अब ''असहिष्णुता'' को लेकर बोले अक्षय कुमार, जानें क्या कहा?

मुंबई-जयपुर : देश में कथित असहिष्णुता की बहस में शामिल होते हुए हिंदी फिल्मों के अभिनेता अक्षय कुमार ने आमिर खान के बयान से इत्तेफाक नहीं जताया और कहा कि हर देश में उतार-चढाव आते हैं और किसी को ऐसे बयान नहीं देने चाहिए.‘एयरलिफ्ट’ के अभिनेता ने कहा कि उन्हें भारतीय होने पर गर्व है. […]
मुंबई-जयपुर : देश में कथित असहिष्णुता की बहस में शामिल होते हुए हिंदी फिल्मों के अभिनेता अक्षय कुमार ने आमिर खान के बयान से इत्तेफाक नहीं जताया और कहा कि हर देश में उतार-चढाव आते हैं और किसी को ऐसे बयान नहीं देने चाहिए.‘एयरलिफ्ट’ के अभिनेता ने कहा कि उन्हें भारतीय होने पर गर्व है.
उन्होंने कहा, ‘हर देश में किसी ने किसी तरह के उतार चढाव आते रहते हैं और आपको ऐसे बयान देना शुरु नहीं करना चाहिए. इस तरह की चीजें होती हैं. कई अच्छी चीजें भी हैं जिनके बारे में हम नहीं बोलते.’ अक्षय ने कहा, ‘दुर्भाग्य से हमारी आदत केवल गलत चीजों की ओर इशारा करने की है लेकिन फिर भी सभी को बोलने का अधिकार है.’
अभिनेत्री काजोल ने भी इसी तरह के विचार रखते हुए कहा था कि बॉलीवुड में यह कोई मुद्दा नहीं है. उन्होंने हाल ही में कहा था, ‘हमारे समाज में जो हो रहा है, वह हमेशा हमारा उद्योग दर्शाता रहेगा. यह चलता रहेगा और सभी का स्वागत है. बॉलीवुड में कोई विभाजनकारी रेखा, कोई जाति, कोई मजहब नहीं है और कोई असहनशीलता नहीं है.’
आमिर, शाहरुख खान और करन जौहर जैसी फिल्मी हस्तियों द्वारा लोगों के बोलने की आजादी पर चिंता जताये जाने के बाद बॉलीवुड में असहिष्णुता की बहस शुरु हुई और दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं आने लगीं. जहां अनुपम खेर, अक्षय कुमार और मधुर भंडारकर जैसे लोगों ने आमिर, शाहरुख की बात से इत्तेफाक नहीं जताया.
जयपुर साहित्य उत्सव के एक सत्र में शामिल हुए अनुपम खेर ने कहा, ‘कितनी विडंबना की बात है कि अमीर, विद्वान लोग असहिष्णुता के मुद्दे को महसूस कर रहे हैं जो अंगरक्षकों के साथ घूमते हैं.’ उन्होंने इस विषय पर बहस के संदर्भ में कहा, ‘मुझे यह एक मजाक लगता है. लोगों का असहिष्णु भारत के बारे में बात करना मजाक है. उनमें से कुछ मेरे साथी हो सकते हैं. वे इस तरह से बयान दे सकते हैं, यह बात ही अपने आप में इसका प्रमाण है कि यह बोलने की आजादी है.’
जानेमाने अभिनेता और भाजपा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने भी कहा कि बॉलीवुड में कुछ लोगों का असहिष्णुता के बारे में बात करना नादानी है और वह उनके साथ इत्तेफाक नहीं रखते. सिन्हा ने जयपुर साहित्य उत्सव में कहा, ‘फिल्म उद्योग के कई लोगों ने जल्दबाजी में असहनशीलता के मुद्दों को उठाया और ऐसा करना नादानी है. मैं इस मामले में उनके साथ नहीं खड़ा.’ उन्होंने काजोल की बात से इत्तेफाक जताया कि बॉलीवुड में कोई विभाजन, कोई रेखा, कोई जाति, कोई धर्म नहीं है.
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