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झारखंड : गिरिडीह के तिसरी में नहीं है कोई डिग्री कॉलेज, इंटर के बाद स्टूडेंट्स पढ़ाई छोड़ने को होते हैं विवश

Updated at : 17 Apr 2023 5:31 PM (IST)
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झारखंड : गिरिडीह के तिसरी में नहीं है कोई डिग्री कॉलेज, इंटर के बाद स्टूडेंट्स पढ़ाई छोड़ने को होते हैं विवश

गिरिडीह के तिसरी में कोई डिग्री कॉलेज नहीं होने से स्टूडेंट्स को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. इंटर के बाद कई स्टूडेंट्स पढ़ाई छोड़ने को विवश है. यह क्षेत्र झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी का गृह प्रखंड है.

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तिसरी (गिरिडीह), अमरदीप सिन्हा : सरकार देश में शिक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए स्कूल-कॉलेज खोल रही है. शिक्षा के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए कई योजनाएं चल रही है. लेकिन, केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री अन्नपूर्णा देवी के लोकसभा क्षेत्र और झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी का गृह प्रखंड तिसरी उच्च स्तरीय शिक्षा के मामले में काफी पिछड़ा हुआ है. यहां अभी तक एक डिग्री कॉलेज नहीं खुला है. इसके कारण प्रखंड की 60 प्रतिशत से ज्यादा खासकर गरीब छात्रा इंटर करने के बाद पढ़ाई छोड़ देती हैं. इनमें एस व एसटी की अधिक छात्राएं होती हैं. जबकि, सरकार इन दोनों वर्गों को कई सुविधाएं तो दे रही है.

गरीब परिवार की लड़कियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में होती है परेशानी

लड़कियां गरीबी के कारण बाहर जाकर आगे की पढ़ाई नहीं कर पाती हैं. संपन्न लोग तो अपने बच्चों को हजारीबाग, रांची, धनबाद, जमशेदपुर या अन्य राज्यों में पढ़ने के लिए भेज देते हैं. वहीं, गरीब अपने बच्चों को तिसरी से गिरिडीह भी पढ़ने के नहीं भेज पाते हैं. ऐसे में गरीबों के बच्चे उच्च स्तरीय शिक्षा से वंचित रह जाते हैं. तिसरी वासियों की क्षेत्र में डिग्री कॉलेज खोलने की मांग काफी पुरानी है, लेकिन इस ओर किसी जनप्रतिनिधि ने ध्यान नहीं दिया है.

काफी पुराना है प्रखंड

तिसरी प्रखंड बहुत ही पुराना है. हजारीबाग जिला में भी तिसरी प्रखंड रहा है. बेशकीमती माइका को लेकर तिसरी का नाम विदेशों में भी रहा है. माइका से सरकार को बराबर राजस्व की प्राप्ति होती रही है, लेकिन उच्च स्तरीय शिक्षा की व्यवस्था को लेकर न सरकार और न ही कोई जनप्रतिनिधियों गंभीरता दिखायी है. तिसरी में तीन प्लस टू विद्यालय हैं. इनमें प्लस टू विद्यालय अग्रवाला उच्च विद्यालय, प्लस टू विद्यालय तिसरी बरहमसिया और हाल में ही बना प्लस टू विद्यालय नावाडीह शामिल हैं. यहां से प्रतिवर्ष लगभग एक हजार विद्यार्थी इंटर पास करते हैं. डिग्री कालेज नहीं रहने और गरीबी के कारण सैकड़ों विद्यार्थियों को पढ़ाई बीच में छोड़ देनी पड़ती है. अभिभावकों को उच्च शिक्षा नहीं दिलाने का मलाल रहता है.

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जल्द शुरू होगी डिग्री की पढ़ाई : बाबूलाल मरांडी

भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा कि वर्तमान में हेमंत सोरेन की सरकार में जो भी स्कूल चल रही है, वहां शिक्षकों के अभाव में पढ़ाई नहीं हो रही है. सरकार को चाहिए कि अविलंब उन स्कूलों में शिक्षकों को बहाल करे. कहा कि यह सच्चाई है कि तिसरी में डिग्री कालेज नहीं होने से छात्रों के साथ-साथ अभिभावकों को भी परेशानी हो रही है. अब यह समस्या ज्यादा दिन तक नहीं रहेगी. उनके प्रयास का परिणाम जल्द दिखेगा. तिसरी में जल्द ही डिग्री कॉलेज खुलेगा.

क्या कहते हैं अभिभावक

अभिभावक संजय सिंह ने कहा कि यहां नेता केवल वोट लेना जानते हैं. कुर्सी पर बैठने के लिए लोगों को केवल आश्वासन मिलता है. तिसरी के ही बाबूलाल मरांडी झारखंड के मुख्यमंत्री रहे हैं और अभी इसी लोकसभा क्षेत्र की सांसद अन्नपूर्णा देवी केंद्र में शिक्षा राज्यमंत्री हैं. इसके बाद भी क्षेत्र में डिग्री कॉलेज नहीं खुल रहा है. कॉलेज नहीं रहने से लोग खासकर लड़कियों को बाहर नहीं भेज पाते हैं.

क्या कहते हैं छात्र

इंटर के छात्र सक्षम सिन्हा ने कहा कि डिग्री कालेज नहीं रहने से गरीब क्या सक्षम लोगों को भी अपनी बच्चियों को बाहर भेजकर पढ़ाने में परेशानी हो रही है. आज हमलोग तिसरी में इंटर करने के बाद हजारीबाग, रांची, धनबाद आदि शहरों में जाते हैं. इससे एक तो परिवार से दूर रहते हैं और उसपर आर्थिक बोझ अभिभावकों को ज्यादा उठाना पड़ता है. सरकार सभी प्रखंड में एक डिग्री कालेज खोले. वहीं, छात्रा काजल कुमारी का कहना है कि सरकार और जनप्रतिनिधियों को चाहिए कि वह क्षेत्र में अविलंब डिग्री कॉलेज खोले. कई प्रखंडों में डिग्री कॉलेज है तो फिर तिसरी में क्यों नहीं. सांसद व विधायक अपने फायदा के लिए चुनाव लड़ते हैं. उन्हें तिसरी के भविष्य से कोई लेना-देना नहीं है. यहां डिग्री कालेज की मांग वर्षों पुरानी है. सैकड़ों विद्यार्थी इंटर के बाद पढ़ाई छोड़ दे रहे हैं जो शर्म की बात है.

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