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FILM REVIEW: एक्‍शन का फुल डोज़ है ''फोर्स 2'' (3.5 स्‍टार)

Updated at : 18 Nov 2016 1:42 PM (IST)
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FILM REVIEW: एक्‍शन का फुल डोज़ है ''फोर्स 2'' (3.5 स्‍टार)

II उर्मिला कोरी II फिल्म: फोर्स 2निर्माता: विपुल शाह और जॉन अब्राहम निर्देशक:अभिनय देवकलाकार: जॉन अब्राहम, सोनाक्षी सिन्हा , ताहिर भसीन, नरेंद्र झा ,आदिल हुसैन और अन्य रेटिंग: 3.5 चार साल पहले रिलीज़ हुई फिल्म ‘फोर्स’ साउथ फिल्म की हिंदी रीमेक थी लेकिन इस बार की कहानी ओरिजिनल है. ‘फोर्स’ का ‘फोर्स 2’ से ज़्यादा […]

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II उर्मिला कोरी II

फिल्म: फोर्स 2
निर्माता: विपुल शाह और जॉन अब्राहम
निर्देशक:अभिनय देव
कलाकार: जॉन अब्राहम, सोनाक्षी सिन्हा , ताहिर भसीन, नरेंद्र झा ,आदिल हुसैन और अन्य
रेटिंग: 3.5

चार साल पहले रिलीज़ हुई फिल्म ‘फोर्स’ साउथ फिल्म की हिंदी रीमेक थी लेकिन इस बार की कहानी ओरिजिनल है. ‘फोर्स’ का ‘फोर्स 2’ से ज़्यादा कोई कनेक्शन नहीं है सिवाय जॉन यानी एसीपी यशवर्धन का. जॉन फिल्म के पहले ही सीन में यह बता जाते हैं कि उनकी पत्नी के मर जाने के बाद उनकी पूरी तरह सटक गयी है बस यही पुरानी फिल्म से उनका कनेक्शन है.

इस एक्शन थ्रिलर फिल्‍म की कहानी की शुरुआत में दिखाया जाता है कि कैसे चीन में एक-एक कर रॉ एजेंट मारे जाते हैं और उनमें से एक जॉन के बचपन का दोस्त भी है. अपने दोस्त की मौत का बदला लेने के लिए जॉन अब्राहम जो एक पुलिस अफसर है, रॉ एजेंट सोनाक्षी सिन्हा के साथ बुडापेस्ट जाते हैं. इन सब साज़िशों के पीछे के छुपे चेहरे को सबके सामने लाते हैं. फिल्म का फर्स्ट हाफ अच्छे से बुना गया है.

सस्पेंस को बहुत अच्छे से बरकरार रखा गया है. सेकंड हॉफ में कहानी मैलोड्रामैटिक होती नज़र आती है. फिल्म मुख्य प्लाट रॉ ऑफिसर्स के ऊपर हैं. जो देश के लिए अपनी जान हथेली पर लेकर काम करते हैं लेकिन सरकार उन्हें अपना नहीं मानती हैं. उनकी ज़िन्दगी ही नहीं मौत भी गुमनामी के अंधेरो में होती है. फिल्म का विषय अच्छा है हाँ उसका ट्रीटमेंट कई हॉलीवुड फिल्मों की याद दिलाता है.

फिल्म की कहानी में यह बात समझ नहीं आती कि जब के के यानि सोनाक्षी का किरदार एक आतंकवादी को मारने में असफल रहा था तो ऐसे में उनके किरदार को इतने अहम् मिशन पर क्यों भेजा जाता है. कहानी में खामियां हैं लेकिन फिल्म एंगेजिंग है. एक अरसे बाद बॉलीवुड फिल्म की कहानी में चीन को जोड़ा गया है. संवाद में ही सही चीन की अरुणाचल में बढ़ती घुसपैठ पर भी निशाना साधा गया है.

फिल्म की कहानी की रफ़्तार को बढ़ाये रखने के लिए फिल्म में गानों को नहीं रखा गया है सिर्फ एक गान फिल्म के दौरान है. फिल्म के संवाद कहानी के अनुरूप है. अभिनय की बात करें तो जॉन अपने चित परिचित अंदाज़ में हैं. वह जमकर एक्शन और मसल पावर दिखाते उनके प्रशंसकों को उनका यह अंदाज़ ज़रूर पसंद आएगा.

विलेन ताहिर भसीन की ‘मर्दानी’ के बाद य‍ह दूसरी फिल्म है. वह इस बार भी अच्छा अभिनय कर रहे हैं लेकिन दिक्कत यह है कि उनके अभिनय को देखकर ऐसा लगता है कि वह अपनी पहली फिल्म मर्दानी के ही किरदार में ही हैं , बहुत हद तक उनका किरदार वैसा ही है और उन्होंने उसे जिया भी उसी अंदाज़ में ही है. वैसे ही फ़ोन पर बात करते हुए धमकी देना.

सोनाक्षी सिन्हा रॉ एजेंट की भूमिका में औसत रहीं हैं. वह एक्शन दृश्यों में भी छाप छोड़ने में नाकामयाब रही हैं जबकि ‘अकीरा’ के एक्शन दृश्यों में वह सहज लगी थी. आदिल और नरेंद्र झा सहित बाकी के किरदारों का काम अच्छा रहा है. फिल्म का लोकेशन बुडापेस्ट भी एक किरदार के तौर पर फिल्म में अपनी उपस्थिति दर्शाता है.

फिल्म के एक्शन दृश्यों को आकर्षक बनाने में इस जगह का अपना योगदान है. फिल्म के दूसरे पहलु भी इस फिल्म को मसाला और एंटरटेनिंग फिल्म बना जाते हैं. कुलमिलाकर ‘फोर्स 2’ एंगेजिंग फिल्म है.

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