बैजू मंगेशकर लेकर आये संत कबीर की रचनाओं का गुलदस्ता 'मन मस्त कबीरा'! लता मंगेशकर को देना चाहते थे सरप्राइज

बैजू मंगेशकर कहते हैं, 'मन मस्त कबीरा' ब्रह्मांड और सर्वशक्तिमान का आदेश और कबीर के लिए इस संगीतमय गीत को बनाने का तरीका है. ये थोड़ा अलग सुनाई दे लेकिन महान 'कबीर दास ने मुझे दूसरे तरीके से इस महान प्रस्तुति के लिए चुना हैं!
स्वर कोकिला लता मंगेशकर के भतीजे बैजू मंगेशकर लेकर आये हैं 10 अद्भुत गीतों का समूह जो लोगों को संत कबीर की अनमोल व्याख्याओं की एक संगीतमय प्रस्तुति से अनुभूति कराएगा. कवि-संत कबीर के गीतों के गायक-संगीतकार के रूप में बैजू मंगेशकर की ‘मन मस्त कबीरा’ इस साल की सबसे बड़ी भेंट हैं जो आत्मा को झकझोर देने वाली संगीत पेशकशों में से एक है.
बैजू मंगेशकर कहते हैं, ‘मन मस्त कबीरा’ ब्रह्मांड और सर्वशक्तिमान का आदेश और कबीर के लिए इस संगीतमय गीत को बनाने का तरीका है. ये थोड़ा अलग सुनाई दे लेकिन महान ‘कबीर दास ने मुझे दूसरे तरीके से इस महान प्रस्तुति के लिए चुना है!
कुछ समय से बैजू के मन में हिंदी एल्बम बनाने का विचार चल रहा था. वो कहते हैं कि “लता जी चाहती थीं कि मैं हमारे पूज्य कवियों या कवि-संतों की रचना पर राष्ट्रीय भाषा हिंदी में एक एल्बम करूं. जब मैंने इस एल्बम की रचना और रिकॉर्डिंग शुरू की तो मैंने इसे एक सीक्रेट के रूप में रखा था क्योंकि मैं उन्हें सब तैयार होने के बाद सरप्राइज देना चाहता था. काश वो आज हमारे बीच होतीं.” लता जी के बीमार पड़ने और गुजर जाने के बाद से इस प्रोजेक्ट को 2 महीने के लिए रोकना पड़ा. बैजू आगे कहते हैं कि,” इस पूरे प्रस्तुति के दौरान मेरे मन में भारी क्षति और खालीपन की भावना थी उनकी मान्यता, सुझाव और प्रशंसा मेरे लिए दुनिया थी.
बैजू कहते है कि लता जी की निधन ने एक गहरा शून्य छोड़ दिया है, हालांकि उनके पिता पंडित हृदयनाथ मंगेशकर ने गाने सुनकर खुशी जाहिर की. वो कहते हैं, “मेरे पिता को आश्चर्य हुआ कि एल्बम में 10 गाने हैं. उन्होंने कुछ प्रस्तुतियों और रचनाओं पर प्रसन्नता व्यक्त की और स्वीकृति का संकेत दिया! उनकी रजामन्दी मेरे लिये एक सुखद अनुभव है क्योंकि जब आप संत कबीर जैसे श्रद्धेय कवि-संत के गीतों की रचना करते हैं तो यह एक बड़ी जिम्मेदारी होती है.
सारेगामा इस एल्बम के प्रस्तुतकर्ता हैं. रहस्यवादी भक्ति के साथ कबीर की कालातीत एकता इस एल्बम का मूल सार है जो संगीत शैलियों के एक समकालीन स्पेक्ट्रम को प्रकट करता है जिसमें अप-टेंपो गीतों से लेकर इत्मीनान से गाथागीत के विभिन्न मूड को प्रकट करते हैं – कई बार आनंदमय और हर्षित; दूसरी बार चिंतनशील या विचारशील. इसकी धुनें विभिन्न हिंदुस्तानी रागों में निहित हैं.
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कुछ असाधारण स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध संगीतकारों के संगीत इनपुट द्वारा प्रवर्धित उनके सभी एल्बमों के साथ ‘मन मस्त कबीरा’ में जतिन शर्मा और रितम चंगकाकोटी द्वारा सुरुचिपूर्ण संगीत की व्यवस्था शामिल है. मन मस्त कबीरा, बैजू की आवाज, भावपूर्ण गायन और उनकी हस्ताक्षर शैली के मखमली मिश्रण – उनकी शानदार जड़ों और उनकी उदार रचनात्मकता से विकसित हुई, जिसके परिणामस्वरूप कबीर के गीतों का एक गूंजता हुआ प्रवाह है जो सार्वभौमिक प्रेम के दायरे को गले लगाता है.
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लेखक के बारे में
By Budhmani Minj
Senior Journalist having over 10 years experience in Digital, Print and Electronic Media.Good writing skill in Entertainment Beat. Fellow of Centre for Cultural Resources and Training .
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