टैगोर और रे में शेक्सपीयर के गुण थे : विशाल भारद्वाज

मुंबई : विशाल भारद्वाज को विलियम शेक्सपीयर की कृतियों ‘‘मैकबेथ”, ‘‘ओथेलो” और ‘‘हेमलेट” को भारतीय परिदृश्य में पेश करने का श्रेय जाता है और फिल्म निर्माता का मानना है कि रबींद्रनाथ टैगोर के लेखन और सत्यजीत रे के सिनेमा ने महान कवि के काम को उसी रूप में पेश किया. ‘टाटा लिटरेचर लाइव! द मुंबई […]
मुंबई : विशाल भारद्वाज को विलियम शेक्सपीयर की कृतियों ‘‘मैकबेथ”, ‘‘ओथेलो” और ‘‘हेमलेट” को भारतीय परिदृश्य में पेश करने का श्रेय जाता है और फिल्म निर्माता का मानना है कि रबींद्रनाथ टैगोर के लेखन और सत्यजीत रे के सिनेमा ने महान कवि के काम को उसी रूप में पेश किया. ‘टाटा लिटरेचर लाइव! द मुंबई लिटफेस्ट’ में ‘मसाला शेक्सपीयर’ विषय पर चर्चा में भारद्वाज ने संवाद में हिस्सा लिया.
भारद्वाज ने शनिवार को कहा, ‘‘मैं मानता हूं कि टैगोर में शेक्सपीयर का हर गुण था चाहे वह संगीत हो, कविता हो या शेक्सपीयर ने जो लिखा उस तरह का लेखन हो. यहां तक कि कुछ हद तक रे में भी ये गुण थे. यह काफी अच्छा है कि इतने वर्षों में सिनेमा उभरा है.”
अपनी फिल्मों पर शेक्सपीयर के प्रभाव के बारे में बात करते हुए फिल्मनिर्माता ने कहा कि आज सिनेमा ‘‘राजनीतिक अशुद्धता के तत्व” को खो रहा है.
उन्होंने कहा, ‘मेरा मानना है कि शेक्सपीयर राजनीतिक रूप से गलत थे जहां उन्होंने अपने एक नाटक में यहूदियों का मजाक उड़ाया. हालांकि वह नहीं जानते थे कि यह भविष्य में राजनीतिक रूप से इतना गरमा जाएगा. हाल फिलहाल में हम सिनेमा में राजनीतिक अशुद्धता का तत्व खो रहे हैं.”
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