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ऑस्कर 2024 की होड़ में झारखंड में 13 साल की बच्ची से गैंग रेप पर बनी डॉक्युमेंट्री ‘टू किल ए टाइगर’

Updated at : 22 Dec 2023 10:09 PM (IST)
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ऑस्कर 2024 की होड़ में झारखंड में 13 साल की बच्ची से गैंग रेप पर बनी डॉक्युमेंट्री ‘टू किल ए टाइगर’

झारखंड की राजधानी रांची के बेड़ो में हुई सच्ची घटना पर आधारित इस फिल्म में फिल्ममेकर ने बताया है कि भारत मेंहर 20 मिनट में एक महिला बलात्कार की शिकार होती है. बहुत से मामले दर्ज ही नहीं होते. लेकिन, रंजीत ने अपनी बेटी के लिए संघर्ष किया और अदालत में यह मामला 14 महीने तक चला.

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झारखंड में 13 साल की बच्ची से गैंगरेप की पृष्ठभूमि पर बनी डॉक्युमेंट्री ‘टू किल ए टाइगर’ ऑस्कर की होड़ में शामिल है. टोरंटो की रहने वाली फिल्ममेकर निशा पाहुजा की इस डक्युमेंट्री को ऑस्कर 2024 के लिए डॉक्युमेंट्री फीचर फिल्म कैटेगरी में शॉर्टलिस्ट किया गया है. भारतीय मूल की कनाडाई नागरिक निशा पाहुजा की फिल्म में देव पटेल, मिंडली केलिंग और रूपी कौर की अहम भूमिका रही है. देव पटेल ब्रिटेन में रहने वाले भारतीय एक्टर हैं, तो मिंडली केलिंग भारतीय अमेरिकी ऐक्ट्रेस हैं. वहीं, रूपी कौर भारतीय मूल की कनाडाई नागरिक और कवि हैं. निशा पाहुजा ने झारखंड में एक 13 साल की बच्ची से हुए सामूहिक दुष्कर्म के बाद उसको न्याय दिलाने के लिए उसके परिवार के संघर्ष की कहानी है. निशा पाहुजा ने बड़ी ही खूबसूरती से गांव की एक बेटी और उसके माता-पिता के दर्द और संघर्ष को सिल्वर स्क्रीन पर उतारने की कोशिश की है. इसमें बताया है कि 13 साल की एक मासूम बच्ची से सामूहिक दुष्कर्म होता है. उसके माता-पिता अपनी बेटी को न्याय दिलाना चाहते हैं, लेकिन गांव के लोग उसे रोकते हैं. बड़े-बुजुर्ग यह कहकर मामले को दबाने की कोशिश करते हैं कि जिन लोगों ने उसके साथ गलत किया है, उसके लिए उनकी बेटी ने ही उकसाया होगा. लेकिन, बच्ची के माता-पिता अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए अड़ जाते हैं. इसके बाद शुरू होता है उनका संघर्ष. फिल्ममेकर निशा कहती है कि इस फिल्म को बनाना बहुत कष्टकर था. लेकिन, रंजीत और उसकी पत्नी एवं बेटी ने जिस बहादुरी का परिचय दिया, उसने हम सबकी हिम्मत बढ़ाई. बहुत कम ऐसा परिवार होता है, जो ऐसी घटना के बाद शर्मिंदगी की चादर ओढ़कर बैठ जाने की बजाय दोषियों को सजा दिलाने के लिए पूरे दम-खम के साथ लड़ने का साहस जुटा पाता है.

बेड़ो की सच्ची घटना पर आधारित है फिल्म ‘टू किल ए टाइगर’

झारखंड की राजधानी रांची के बेड़ो में हुई सच्ची घटना पर आधारित इस फिल्म में फिल्ममेकर ने बताया है कि भारत मेंहर 20 मिनट में एक महिला बलात्कार की शिकार होती है. बहुत से मामले दर्ज ही नहीं होते. लेकिन, रंजीत ने अपनी बेटी के लिए संघर्ष किया और अदालत में यह मामला 14 महीने तक चला. भारतीय मूल की कनाडाई नागरिक निशा पाहुजा और उनकी टीम ने इस केस पर लगातार नजर बनाए रखी. इनलोगों को कोर्ट रूम में कभी नहीं जाने दिया गया. हालांकि, इन्हें कई वकीलों के साथ बातचीत करने का मौका मिला, जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए.

ऑस्कर की किसी श्रेणी में नामित नहीं हुई भारत की फिल्म

भारत की कोई भी फिल्म इस बार ऑस्कर की किसी श्रेणी में नामित नहीं हो पाई है. लेकिन, झारखंड की घटना पर आधारित इस डॉक्युमेंट्री को बेस्ट डॉक्युमेंट्री की श्रेणी में नामित किया गया है. हर साल ऑस्कर पुरस्कार की घोषणा करने वाली संस्था एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज ने शुक्रवार (22 दिसंबर) को ऑस्कर 2024 की होड़ में शामिल फिल्मों की सूची जारी की. इस लिस्ट में 10 श्रेणियों में फिल्मों को नामित किया गया है. इसमें बेस्ट ऑरिजिनल सांग, डॉक्युमेंट्री फीचर, इंटरनेशनल फीचर, ओरिजिनल स्कोर और विजुअल इफेक्ट्स एंड साउंड शामिल हैं.

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असाधारण परिस्थितियों में घिरे साधारण व्यक्ति की कहानी

ऑफिशियल सिनॉप्सिस कहता है कि ‘टू किल ए टाइगर’ एक सामान्य व्यक्ति की भावनाओं को दर्शाता है, जो असाधारण परिस्थितियों में घिर गया है. अपनी बेटी के प्रति एक पिता का प्रेम उसे अपने समाज से बगावत करने के लिए मजबूर कर देता है. यह जानते हुए कि लंबे अरसे तक उसे इसकी कीमत चुकानी होगी. एकेडमी की ओर से डॉक्युमेंट्री के शॉर्टलिस्ट किए जाने की घोषणा के बाद फिल्ममेकर निशा पाहुजा ने इंस्टाग्राम पर अपनी भावनाओं को इन शब्दों में बयां किया, ‘अविश्वसनीय! खुद को चिकोटी काट रही हूं.’

‘टू किल ए टाइगर’ की कई डॉक्युमेंट्री से प्रतिस्पर्द्धा

सर्वश्रेष्ठ डॉक्युमेंट्री की श्रेणी में नामित ‘टू किल ए टाइगर’ की कई अन्य डॉक्युमेंट्री से कड़ी प्रतिस्पर्धा है. इसमें ‘20 डेज इन मारियूपोल’, ‘अमेरिकन सिंफनी’, ‘स्टिल : ए माइकल जे फॉक्स मूवी’, ‘गोइंग टू मार्स : द निक्की गियोवानी प्रोजेक्ट’, ‘द इटर्नल मेमोरी’, ‘ए स्टिल स्मॉल वॉयस’ और ‘फोर डॉटर्स’ शामिल हैं. दूसरी तरफ, कुछ लोगों ने अश्वेत ट्रांस सेक्स वर्कर्स के जीवन पर आधारित ‘कोकोमो सिटी’ और एक अन्य फिल्म ‘लिटिल रिचर्ड : आई एम एवरीथिंग’ को इस लिस्ट से बाहर किए जाने पर चिंता व्यक्त की है. बता दें कि 96वें ऑस्कर के लिए सभी श्रेणियों के लिए नामित फिल्मों की अंतिम सूची 23 जनवरी 2024 को जारी होगी. ऑस्कर पुरस्कारों की घोषणा 10 मार्च को होगी.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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