गुमला की 7 असुर जनजातियों की लड़कियों को तस्करों ने दिल्ली में बेचा, तीन लोग लापता
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 31 Jan 2022 1:21 PM
गुमला की असुर जनजाति की लड़कियों को तस्करों ने दिल्ली में बेच दिया है. सभी का फर्जी आधार कार्ड बनाकर सभी की उम्र 18 साल कर दी गयी है. इनमें से कई लड़कियां तो लापता है.
गुमला : विलुप्त प्राय: असुर जनजाति की सात नाबालिग लड़कियों को मानव तस्करों ने दिल्ली में ले जाकर बेच दिया है. किसी को एक साल पहले तो किसी को दो से तीन साल पहले बेचा गया है. लड़कियों की उम्र 15 से 16 साल है. परंतु मानव तस्करों ने फर्जी आधार कार्ड बनाकर सभी की उम्र 18 वर्ष कर दिया है.
इसमें कुछ लड़कियां घरेलू काम कर रही हैं तो कुछ लड़कियां दिल्ली में लापता हो गयी है और परिजनों से संपर्क नहीं है. मामला, गुमला जिले के घाघरा प्रखंड स्थित तेंदार पाकरकोना गांव की है. मानव तस्करी की शिकार हुई लड़कियों में पाकरकोना गांव की फुलमति असुर, मोनिका असुर, गीता असुर, निर्मला असुर, मलंती असुर, सुनीता असुर व अमृता असुर है. जबकि पाकरकोना से सटे सनईटांगर गांव की निशा असुर को भी तस्करों ने दिल्ली में बेचा है.
दिल्ली में पाकरकोना गांव की बीती असुर (बदला नाम) को भी बेचा गया था. परंतु दिल्ली पुलिस ने बीता असुर को बरामद कर गुमला पहुंचा दिया. गुमला पहुंचने के बाद बीती असुर ने खुलासा की कि पाकरकोना गांव की अन्य सात असुर जनजाति लड़कियों को भी दिल्ली में बेचा गया है. बीता के अनुसार सभी लड़कियों को घरेलू काम करने के लिए छह से 10 हजार रुपये में बेचा जाता है.
हर एक लड़की को घरेलू काम करने के लिए छह से 10 हजार रुपये मजदूरी मिलती है. इसमें एक महीने का मजदूरी का पैसा मानव तस्कर ले लेता है. बीती ने यह भी बताया कि गुमला से दिल्ली जाने से पहले आधार कार्ड का फोटो कॉपी मानव तस्कर द्वारा ले लिया जाता है. इसके बाद दिल्ली में पहुंचकर आधार कार्ड में उम्र चेंज कर 18 से 19 वर्ष कर दिया जाता है. जिससे जब कोई जांच हो, तो लड़कियों की उम्र अधिक बताया जा सके.
बीती असुर ने बताया उसके अलावा अन्य तीन लड़कियों को मानव तस्कर दिल्ली में ले जाकर बेच दिया था. जिसमें बीती सकुशल गुमला आ गयी. परंतु अन्य तीन लड़कियां फुलमति असुर, मोनिका असुर व गीता असुर दिल्ली में लापता है. बीती ने बताया कि शुरू के कुछ दिन सभी लड़कियां संपर्क में थी. फोन से बात होती थी. सभी अलग-अलग जगह काम करती थी. परंतु इधर, कई महीनों से ये तीनों लड़कियां लापता है.
तेंदार से सटे पाकरकोना गांव में आदिम जनजाति असुर परिवार के लोग रहते हैं. यहां 21 परिवार झोपड़ीनुमा घर बनाकर रहते हैं. यह गांव जंगल व पहाड़ों के बीच बसा है. उग्रवाद क्षेत्र भी है. यहां रोजगार की कोई साधन नहीं है. इस गांव में सरकार की कोई भी योजना संचालित नहीं है. अभी स्कूल भी बंद है. परिवार के लोग गरीबी में भी जी रहे हैं. इस कारण गांव की लड़कियां मानव तस्करों के बहकावे में आकर दिल्ली में बेची जा रही है.
गुमला जिला के दूरस्थ व पहाड़ी इलाकों में रहने वाली लड़कियां अक्सर बहकावे में आकर तस्करी का शिकार हो जाती है. आदिम जनजाति की लड़कियां अधिक बेची जाती है. पाकरकोना गांव से अन्य लड़कियां गायब है. इसकी जांच करा लेते हैं.
कृपा खेस, चेयरमैन, सीडब्ल्यूसी गुमला
रिपोर्ट – दुर्जय पासवान
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