Jnanpith Award: Gulzar और संस्कृत विद्वान रामभद्राचार्य को मिलेगा सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान, जानिए इनका योगदान

Published by : Ashish Lata Updated At : 18 Feb 2024 11:22 AM

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Gulzar Jnanpith Award: 58वें ज्ञानपीठ पुरस्कार की घोषणा हो गई है. प्रसिद्ध उर्दू कवि गुलजार और संस्कृत विद्वान जगद्गुरु रामभद्राचार्य को चयनित किया गया है. पुरस्कार में 21 लाख रुपये की राशि, वाग्देवी की एक प्रतिमा और एक प्रशस्ति पत्र दिया जाता है.

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Gulzar Jnanpith Award: प्रसिद्ध उर्दू कवि गुलजार और संस्कृत विद्वान जगद्गुरु रामभद्राचार्य को 58वें ज्ञानपीठ पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है. ज्ञानपीठ चयन समिति ने शनिवार को यह घोषणा की. गुलजार के नाम से मशहूर संपूर्ण सिंह कालरा हिंदी सिनेमा में अपने कार्य के लिए पहचाने जाते हैं और वर्तमान समय के बेहतरीन उर्दू कवियों में शुमार हैं. चित्रकूट में तुलसी पीठ के संस्थापक और प्रमुख रामभद्राचार्य एक प्रसिद्ध हिंदू आध्यात्मिक गुरु, शिक्षक और चार महाकाव्य समेत 240 से अधिक पुस्तकों के लेखक हैं.


ज्ञानपीठ चयन समिति ने क्या कहा
ज्ञानपीठ चयन समिति ने एक बयान में कहा, ‘‘यह पुरस्कार (2023 के लिए) दो भाषाओं के प्रतिष्ठित लेखकों को देने का निर्णय लिया गया है – संस्कृत साहित्यकार जगद्गुरु रामभद्राचार्य और प्रसिद्ध उर्दू साहित्यकार गुलजार.’’ इससे पहले गुलजार को उर्दू में अपने कार्य के लिए 2002 में साहित्य अकादमी पुरस्कार, 2013 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार, 2004 में पद्म भूषण और कम से कम पांच राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिल चुके हैं.


गुलजार के गीतों को दुनियाभर ने सराहा
उनके कुछ बेहतरीन कार्यों में फिल्म ‘‘स्लमडॉग मिलयेनियर’’ का गीत ‘‘जय हो’’ शामिल है, जिसे 2009 में ऑस्कर पुरस्कार और 2010 में ग्रैमी पुरस्कार मिला. समीक्षकों ने प्रशंसित फिल्मों जैसे ‘‘माचिस’’ (1996), ‘‘ओमकारा’’ (2006), ‘‘दिल से’’ (1998) और ‘‘गुरु’’ (2007) सहित अन्य फिल्मों में गुलजार के गीतों को सराहा. गुलजार ने कुछ सदाबहार पुरस्कार विजेता फिल्मों का भी निर्देशन किया, जिनमें ‘‘कोशिश’’ (1972), ‘‘परिचय’’ (1972), ‘‘मौसम’’ (1975), ‘‘इजाजत’’ (1977) और टेलीविजन धारावाहिक ‘‘मिर्जा गालिब’’ (1988) शामिल हैं.


गुलजार साहित्य के क्षेत्र में भी अव्वल
भारतीय ज्ञानपीठ ने एक बयान में कहा, ‘‘अपने लंबे फिल्मी करियर के साथ-साथ गुलजार साहित्य के क्षेत्र में भी मील के नये पत्थर स्थापित करते रहे हैं. कविता में उन्होंने एक नई शैली ‘त्रिवेणी’ का आविष्कार किया है. गुलजार ने अपनी कविताओं के माध्यम से हमेशा कुछ नया रचा है. पिछले कुछ समय से वह बच्चों की कविता पर भी खास ध्यान दे रहे हैं.’’

रामभद्राचार्य रामानंद के बारे में
रामभद्राचार्य रामानंद संप्रदाय के वर्तमान चार जगद्गुरु रामानंदाचार्यों में से एक हैं और 1982 में उन्हें यह उपाधि मिली थी. 22 भाषाओं पर अधिकार रखने वाले रामभद्राचार्य ने संस्कृत, हिंदी, अवधी और मैथिली सहित कई भारतीय भाषाओं में रचनाओं का सृजन किया है. 2015 में उन्हें पद्म विभूषण पुरस्कार मिला. रामभद्राचार्य की वेबसाइट के अनुसार, उनका नाम गिरिधर मिश्र था. दो महीने की उम्र में एक प्रकार के संक्रामक रोग ‘ट्रेकोमा’ के कारण उनकी आंखों की रोशनी चली गई और शुरुआती वर्षों में उनके दादा ने उन्हें घर पर ही पढ़ाया. पांच साल की उम्र में उन्होंने पूरी भगवत गीता और आठ साल की उम्र में पूरी रामचरितमानस याद कर ली थी.

