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50 लाख रु./किलो बिकती है हिमालयन वियाग्रा, कोरोना वायरस ने कैसे इसे भी खतरे में डाला

Updated at : 14 Jul 2020 12:56 PM (IST)
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50 लाख रु./किलो बिकती है हिमालयन वियाग्रा, कोरोना वायरस ने कैसे इसे भी खतरे में डाला

हिमालय (Himalaya) की चोटी पर पाये जाने वाले हिमालयन वियाग्रा कीड़ा जड़ी (Himalayan Viagra Keeda Jadi) या यारशागुंबा (Yarsagumba) अब विलुप्त होने के कगार पर है. करीब 15 वर्षों में इसकी उपलब्धता 30 प्रतिशत से अधिक घट गयी है. कैंसर (Cancer) जैसे कई गंभीर रोगों के लिए अमृत जड़बूटी (Ayur Herbs) माने जाने वाले कीड़ाजड़ी (Keedajadi) का करोड़ो का बाजार लगभग समाप्त हो चुका है. इसे चीन समेत दुनिया भर के अन्य देशों में निर्यात किया जाता है. विशेषज्ञों की मानें तो कोरोना वायरस (Coronavirus) भी इसके घटे डिमांड का बहुत बड़ा कारण बना है.

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हिमालय (Himalaya) की चोटी पर पाये जाने वाले हिमालयन वियाग्रा कीड़ा जड़ी (Himalayan Viagra Keeda Jadi) या यारशागुंबा (Yarsagumba) अब विलुप्त होने के कगार पर है. करीब 15 वर्षों में इसकी उपलब्धता 30 प्रतिशत से अधिक घट गयी है. कैंसर (Cancer) जैसे कई गंभीर रोगों के लिए अमृत जड़बूटी (Ayur Herbs) माने जाने वाले कीड़ाजड़ी (Keedajadi) का करोड़ो का बाजार लगभग समाप्त हो चुका है. इसे चीन समेत दुनिया भर के अन्य देशों में निर्यात किया जाता है. विशेषज्ञों की मानें तो कोरोना वायरस (Coronavirus) भी इसके घटे डिमांड का बहुत बड़ा कारण बना है.

कैसे और कहां मिलता है कीड़ाजड़ी

यह जड़ी बूटी भारत के पश्चिमी और मध्य हिमालयी क्षेत्र के अलावा तिब्बत, नेपाल और भूटान के पर्वत्तों पर पाया जाता है. उत्तराखंड के यह पिथौरागढ़, चमोली और बागेश्वर जिले में उच्च हिमालयी क्षेत्रों पर पाया जाता है.

कौन-कौन देश है इसके खरीददार (where to sell keeda jadi)

भारत में इसकी मांग न के बराबर है. लेकिन, अन्य देशों में इसकी काफी डिमांड है. जिसमें सिंगापुर, ताइवान, इंडोनेशिया, चीन और अमेरिका जैसे देश भी शामिल है.

कितने में होती है बिक्री (Keeda Jadi price)

पिछले दो दशकों में इसकी डिमांड सातवें आसमान पर पहुंच गयी है. वर्ष 2003 में 20,000 रुपये प्रति किलो मिलने वाले इस जड़ी बूटी की कीमत वर्ष 2020 के शुरूआत तक 7-10 लाख रुपये प्रति किलो मिल रही थी. जबकि, अंतराष्ट्रीय मार्केट में इसे 50 लाख प्रति किलो में बेचा जाता है.

हालांकि, कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप से इसका मार्केट लगभग समाप्त हो चुका है. विदेशों से खरीददार नहीं आ रहे है. हाल ये है कि अभी लोग इसे एक लाख में भी खरीदना नहीं चाह रहे है. दरअसल, पिथौरागढ़ से काठमांडू के रास्ते यह बड़ी मात्रा में चीन भेजी जाती थी. लेकिन, चीन से हुई झड़प के कारण भी वहां इसका निर्यात नहीं किया जा रहा है.

क्यों हो रहे विलुप्त (Keeda Jadi comes into the Red List)

अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) ने इसकी उपलब्धता में आ रही गिरावट की गंभीरता को समझते हुए इसे ‘रेड लिस्ट’ में डाल दिया है. विशेषज्ञों की मानें तो इस जड़ी बूटी के उपलब्धता वाले क्षेत्र में मानवीय दखल बढ़ गया है और जलवायु परिवर्त्तन भी इसके मुख्य कारण बताए जा रहे है. इसीलिए अब यह आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रहा है और इसके समाप्त होने का खतरा भी गहराता जा रहा है.

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किन रोगों में है लाभदायक (Keeda Jadi benefits)

– कीड़ाजड़ी कैंसर,

– वैवाहिक जीवन को सुखद करने वाली दवा के रूप में,

– शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली बढ़ाने

– शरीर में ऊर्जा का स्तर बढ़ाने,

– हृदय रोगों में लाभदायक,

– किडनी मरीजों के लिए फायदेमंद,

– फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाने

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यारसा गंबू अर्थात कीड़ा जड़ी अन्य गंभीर बिमारियों में भी फायदेमंद है. हालांकि, इसके स्वास्थ्य लाभों पर अभी शोध जारी है.

Posted By : Sumit Kumar Verma

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