फिल्म रिव्यू ''बेफिक्रे'': खूबसूरत लोकेशन, दमदार अभिनय, लेकिन कहानी कमजोर...
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 09 Dec 2016 4:14 PM
II उर्मिला कोरी II फिल्म: बेफिक्रे निर्माता: यशराज फिल्म्स निर्देशक: आदित्य चोपड़ा कलाकार: रणवीर सिंह ,वाणी कपूर और अन्य रेटिंग: दो ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे’, ‘मोहब्बतें’ और ‘रब ने बना दी जोड़ी’ में प्यार को रुपहले परदे पर अलग-अलग ढंग से परिभाषित करने वाले निर्माता निर्देशक आदित्य चोपड़ा ‘बेफिक्रे’ में प्यार को बंजी जंपी बताते […]
II उर्मिला कोरी II
फिल्म: बेफिक्रे
निर्माता: यशराज फिल्म्स
निर्देशक: आदित्य चोपड़ा
कलाकार: रणवीर सिंह ,वाणी कपूर और अन्य
रेटिंग: दो
‘दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे’, ‘मोहब्बतें’ और ‘रब ने बना दी जोड़ी’ में प्यार को रुपहले परदे पर अलग-अलग ढंग से परिभाषित करने वाले निर्माता निर्देशक आदित्य चोपड़ा ‘बेफिक्रे’ में प्यार को बंजी जंपी बताते हैं. प्यार में बेफिक्री के इस अंदाज़ की कहानी पेरिस से शुरू होती है. दिल्ली का एक लड़का धरम (रणवीर सिंह) रोमांच और काम की तलाश में काम करने के लिए पेरिस आता है. यहाँ उसकी मुलाकात बिंदास शायरा (वाणी कपूर) से होती है. कुछ ही मुलाकातों में वह लिव इन में रहने लगते हैं लेकिन दोनों में तय होता है कि दोनों एक दूसरे के प्यार में नहीं पड़ेंगे क्योंकि प्यार में आदमी इमोशनल हो जाता है और मज़ा ख़राब हो जाता है.
सबकुछ तय नियम के अनुसार ही होता है लेकिन है तो ये बॉलीवुड फिल्म. फिर वही होता है जो सौ से अधिक फिल्मों में होता है. फिल्म की कहानी की बात करें तो यह फिल्म देखते हुए आप कई बार बॉलीवुड की दूसरी रोमांटिक फिल्मों से प्रेरित पाते हैं. फिल्म का फर्स्ट हाफ हल्का फुल्का और एंगेजिंग सा ज़रूर है. फिल्म के फर्स्ट हाफ में कहानी का अतीत और फिर वर्तमान में आना इम्तियाज़ अली की फिल्मों की याद दिला रहा था तो कई बार यह फिल्म आपको ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे’ का मॉडर्न वर्जन लगती है.
फिल्म में ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे’ के संवाद का भी कई जगहों पर इस्तेमाल हुआ है. फिल्म सेकंड हाफ से कमज़ोर हो जाती है. कहानी में कुछ भी नहीं रह जाता है और फिल्म को जबरदस्ती खिंचा गया है ऐसा ही कुछ ज़बरदस्ती का क्लाइमेक्स भी ढूंसा गया है. कुलमिलाकर फिल्म की कहानी में कुछ भी नया नहीं है. बेफिक्रे की कहानी में प्यार में बेफिक्री का जश्न मनाया गया है. अपनी इसी प्रस्तुति की वजह से यह फिल्म सिर्फ यूथ ऑडियंस तक ही सीमित रह जाती हैं.
फिल्म का संगीत कहानी के मूड के अनुसार है जो बखूबी बेफिक्री का जश्न मनाता है. हाँ आदित्य की अब तक निर्देशित फिल्मों के मुकाबले कहानी के साथ साथ इस फिल्म का संगीत भी कमज़ोर रह गया है. फिल्म की सिनेमेटोग्राफी बहुत अच्छी है. पेरिस की खूबसूरती का फिल्म की कहानी में अच्छे से इस्तेमाल हुआ है. कई बार आपको यह भी लगने लगता है कि फिल्म ने पेरिस के टूरिज्म पर कहानी से ज़्यादा फोकस किया है अभिनय की बात करें तो यह रणवीर सिंह की फिल्म है. अपने चेहरे के हाव भाव से वह धरम के किरदार के बचपने मस्ती और प्यार को बखूबी परदे पर लाते हैं.
फर्स्ट हाफ में फिल्म एंगेज करती है तो इसकी सबसे बड़ी वजह रणवीर सिंह का अभिनय ही है. फिल्म में उन्होंने जमकर अंग प्रदर्शन भी किया है. वाणी कपूर अभिनय से लेकर लुक दोनों में औसत रही हैं. फिल्म में उनका लुक उनकी प्लास्टिक सर्जरी की वजह से बहुत अजीब सा लगता है हाँ उनके डांस ज़रूर मूव्स इम्प्रेस कर जाते हैं. कुलमिलाकर बेफिक्रे निराश ही करती है.
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