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Prabhat Khabar Special: डेढ़ साल पहले IED ब्लास्ट में हुई थी किसान रामदेव की मौत, अब इस हाल में जी रहा परिवार

Updated at : 18 Jan 2023 6:46 AM (IST)
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Prabhat Khabar Special: डेढ़ साल पहले IED ब्लास्ट में हुई थी किसान रामदेव की मौत, अब इस हाल में जी रहा परिवार

गुमला के केरागानी जंगल में नक्सलियों के बिछाए IED की चपेट में आने से किसान रामदेव मुंडा की वर्ष 2021 में मौत हो गई थी. इस मौत के डेढ़ साल गुजर जाने के बाद इनके परिवार वालों के सामने आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है. मृतक की पत्नी कैंसर से पीड़ित है, वहीं तीन बेटों की पढ़ाई पर भी संकट मडराने लगा है.

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गुमला, जगरनाथ पासवान : गुमला जिले के कुरूमगढ़ थाना स्थित केरागानी जंगल में डेढ़ साल पहले (14 जुलाई, 2021) भाकपा माओवादी द्वारा जंगल में बिछाये गये आईईडी ब्लास्ट में बारडीह गांव के किसान रामदेव मुंडा (40 वर्ष) की मौत हो गयी थी. रामदेव की मौत के बाद नक्सली घटना को देखते हुए प्रशासन ने मृतक के बड़े बेटे को सरकारी नौकरी, मुआवजा और परिवार को सरकारी सुविधा देने का वादा किया था. लेकिन, गुमला प्रशासन द्वारा मात्र 20 हजार रुपये रामदेव के अंतिम संस्कार, पत्नी को विधवा पेंशन और राशन कार्ड बनवा कर दिया. लेकिन, अभी तक बेटे को सरकारी नौकरी नहीं मिली है. न ही किसी प्रकार का नगद मुआवजा राशि दी गयी. परिवार के लोग अधिकारियों से मिलते हैं या फोन करते हैं, तो सिर्फ आश्वासन मिल रहा है. परिवार की जीविका कैसे चलेगी. इसकी चिंता किसी को नहीं है. अभी परिजन आर्थिक संकट में जी रहे हैं.

पत्नी को हुआ कैंसर, बच्चों की पढ़ाई पर संकट

पत्नी फुलमनी देवी को मार्च 2022 में कैंसर हो गया है. उसके पास इलाज के लिए भी पैसा नहीं है. लाखों रुपये इलाज में खर्च है. तीन बेटे सूरज मुंडा इंटर पास कर गया. नामांकन के लिए पैसा नहीं है. मंझला बेटा अमरदीप मुंडा सखुवापानी स्कूल में नौवीं कक्षा और छोटा बेटा राजदीप मुंडा लुथेरान स्कूल गुमला में आठवीं कक्षा में पढ़ता है. लेकिन, इन दोनों बच्चों के स्कूल में पढ़ाने के लिए पैसा नहीं है. रामदेव जब जीवित थे, तो गांव में खेतीबारी कर बच्चों को पढ़ाने के अलावा घर की जीविका चलाते थे. परंतु उनकी मौत से परिवार संकट में आ गया. रिश्तेदारों से मदद लेकर परिवार की जीविका चल रही है. खाने-पीने में रिश्तेदार मदद कर रहे हैं.

प्रशासन मदद करें, नहीं तो मैं बीमारी से मर जाऊंगी : पत्नी

मृतक रामदेव मुंडा की पत्नी फुलमनी देवी ने कहा कि पति की मौत के बाद परिवार में दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. जीविका के लिए गुमला शहर के चेटर टुकूटोली में रिश्तेदार के घर में रह रहे हैं. 2021 के दिसंबर में बीमार हुई. जांच कराने पर कैंसर के लक्षण मिला. लेकिन, संकट यह है कि अब इलाज कैसे कराये. घर में खाने के लिए पैसा नहीं है, तो इलाज के लिए कहां से लाए. अगर प्रशासन मदद नहीं करेगा, तो बीमारी से मैं मर जाऊंगी. उन्होंने पति की मौत के एवज में बेटे सूरज मुंडा को सरकारी नौकरी देने की मांग की. जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके.

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पुलिस को रास्ता दिखाने में गयी जान : पुत्र

मृतक रामदेव के पुत्र राजदीप मुंडा ने बताया कि 2021 के जुलाई माह में हमलोग घर पर थे. तभी सुरक्षा बल घर में घुस आये. जंगल का रास्ता दिखाने के लिए सात-आठ युवकों को जंगल ले जा रहे थे. तभी मेरे पिता रामदेव मुंडा और बड़े पिता रामलाल मुंडा भी बच्चों को पुलिस द्वारा जंगल ले जाने पर वे साथ में चल पड़े. पुलिस हमें जंगल ले गयी, ताकि जंगल का रास्ता बता सके. 13 जुलाई की दोपहर को जंगल में पुलिस ले गयी. रातभर जंगल में रखा. बिस्किट खाने को दिया. रातभर सो नहीं पाये. 14 जुलाई की सुबह पुन: रास्ता बताने के लिए पुलिस हमलोगों को जंगल के रास्ते ले जा रही थी. पुलिस फोर्स पीछे चल रही थी. जबकि गांव के लोगों को आगे-आगे चलने के लिए कहा गया था. तभी केरागानी जंगल में मेरे पिता रामदेव मुंडा का पैर जंगल में बिछे आइइडी बम में पड़ गया. बम के साथ मेरे पिता उड़ गये और उनकी मौत हो गयी थी.

15 लाख का इनामी नक्सली मारा गया था

14 जुलाई, 2021 को बम ब्लास्ट में किसान रामदेव मुंडा की मौत हो गयी थी. कोबरा बटालियन का एक खोजी कुत्ता भी शहीद हुआ था. इसके बाद भी पुलिस का अभियान नहीं रूका था और 15 जुलाई, 2021 को केरागानी जंगल में छिपकर बैठे 15 लाख के इनामी भाकपा माओवादी के शीर्ष नेता बुद्धेश्वर उरांव को सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ में मार गिराया था.

डीसी से मिलकर रखी फरियाद

मंगलवार को फुलमनी देवी अपने बेटे के साथ डीसी से मिली. उत्पन्न संकट की जानकारी देते हुए मदद की गुहार लगायी है. इसपर डीसी सुशांत गौरव ने मामले को गंभीरता से लिया है. साथ ही परिवार को सरकारी प्रक्रिया के तहत मदद करने का आश्वासन दिये.

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