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Film Review: सच्‍ची कहानी को बयां करती ''इंडियाज मोस्ट वांटेड''

Updated at : 25 May 2019 10:20 AM (IST)
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Film Review: सच्‍ची कहानी को बयां करती ''इंडियाज मोस्ट वांटेड''

II उर्मिला कोरी II फ़िल्म : इंडियाज मोस्ट वांटेड निर्देशक : राजकुमार गुप्ता कलाकार : अर्जुन कपूर, राजेश शर्मा, प्रशांत, और अन्य रेटिंग : तीन ‘इंडियाज मोस्ट वांटेड’ अनसंग हीरोज की कहानी है लेकिन वो हीरोज नहीं जो अकेले दस आदमी से भीड़ ले, गोलियों की बारिश में जिसे एक खरोंच भी ना आए या […]

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II उर्मिला कोरी II

फ़िल्म : इंडियाज मोस्ट वांटेड

निर्देशक : राजकुमार गुप्ता

कलाकार : अर्जुन कपूर, राजेश शर्मा, प्रशांत, और अन्य

रेटिंग : तीन

‘इंडियाज मोस्ट वांटेड’ अनसंग हीरोज की कहानी है लेकिन वो हीरोज नहीं जो अकेले दस आदमी से भीड़ ले, गोलियों की बारिश में जिसे एक खरोंच भी ना आए या फिर भीड़ में सबसे अलग हो. ‘इंडियाज मोस्ट वांटेड’ के हीरोज ऐसे नहीं हैं वो आम आदमी की तरह दिखते और रहते हैं. उन्हें खास उन्हें देश के प्रति प्यार बनाता है. वे देश को खुद से ज़्यादा प्यार करते हैं. कहानी पर आए तो फ़िल्म सत्य घटनाओं से प्रेरित है. यह उन नौ लोगों की कहानी है जो बिना किसी हथियार और आर्थिक मदद के भारत के ओसामा बिन लादेन (यासीन भटकल)को पकड़ लाये थे.

कहानी पटना से होते हुए नेपाल जाती है. जब प्रभात( अर्जुन कपूर) को उसका खबरी नेपाल में एक आतंकवादी के होने की लीड देता है. प्रभात वहां और आठ लोगों के साथ पहुँच जाता है लेकिन इस मिशन के लिए दिल्ली से न पैसे मिले हैं ना परमिशन और ना ही हथियार.

ऐसे में कैसे ये नौ लोग उस खूंखार आतंकवादी को दूसरे देश में गिरफ्तार कर पाएंगे इसी पर फ़िल्म की आगे की कहानी है. फ़िल्म में इस ट्रैक के साथ-साथ भारत के अलग अलग शहरों में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों को भी जोड़ा गया है.

फ़िल्म में दिखाया गया है कि हमारे इंटेलीजेंस ऑफिसर किस तरह से विपरीत परिस्थिति में काम करते हैं. कई बार वे खुद अपना पैसा लगाकर मिशन पूरा करते हैं. यह बात चौंकाती है कि हमारे असल हीरोज सम्मान तो दूर की बात है सहयोग भी नहीं मिलता है.

नो वन किल्ड जेसिका ,आमिर और रेड जैसी फिल्में बना चुके निर्देशक राजकुमार गुप्ता ने अपनी इस फ़िल्म को भी रीयलिस्टिक रखा है जो इसे खास बना देता है.

फ़िल्म में बेवजह के नाच गाने और रोमांस का एंगल नहीं है जिससे कहानी भटकती नहीं है. हां कहानी थोड़ी खिंच ज़रूर गयी है. कई सीन्स लंबे बन गए है. कई सीन अधूरे से भी लगते हैं. जैसे नेपाल में चाय की दुकान पर वो लड़के क्यों अर्जुन का पीछा कर रहे हैं. फ़िल्म की एडिटिंग पर थोड़ा काम करने की ज़रूरत महसूस होती है.

फ़िल्म के नरेशन में इस बात का भी जिक्र भी किया गया है कि शाहरुख खान को अमेरिका में कड़ी पूछताछ से क्यों गुजरना पड़ा था क्योंकि आतंकवादी यासीन भटकल ने शाहरुख खान के नाम का भी इस्तेमाल किया था.

अभिनय की बात करें तो अर्जुन कपूर ने अपने किरदार पर बहुत मेहनत की है. वो किरदार के साथ न्याय करने में सफल रहे हैं. राजेश शर्मा की एक्टिंग भी हमेशा की तरह स्वभाविक रही है. फ़िल्म के बाकी कलाकारों का काम सराहनीय है. संगीत की बात करें तो फ़िल्म के बैकग्राउंड म्यूजिक कहानी के थ्रिलर के साथ बखूबी न्याय नहीं कर पाता है. फ़िल्म की सिनेमेटोग्राफी बेहतरीन है. भारत और नेपाल के लोकेशन्स को पर्दे पर बखूबी उकेरा गया है.

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