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FILM REVIEW: फीकी है सलमान के बैनर की ‘फ्रीकी अली''

Updated at : 09 Sep 2016 4:59 PM (IST)
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FILM REVIEW: फीकी है सलमान के बैनर की ‘फ्रीकी अली''

II उर्मिला कोरी II फिल्म: फ्रीकी अली निर्माता: सोहेल खान निर्देशक: सोहेल खान कलाकार: नवाज़ुद्दीन सिद्धकी, एमी जैक्सन, जस अरोरा, अरबाज़ खान, सीमा विश्वास रेटिंग: दो हिंदी फिल्मों में इनदिनों खेल और खिलाडियों की फिल्म की कहानी में भागीदारी बढ़ती जा रही है. सलमान खान प्रोडक्शन की फिल्म फ्रीकी अली भी इसी की कड़ी है. […]

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II उर्मिला कोरी II

फिल्म: फ्रीकी अली

निर्माता: सोहेल खान

निर्देशक: सोहेल खान

कलाकार: नवाज़ुद्दीन सिद्धकी, एमी जैक्सन, जस अरोरा, अरबाज़ खान, सीमा विश्वास

रेटिंग: दो

हिंदी फिल्मों में इनदिनों खेल और खिलाडियों की फिल्म की कहानी में भागीदारी बढ़ती जा रही है. सलमान खान प्रोडक्शन की फिल्म फ्रीकी अली भी इसी की कड़ी है. खास बात यह है कि भारत देश जहाँ खेल का मतलब क्रिकेट है वहां यह मसाला फिल्म गोल्फ खेल की बात करता है.

सोहेल खान की फिल्म फ्रीकी अली में नवाजुद्दीन सिद्दीकी एक अंडरवीयर बेचने वाले अली के किरदार में हैं, जो हालात के कारण वसूली भाई बन जाता है और बाद में परिस्थितियां कुछ ऐसी बन जाती हैं कि वह एक गोल्फ प्लेयर के तौर पर बनकर उभरता है. गोल्फ खेलना और गोल्फ टूर्नामेंट में हिस्सा लेना बस्ती में रहने वाले अली के लिए आसन नहीं होता.

वो भी तब जब गोल्फ अमीरों का खेल माना जाता है. यहाँ कहानी में एक अमीर राजपूत विलन भी है जो गोल्फ का चैंपियन है. ऐसे में अली किस तरह चैंपियन बन पाता है. यही आगे की कहानी है. फिल्म पहले भाग में उम्मीद जगाती है. फिल्म की कमजोर कड़ी इसकी सेकंड हाफ की लिखावट है, फिल्म को थोड़ा लीक से हटकर और बेहतर ढंग से लिखा जाता तो देखने वाले को भी काफी मजा आता.

सेकंड हाफ में कहानी के नाम पर जो भी दिखाया गया है उस पर विश्वास करना मुश्किल हो जाता है. अगर गोल्फ स्पोर्ट और कॉमेडी पर सोहैल का फोकस होता बेहतर होता था वह फिल्म को सेकंड हाफ में ज़्यादा मैलोड्रामैटिक बना गए हैं. माँ से लेकर गणपति बप्पा और भक्ति की शक्ति का ओवर डोज फिल्म की कहानी में हावी हो गया है.

अभिनय की बात करें तो नवाज़ जिस फिल्म से जुड़ते हैं उस फिल्म से लोगों की उम्मीद बढ़ जाती है. एक बार इस फिल्म से भी वह उम्मीदों पर खरे उतरते हैं. फिल्म शुरू होती है नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी का चड्डी बेचने वाला अंदाज़ लोटपोट कर जाता है. वह अपने अभिनय से हर सीन में अपनी छाप छोड़ते हैं. अरबाज़ अपनी भूमिका में जमें हैं. एमी जैक्सन को फिल्म में करने को कुछ ख़ास नहीं था.

नवाज़ के अभिनय के अलावा फिल्म के संवाद हैं जो इस फिल्म को एंगेजिंग बनाते हैं ये फिल्म की बोझिलता को कम करते हैं. फिल्म के पंचलाइन भी गुदगुदाते हैं. फिल्म के गीत संगीत की बात करे तो यह कहानी के अनुरूप ही हैं. फिल्म के दूसरे पक्ष औसत है. कुलमिलाकर फिल्म के संवाद और नवाज़ का शानदार अभिनय भी फ्रीकी अली को फीकी फिल्म बनने से नहीं रोक पाएं हैं.

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