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Jharkhand news: कोरवा जनजाति के आवास निर्माण की राशि डकार गये दलाल, गुमला के गनीदरा गांव का जानें हाल

Updated at : 24 Mar 2022 3:51 PM (IST)
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Jharkhand news: कोरवा जनजाति के आवास निर्माण की राशि डकार गये दलाल, गुमला के गनीदरा गांव का जानें हाल

jharkhand news: गुमला के गनीदरा गांव के ग्रामीण आज भी खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं. इनको मिले सरकारी आवास निर्माण की राशि को भी दलाल डकार गये हैं. इसके अलावा इन ग्रामीणों को राशन लाने के लिए करीब 8 किलोमीटर दूर जाने को मजबूर होना पड़ता है.

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Jharkhand news: गुमला जिला में भ्रष्टाचार का खेल चल रहा है. विलुप्त प्राय: कोरवा जनजाति के लोग सबसे ज्यादा ठगे जा रहे हैं. ITDA विभाग से कोरवा जनजाति के लोगों के लिए आवास स्वीकृत हुआ है. प्रत्येक लाभुक 40-40 हजार रुपये भी लाभुकों के खाता में जमा हो गया है, लेकिन प्रशासन से मिलीभगत कर कुछ दलालों ने लाभुकों को झांसे में लेकर 40-40 हजार रुपये निकासी कर ली. लेकिन, अभी तक आवास बनाने का काम शुरू नहीं हुआ है] जबकि दलालों ने दो माह पहले लाभुकों से हस्ताक्षर कराकर बैंक से पैसा निकासी कर लिया है. ग्रामीणों ने बिरसा आवास में हुई धांधली की जानकारी दी. साथ ही जिस दलाल द्वारा पैसा लिया गया है. उससे पैसा वापस दिलाने या फिर आवास बनवाने की मांग भी किया है.

एमओ गांव तक नहीं पहुंचाते राशन

डाकिया योजना के तहत प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी द्वारा कोरवा जनजाति के गांव तक पहुंचा कर पैकेटबंद राशन देना है. लेकिन, कोरवा जनजाति के गांवों तक राशन पहुंचाकर नहीं दिया जा रहा है. लोगों को राशन लाने के लिए 7 से 8 किमी की दूरी तय करनी पड़ रही है. रास्ता नहीं होने के कारण ग्रामीण पैदल या फिर घोड़े से राशन सामग्री डीलर के घर ले जाते हैं. गनीदरा गांव करीब 600 फीट ऊंचे पहाड़ पर बसा हुआ है.

ग्रामीणों ने सुनाया दर्द

गनीदरा गांव के बीरो कोरवा, चंदू कोरवा, सोधो कोरवाइन, छोटन कोरवा, जीवन कोरवा, पतमानिया, अंकिता, बिरेंद्र, बिरसाय, बिनल, राजू ने कहा कि गनीदरा में 38 घर है. जहां आदिम कोरवा जनजाति के लोग निवास करते हैं. गांव तक जाने के लिए जंगल-पहाड़ के बीच कच्ची सड़क है. पेयजल के लिए सालों भर डाड़ी का पानी पीते हैं. बीमार होने पर लोगों को बड़ी मुसीबतों का सामना करना पड़ता है. गांव में बिजली नहीं है.

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जंगल-पहाड़ के रास्ते लाते हैं राशन

राशन दुकान में 50-60 रुपये में मिट्टी तेल मिलता है. पैसा के अभाव में तेल नहीं खरीदते हैं. जंगली जानवरों का डर हमेशा बना रहता है. गांव में 6 घोड़ा है. जिसका उपयोग कुछ लोग 7 से 8 किमी दूर नटावल और भागीटोली गांव में लकड़ी ले जाकर बेचने या चरकाटोली गांव से राशन लादकर लाने में करते हैं. बाकी लोग पैदल उतने दूर से जंगल पहाड़ के उबड़-खाबड़ रास्ते से राशन ढोकर घर को जाते हैं. गांव पहुंचा कर राशन नहीं दिया जाता है. महिलाओं ने बताया कि गांव में दो माह पूर्व में एक चबूतरा का निर्माण किया गया है. पुरुष मजदूरों को मजदूरी भुगतान हो गया, लेकिन महिलाओं को आज तक मजदूरी नहीं मिली है.

35 लोगों का पैसा ले लिया दलाल

बीरो कोरवा ने कहा कि मेरे और मेरे बेटे के अलावा गनीदरा, नवाटोली और लिटियाचुवां गांव के 35 लोगों को बिरसा आवास मिला है. जिसका पहला किस्त बैंक से सभी ने 40-40 हजार रुपये निकाले हैं. पैसा निकालने के लिए नवाडीह का एक आदमी हमें गुमला ले गया था. उसने सबका घर बनवा दूंगा कहकर पहला किस्त का पैसा 40-40 हजार रुपये ले लिया है. मगर दो माह बीतने पर अभी तक कुछ काम का अता-पता नहीं है. मजबूरी में अब मिट्टी का घर बना रहा हूं.

कोरवा परिवार को नहीं मिलता राशन

गनीदरा गांव की फुलकुमारी कोरवाइन को राशन नहीं मिलता है. उन्होंने ऑनलाइन आवेदन कागज को दिखाते हुए बताया कि इस गांव में गिने चुने परिवार हैं. जिसे राशन नहीं मिलता है. मैं 2 साल पहले राशन कार्ड ऑनलाइन आवेदन किया, इसके बावजूद आज तक राशन नहीं मिला है. ऑनलाइन कागज दिखाने के बावजूद डीलर कहता है कि राशन कार्ड नहीं बना है. कार्ड बनेगा, तभी राशन मिलेगा. राशन नहीं मिलने से भरण-पोषण को लेकर बहुत काफी चिंतित हैं.

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ग्रामीणों की मदद करे प्रशासन : प्रदीप मिंज

समाजसेवी प्रदीप मिंज ने कहा कि इस गांव में समस्या गंभीर है. मगर जनप्रतिनिधि, जिला एवं प्रखंड प्रशासन चाहें, तो इन गांव के लोगों को समस्या से छुटकारा दिला सकते हैं.

समस्या का समाधान किया जायेगा : एसडीओ

एसडीओ सह बीडीओ प्रीति किस्कू ने कहा कि उस गांव की जो भी समस्या है. प्रखंड स्तर से जो समाधान करने लायक है. उसका समाधान किया जायेगा और बाकी को जिला से ही समाधान किया जा सकता है.

Posted By: Samir Ranjan

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