयोगी जानकारियां मिलेंगी. फिटनेस और अच्छी सेहत सौरभ की निजी जिंदगी का भी अहम हिस्सा हैं. वे जिन विषयों पर लिखते हैं, उन्हें अपनी रूटीन में फॉलो भी करते हैं. उनका मानना है कि जब आप किसी चीज को खुद एक्सपीरियंस करते हैं, तभी दूसरों तक सही और प्रैक्टिकल जानकारी पहुंचा सकते हैं. उनकी हमेशा यही कोशिश रहती है कि वे ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर बिल्कुल आसान और आम बोलचाल की भाषा में लिखें, ताकि हर पाठक उसे आसानी से समझ सके. यही वजह है कि उनके लिखे आर्टिकल्स काफी एंगेजिंग और एसईओ फ्रेंडली होते हैं.

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