FILM REVIEW: बाप-बेटी की इमोशनल कहानी है अजय देवगन की ''शिवाय''
II उर्मिला कोरी II फिल्म: शिवाय निर्माता और निर्देशक: अजय देवगन कलाकर: अजय देवगन, साएशा सहगल, एरिका कार, गिरीश कर्नाड रेटिंग: ढाई ‘यू मी और हम’ के लगभग एक दशक बाद अजय देवगन एक्टर ही नहीं निर्देशन की जिम्मेदारी भी फिल्म ‘शिवाय’ से संभाली है. पिछली फिल्म की तरह ये भी एक इमोशनल स्टोरी ही […]
II उर्मिला कोरी II
फिल्म: शिवाय
निर्माता और निर्देशक: अजय देवगन
कलाकर: अजय देवगन, साएशा सहगल, एरिका कार, गिरीश कर्नाड
रेटिंग: ढाई
‘यू मी और हम’ के लगभग एक दशक बाद अजय देवगन एक्टर ही नहीं निर्देशन की जिम्मेदारी भी फिल्म ‘शिवाय’ से संभाली है. पिछली फिल्म की तरह ये भी एक इमोशनल स्टोरी ही है लेकिन इस कहानी में एक्शन भी एक अहम पहलू है. पिता और बेटी की कहानी है. जो भारत से होते हुए बुल्गारिया पहुंचती है. फिल्म की कहानी में बच्चों के खरीद फरोख्त और अंग प्रत्यारोपण के मुद्दे को भी छुआ है, फिल्म ‘शिवाय’ नाम को पूरी तरह से सही साबित करती है.
भगवान् शिव की तरह अजय पूरी फिल्म में बुल्गारिया माफिया और पुलिस दोनों के लिए अकेले काल बने हैं. फिल्म का एक्शन अच्छा है. अजय अपनी एक्शन भूमिकाओं के लिए जाने जाते हैं काफी समय बाद वह जमकर एक्शन सींस करते नजर आ रहे हैं. उनके फैंस को उनको इस अवतार में देखना पसंद करेंगे. पहाडों का फिल्म के एक्शन में अच्छे से इस्तेमाल हुआ है लेकिन एक्शन दृश्य लंबे बन पडे है इसके साथ ही एक्शन दृश्यों में जिस तरह से गाडियों का इस्तेमाल किया गया है. वह कई बार आपको रोहित शेट्टी की फिल्मों की याद करा जाता है.
फिल्म का वीएफएक्स अच्छा बन पड़ा है. हिमश्रृखंला वाले दृश्य हो या एक्शन सीन्स उनको अच्छे से पिरोया गया है. जिससे विश्वसनीयता बढती है. फिल्म की कहानी कमजोर है. जिसके पिरोने में एंटरटेंमेंट फिल्मों के चितपरिचित मसालों का इस्तेमाल हुआ है जो फिल्म में मंजोरंजन के स्वाद को बनाने के बजाय बिगाड जाते है. फिल्म की सबसे कमज़ोर कड़ियो में से एक फिल्म के संवाद भी है. फिल्म के आखिर में साएशा सहगल का संवाद का बोला गया वाक्य मुङो समझ नहीं आ रहा है.
मैं ऐसा क्यों कह रही हूं. वाकई फिल्म के वह संवाद ही नहीं बल्कि कई संवाद को सुनकर लगता है कि ऐसा क्यों बोला जा रहा है. ऐसा ही गिरीश कर्नाड का संवाद तुम सही रास्ते पर जा रही हो सुनकर हंसी आती है. संवाद कई बार कहानी के प्रभाव को और कम कर जाते हैं. फिल्म का गीत संगीत औसत है. जो आपको याद नहीं रह पाता है. अभिनय की बात करें तो यह फिल्म अजय की है ऑफ कैमरा ऑन कैमरा सब जगह अजय हैं.
हर फ्रेम में अजय है यह कहना गलत न होगा जिससे दूसरे कलाकारों को कम ही मौके मिले है लेकिन यह अजय की मौजूदगी ही है जो फिल्म से आपको बांधे रखती है. इस फिल्म से पोलिश अभिनेत्री एरिका कार और साएशा सहगल ने अपने कैरियर की शुरु वात की है. दोनों अपनी अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय किया है. गिरीश कर्नाड के लिए करने को कुछ खास नहीं था. वीर दास अपनी छोटी सी भूमिका में जंचे हैं. फिल्म के लोकेशन्स बहुत खूबसूरत हैं. कुलमिलाकर अजय की यह फिल्म एक औसत मसाला फिल्म है. जो उनके फैंस को लुभा सकती है.
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