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चिंकारा मामले पर कोर्ट ने कहा,‘ गोलियां सलमान खान की लाइसेंसी बंदूक से नहीं चलाई गई थीं''

Updated at : 25 Jul 2016 12:34 PM (IST)
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चिंकारा मामले पर कोर्ट ने कहा,‘ गोलियां सलमान खान की लाइसेंसी बंदूक से नहीं चलाई गई थीं''

जोधपुर : राजस्थान उच्च न्यायालय ने बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान को वर्ष 1998 में जोधपुर में चिंकारा के शिकार संबंधी दो मामलों में आज बरी कर दिया. अदालत ने कहा कि चिंकारा से मिली गोलियां सलमान की लाइसेंसी बंदूक से नहीं चलाई गई थीं. फैसले के दौरानउनकी बहन अलवीरा खानअदालत में ही मौजूद थी. सलमान […]

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जोधपुर : राजस्थान उच्च न्यायालय ने बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान को वर्ष 1998 में जोधपुर में चिंकारा के शिकार संबंधी दो मामलों में आज बरी कर दिया. अदालत ने कहा कि चिंकारा से मिली गोलियां सलमान की लाइसेंसी बंदूक से नहीं चलाई गई थीं. फैसले के दौरानउनकी बहन अलवीरा खानअदालत में ही मौजूद थी. सलमान को बरी किये जाने की खुशी उनके चेहरे पर साफ झलक रही थी.

दो मामलों में पाये गये थे दोषी

सलमान खान के खिलाफ 26-27 सितंबर, 1998 में भवाद गांव में दो चिंकारा और 28-29 सितंबर, 1998 में मथानिया (घोडा फार्म) में एक चिंकारा के शिकार के संबंध में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 51 के तहत मामले दर्ज किए गए थे. निचली अदालत (सीजेएम) ने उन्हें दोनों मामलों में दोषी ठहराते हुए 17 फरवरी 2006 को एक साल और 10 अप्रैल, 2006 को पांच साल के कारावास की सजा सुनाई थी.

सलमान के खिलाफ प्रत्यक्षदर्शी या कोई अन्य सबूत नहीं

बचाव पक्ष के वकील महेश बोरा ने उच्च न्यायालय में दलील पेश करते हुए कहा था कि सलमान को एक अहम गवाह हरीश दुलानी के बयानों पर ही इन मामलों में गलत फंसाया गया है. दुलानी उस वाहन का चालक था जिसका इस्तेमाल इन दोनों मामलों में शिकार में कथित रुप से किया गया था.

बोरा ने दलील दी कि दुलानी कभी भी उन्हें जिरह के लिए उपलब्ध नहीं हो पाया और इसलिए सलमान को दोषी ठहराने के लिए केवल उसके बयानों पर निर्भर नहीं रहा जा सकता. उन्होंने यह तर्क भी दिया कि दोनों मामले परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर बनाए गए और सलमान के खिलाफ कोई भी प्रत्यक्षदर्शी या कोई अन्य सबूत नहीं है.

नहीं चली सलमान की बंदूक से गोलियां

इसके अलावा अदालत ने पाया कि सलमान के पास से मिली बंदूक की गोलियां, उन गोलियों से मेल नहीं खातीं जो वाहन में से मिली थीं. बचाव पक्ष ने मजबूत दलील दी कि ये गोलियां बाद में रखी गई थीं क्योंकि वन विभाग की जांच में वाहन में ये नहीं मिली थीं और बाद में पुलिस की जांच में आश्चर्यजनक रुप से मिली थीं.

इसी प्रकार बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि शिकार में कथित रुप से इस्तेमाल किए गए हथियार सलमान के पास नहीं थे और वे वन विभाग की मांग पर ही मुंबई से जोधपुर लाए गए थे. यह भी तर्क दिया गया कि पेश की गई गोलियां एयर गन की हैं जिसकी क्षमता किसी जीव को मारने की कतई नहीं है.

सलमान को कभी टेंशन में नहीं देखा

सलमान के वकील हस्तीमल ने कहा,’ सलमान के खिलाफ दो मामले दर्ज थे. कोर्ट ने दोनों ही मामलों को गलत पाया और उन्‍हें बरी कर दिया. उन्होंने कई केस लड़े हैं. मैंने लोगों को हमेशा टेंशन में देखा है लेकिन सलमान को कभी टेंशन में नहीं देखा. शायद सलमान इस बात को जानते थे कि उनके खिलाफ गलत मामला चल रहा है.’

हस्‍तीमल ने आगे कहा,’ हमने कोर्ट में साबित किया कि जिन सबूतों का उनके खिलाफ जिक्र किया जा रहा है वे सभी फर्जी हैं. जो चाकू जब्त किया गया था वह नया था और छोटा भी.’

ऐसा बताया गया था कि सलमान पहले मामले में चिंकारा का मृत शरीर होटल आशीर्वाद में लेकर आए थे. अभियोजन के वकील केएल ठाकुर ने दूसरे मामले में शिकार स्थल पर खून से सनी जमीन और होटल आशीर्वाद से मिले खून के धब्बों की एफएसएल रिपोर्ट का जिक्र करते हुए यह साबित करने की कोशिश की यह चिंकारा का खून था.

अभियोजन ने दूसरे मामले संबंधी वाहन के टायर के निशानों की एफएसएल रिपोर्ट भी पेश की और कहा कि छह में से चार नमूने यह साबित करते हैं कि यह वही वाहन था जो शिकार स्थल पर गया था.

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