ज्ञानपीठ पुरस्कार के साथ मिलेगी इतने लाख की राशि
वर्ष 1944 में स्थापित ज्ञानपीठ पुरस्कार भारतीय साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रतिवर्ष दिया जाता है. यह पुरस्कार संस्कृत भाषा के लिए दूसरी बार और उर्दू भाषा के लिए पांचवीं बार दिया जा रहा है. पुरस्कार में 21 लाख रुपये की पुरस्कार राशि, वाग्देवी की एक प्रतिमा और एक प्रशस्ति पत्र दिया जाता है. पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं का निर्णय ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता प्रतिभा राय की अध्यक्षता में एक चयन समिति द्वारा किया गया. चयन समिति के अन्य सदस्यों में माधव कौशिक, दामोदर मावजो, प्रोफेसर सुरंजन दास, प्रोफेसर पुरुषोत्तम बिलमाले, प्रफुल्ल शिलेदार, प्रोफेसर हरीश त्रिवेदी, प्रभा वर्मा, डॉ जानकी प्रसाद शर्मा, ए. कृष्ण राव और ज्ञानपीठ के अध्यक्ष मधुसूदन आनंद शामिल हैं. वर्ष 2022 के लिए यह प्रतिष्ठित पुरस्कार गोवा के लेखक दामोदर मावजो को दिया गया था. (भाषा इनपुट)

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Ashish Lata

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By Ashish Lata

आशीष लता डिजिटल मीडिया की अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभात खबर में सीनियर कंटेंट राइटर के साथ एंटरटेनमेंट हेड के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया इंडस्ट्री में करीब 7 साल का अनुभव रखने वाली आशीष ने एंटरटेनमेंट से लेकर देश-दुनिया और विभिन्न राज्यों की खबरों पर गहराई से काम किया है. बिहार, मध्यप्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों से जुड़ी खबरों के कंटेंट प्रोडक्शन में भी उनकी मजबूत पकड़ रही है. वह खबरों को आसान, रोचक और पाठकों की रुचि के अनुसार पेश करने के लिए जानी जाती हैं. एंटरटेनमेंट जर्नलिज्म में आशीष की खास दिलचस्पी सिनेमा और सितारों की दुनिया से जुड़ी खबरों में रही है. वह बॉलीवुड और टीवी इंडस्ट्री की थ्रोबैक स्टोरीज, BTS अपडेट्स, सेलेब्रिटी गॉसिप, बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट, टीवी शोज, वेब सीरीज और स्टार इंटरव्यू जैसे विषयों पर लगातार लिखती रही हैं. इसके अलावा स्पेशल और प्रीमियम न्यूज कंटेंट तैयार करने में भी उनकी खास विशेषज्ञता मानी जाती है. उनकी राइटिंग स्टाइल में फैक्ट्स, एंटरटेनमेंट वैल्यू और रीडर्स फर्स्ट अप्रोच का अच्छा संतुलन देखने को मिलता है. आशीष लता ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्लस न्यूज से की थी. यहां उन्होंने बिहार में एंकर और रिपोर्टर के रूप में काम करते हुए कई महत्वपूर्ण ग्राउंड रिपोर्ट्स कीं. इस दौरान उन्होंने अशोक चौधरी और नगर निगम अध्यक्ष जैसे कई प्रमुख नेताओं के इंटरव्यू भी किए. शुरुआती दौर में रिपोर्टिंग और फील्ड जर्नलिज्म के अनुभव ने उनकी लेखन शैली और न्यूज प्रेजेंटेशन को और मजबूत बनाया. इसके बाद आशीष ने एबीपी न्यूज और ईटीवी भारत जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इन संस्थानों में रहते हुए उन्होंने न्यूज कवरेज, डिजिटल कंटेंट और एंटरटेनमेंट रिपोर्टिंग के कई अलग-अलग फॉर्मेट्स पर काम किया. लगातार बदलते डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स को समझते हुए उन्होंने अपने कंटेंट को हमेशा ऑडियंस फ्रेंडली और SEO ऑप्टिमाइज्ड बनाए रखा. पटना में जन्मी आशीष लता की शुरुआती पढ़ाई पटना सेंट्रल स्कूल, सीबीएसी से हुई. इसके बाद उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन की डिग्री हासिल की. आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास्टर्स ऑफ इलेक्ट्रॉनिक मीडिया किया. उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि और मीडिया अनुभव उन्हें हिंदी पत्रकारिता के उन मूल सिद्धांतों की मजबूत समझ प्रदान करते हैं, जो जर्नलिज्म के बेसिक प्रिंसिपल 5Ws+1H यानी पर आधारित न्यूज राइटिंग के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं.

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