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Quarantine के दौरान परिवार के महत्व को समझातीं हैं ये फिल्में

Updated at : 25 Mar 2020 4:43 PM (IST)
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Quarantine के दौरान परिवार के महत्व को समझातीं हैं ये फिल्में

कोरोना वायरस दुनियाभर में काफी दहशत फैला रहा है. इस बीमारी ने भारत में यह बीमारी अभी भयावह रुप नहीं लिया है. पीएम मोदी ने मामले की गंभीरता को लेकर देशभर में लॉकडाउन का एलान कर दिया है.

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कोरोना वायरस दुनियाभर में काफी दहशत फैला रहा है. इस बीमारी ने भारत में यह बीमारी अभी भयावह रुप नहीं लिया है. पीएम मोदी ने मामले की गंभीरता को लेकर देशभर में लॉकडाउन का एलान कर दिया है. इस दौरान 21 दिनों तक सभी भारतीय को घर के अंदर ही रहना है. लोगों को घर में रहने यानी क्वारंटाइन की सलाह दी जा रही है. कई राज्यों में कर्फ्यू भी लगा दिया गया है.

कई लोग क्वारंटाइन के मजे ले रहे हैं. कोई अपने बच्चों के साथ खेल रहा है कोई पत्नी और मां के साथ किचन में हाथ बंटा रहा है. क्वारंटाइन में लोग घर बैठे फिल्में भी देख रहे हैं, खास कर पारिवारिक फिल्मों का मजा इस क्वारंटाइन के वक्त भारत के कई परिवार ले रहे हैं. वैसे भी बॉलीवुड में कई पारिवारिक फिल्में बनती आईं हैं जो समाज का मनोरंजन करने के साथ साथ उन्हें एक आइना भी दिखातीं हैं.

आइए हम बात करते हैं कुछ ऐसे पारिवारिक बॉलीवुड फिल्मों की जिनका मजा आप क्वारंटाइन के दौरान ले सकते हैं.

पारिवारिक फिल्मों के बारे में जब भी बात होती है तो सबसे पहले सूरज बाड्जात्या की राजश्री प्रोडक्शन्स का नाम हमारे जहन में आता है. 70-80 के दशक में सूरज के दादाजी ताराचंद बाड्जात्या ने कई पारिवारिक फिल्मों का निर्माण किया था, जैसे गीत गाता चल, आंखियों के झरोंखों से, सावन को आने दो जैसी सफल फिल्मों का निर्माण किया था. उन्हीं के नक्शे कदम पर चलकर सूरज ने 90 के दशक से मैंने प्यार किया, हम आपके है कौन, हम साथ साथ हैं जैसी फिल्में बनाई और आगे चलकर विवाह और प्रेम रतन धन पायो जैसी फिल्में बनाईं. अगर आपने व्यस्तता के कारण ये सारी फिल्में नहीं देखी है तो इन फिल्मों का आनंद आप क्वारंटाइन के दौरान इसका मजा ले सकते हैं.

इसके अलावा निर्माता-निर्देशक करण जौहर ने अपनी फिल्म निर्माण कंपनी धर्मा प्रोडक्शन्स के बैनर तले 1988 में कुछ कुछ होता है का निर्माण किया और इसके बाद 2001 में कभी खुशी कभी गम, 2003 में कल हो ना हो जैसी फिल्में बनाईं हैं. इनके बैनर तले बनीं फिल्मों में माय नेम इज खान, हंपटी शर्मा की दुल्हनिया, कपूर एण्ड सन्स और बद्रीनाथ की दुल्हनिया जैसी फिल्में भी धर्मा प्रोडक्शन्स के बैनर तले ही बनीं हैं. इन सब फिल्मों को भी आप क्वारंटाइन के दौरान देख सकते हैं.

बॉलीवुड में यशराज प्रोडक्शन्स भी पारिवारिक फिल्में बनाने के लिए मशहूर हैं. निर्माता- निर्देशक यश चोपड़ा की कंपनी यशराज प्रोडक्शन्स की फिल्मों में रोमांस का तड़का भी देखने को मिलता है. चंदिनी, लम्हें, दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे, मोहब्बतें जैसी फिल्मों में पारिवारिक फिल्मों में रोमांस के साथ साथ पारिवारिक ताना बाना बुना हुआ है. क्वारंटाइन में ऑइन फिल्मों का मजा भी लिया जा सकता है.

अक्षय कुमार की एक रिश्ता, वक्त सलमान खान की बीवी नंबर वन, बजरंगी भाईजान, शाहरुख खान की चेन्नई एक्सप्रेस, के अलावा दीपिका पादुकोण की पीकू, सैफ अली खान की तारा रम पम, आयुष्मान खुराना की बधाई हो , सुशांत सिंह राजपूत की छिछोरे ऐसी कई फिल्में हैं जो आप क्वारंटाइन के दौरान अपने घर-परिवार के साथ देख सकते हैं.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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