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Diwali 2022: गुमला में मिट्टी के दीये समेत खिलौनों पर पड़ी महंगाई की मार, 150 रुपये सैकड़ा पहुंचा दीया

Updated at : 19 Oct 2022 9:13 PM (IST)
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Diwali 2022: गुमला में मिट्टी के दीये समेत खिलौनों पर पड़ी महंगाई की मार, 150 रुपये सैकड़ा पहुंचा दीया

गुमला के बाजारों में मिट्टी के दीये समेत बच्चों के खिलौने आने लगे हैं. लेकिन, इस बार इन सामानों पर महंगाई की मार पड़ी है. लोगों को पिछले साल की तुलना में इस बार और अधिक जेबें ढीली करनी पड़ेगी. अभी 150 रुपये प्रति सैकड़े की दर से दीये बिक रहे हैं. इनके दामों में और इजाफा होने की संभावना है.

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Diwali 2022: दीपावली पर्व का बाजार सज गया है. प्राय: दुकान चाहे वह दुकान फुटपाथ पर लगी हो या स्थायी दुकान हो. सभी में लोगों की भीड़ देखी जा रही है. दुकानों में सजी तरह-तरह की सामानें लोगों को अपनी ओर लुभा रही है. वहीं, मिट्टी से बने दीया, खिलौना सहित पूजा में उपयोग होने वाली कई उपयोगी सामान भी बाजार में आ चुका है. इन सामानों के बाजार में आने के साथ ही खरीदारी भी शुरू हो गयी है. मिट्टी के बने दीये समेत खिलौनों पर महंगाई की मार पड़ी है.

मिट्टी के दीये और खिलौने पर पड़े महंगाई की मार

इस साल अभी मिडियम साइज का मिट्टी दीया 20 रुपये प्रति दर्जन एवं 150 प्रति सैकड़ा (100 पीस) की दर से बिक रहा है. वहीं, छोटा दीया 15 रुपये दर्जन एवं 80 रुपये प्रति सैकड़ा तथा बड़ा साइज का दीया 10 रुपये प्रति पीस की दर से बिक्री हो रहा है. बता दें कि गुमला में हर साल मिट्टी दीया की कीमत बढ़ती रही है. शुरुआती दौर में भले ही मिडियम दीया कम कीमत में मिलती है, लेकिन दीपावली के आते-आते कीमत बढ़ जाती है.

मिट्टी से बने ग्वालिन के दाम पर भी बढ़े

पिछले साल मिट्टी का मिडियम दीया शुरुआती दौर में प्रति दर्जन 15 से 20 रुपये की दर से बिक्री हुआ था, जबकि दीपावली आते-आते लगभग 50 रुपये प्रति दर्जन तक बिक्री हुआ था. वहीं, मिट्टी से बने ग्वालिन और खिलौनों की कीमत इस साल शुरुआती समय से ही बढ़ी हुई है. इस साल बाजार में ग्वालिन तीन साइज का है जिसमें छोटा ग्वालिन 40 रुपये, मिडियम ग्वालिन 50 रुपये एवं बड़ा ग्वालिन 80 रुपये प्रति पीस की दर से बिक्री हो रहा है, जबकि पिछले साल 20 से 60 रुपये प्रति पीस की दर से बिक्री हुआ है.

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बढ़ी खिलौनों की कीमत

मिट्टी से बने खिलौनों हाथी, शेर, घोड़ा, तोता आदि प्रति पीस 10 से 20 रुपये की दर से बिक्री हो रहा है, जबकि पिछले साल पांच से 10 रुपये प्रति पीस की दर से बिक्री हुआ है. इसके साथ ही मिट्टी से बने अन्य खिलौने डेगची, कढ़ाही, जाता, सूप, ताय, बाल्टी, घड़ा, चूल्हा, कटोरी, प्लेट आदि सभी चीजें प्रति पीस 10 रुपये की दर से बिक्री हो रहा है, जबकि पिछले साल पांच रुपये प्रति पीस की दर से बिक्री हुआ है. बहरहाल, खिलौनों की कीमत चाहे जो भी हो, बच्चे खिलौने देखकर काफी उत्साहित हैं.

बढ़ सकती है मिडियम दीया और ग्वालिन की कीमत

मिट्टी से तरह-तरह के सामान बनाने वाले कुम्हारों की मानें, तो इस साल अभी तक भले ही प्रति दर्जन 20 रुपये एवं प्रति सैकड़ा 150 रुपये हो, लेकिन बाद में इसकी कीमत बढ़ने के आसार है. क्योंकि कई बार ऐसा होता है कि डिमांड के अनुरूप दीया उपलब्ध नहीं रहता है. जिस कारण दीया कम पड़ जाता है और कीमत बढ़ जाती है. खिलौनों की कीमत तो सामान्य ही रहेगा, लेकिन ग्वालिन का कीमत बढ़ सकती है.

इस साल कुम्हार संघ का नहीं लगेगा मेला

वहीं, जिला कुम्हार संघ गुमला के अध्यक्ष राजीव रंजन महतो ने बताया कि जिले भर में लगभग 500 कुम्हार परिवार हैं. जो मिट्टी से तरह-तरह के सामान बनाते हैं. ऐसे ही त्योहार से साल भर का खर्चा निकालते हैं. उन्होंने बताया कि हर साल संघ की ओर से दीपावली में अपने उत्पादों की बिक्री करने के लिए मेला लगाया जाता रहा है, लेकिन पिछले दो साल कोरोना काल के कारण मेला नहीं लगा पाये. इस साल नगर परिषद द्वारा बाजार लगाया गया है. संभावना है कि इस साल भी संघ की ओर से मेला नहीं लगाया जा सकेगा.

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रिपोर्ट : जगरनाथ, गुमला.

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Samir Ranjan

लेखक के बारे में

By Samir Ranjan

Senior Journalist with more than 20 years of reporting and desk work experience in print, tv and digital media

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