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रिव्‍यू : जानें कैसी है सिद्धार्थ मल्‍होत्रा और मनोज वाजपेयी की ''अय्यारी''

Updated at : 16 Feb 2018 3:26 PM (IST)
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रिव्‍यू : जानें कैसी है सिद्धार्थ मल्‍होत्रा और मनोज वाजपेयी की ''अय्यारी''

II उर्मिला कोरी II फ़िल्म: अय्यारी निर्देशक: नीरज पांडे कलाकार: मनोज बाजपेयी, सिद्धार्थ मल्होत्रा, रकुल प्रीत सिंह, पूजा, आदिल हुसैन, कुमुद मिश्रा और अन्य रेटिंग: दो ‘ए वेडनेसडे’, ‘बेबी’ और ‘स्पेशल 26’ जैसी फिल्में बनाने वाले फिल्मकार नीरज पांडे का नाम स्पाई थ्रिलर फिल्में बनाने में हिंदी सिनेमा में खास नाम बन चुका है. उसपर […]

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II उर्मिला कोरी II

फ़िल्म: अय्यारी

निर्देशक: नीरज पांडे

कलाकार: मनोज बाजपेयी, सिद्धार्थ मल्होत्रा, रकुल प्रीत सिंह, पूजा, आदिल हुसैन, कुमुद मिश्रा और अन्य

रेटिंग: दो

‘ए वेडनेसडे’, ‘बेबी’ और ‘स्पेशल 26’ जैसी फिल्में बनाने वाले फिल्मकार नीरज पांडे का नाम स्पाई थ्रिलर फिल्में बनाने में हिंदी सिनेमा में खास नाम बन चुका है. उसपर से उनकी कहानियों का साथ अगर उम्दा अभिनेता मनोज बाजपेयी का मिल जाए तो क्या कहना होगा. अय्यारी इसी जुगलबंदी की कहानी है इसलिए उम्मीद तो बनती है लेकिन ये फ़िल्म इस उम्मीद पर पूरी तरह से खरी नहीं उतरती.

फ़िल्म की कहानी की बात करें यह मेजर अभय सिंह (मनोज बाजपेयी) और जय बक्शी( सिद्धार्थ मल्होत्रा) की कहानी है जो देश की सुरक्षा के लिए एक स्पेशल यूनिट के लिए काम करते हैं. हालात कुछ ऐसे हो जाते हैं कि सिद्धार्थ और जय अलग अलग राह चुन लेते है. फ़िल्म की कहानी पर आए तो यह आर्म्स डील के ज़रिए सेना में फैले भ्रष्टाचार की बात करता है.

फ़िल्म में डिटेल में बताया गया है कि किस तरह से कम कीमत वाले हथियारों को मूल्य से चौगुना दाम देकर खरीदा जाता है. आम जनता जो टैक्स भरती है उसका किस तरह से गलत इस्तेमाल होता है. इसके साथ ही फ़िल्म देश की सुरक्षा, सेना के प्रमुख अफसरों,इंटेलीजेंस ब्यूरो से लेकर राजनीतिक गलियारों और मीडिया को भी अपनी कहानी में सवालों के घेरे में लाती है. फ़िल्म के उद्देश्य बहुत सारे हैं.

कहानी को जिस तरह से प्रस्तुत किया गया है।उससे उद्देश्य साफ नहीं होता है. फ़िल्म में कई ट्विस्ट डाले गए हैं लेकिन वह रोमांच नहीं बढ़ा पाते हैं. फ़िल्म की कहानी ज़रूरत से ज़्यादा लंबी है. नीरज की पिछली फिल्मों की तरह न तो इसमें कसावट है और न ही रफ्तार.आखिर में जब फ़िल्म खत्म होती है तो आपको इससे निराशा होती है।फ़िल्म के कई दृश्य नीरज की पिछली फिल्मों से मेल खाते हैं. स्पाई थ्रिलर फिल्म में व्हाट्सअप का इस्तेमाल दिखाया गया है जिसे देखकर हंसी आती है.

अभिनय की बात करें तो अभिनेता मनोज बाजपेयी के कंधों पर यह पूरी फिल्म है. उन्होंने बेहतरीन काम किया है।फ़िल्म की एकमात्र यूएसपी उनका अभिनय है।सिद्धार्थ अच्छे रहे हैं. कुमुद मिश्रा और आदिल हुसैन का काम अच्छा रहा है. नसीरुद्दीन शाह छोटी भूमिका में भी प्रभावित कर जाते हैं. अनुपम खेर और बाकी के किरदारों को फ़िल्म में करने को कुछ खास नहीं था.

फ़िल्म की सिनेमाटोग्राफी अच्छी है। कश्मीर से लेकर लंदन के रियल लोकेशन कहानी को रीयलिस्टिक टच देते हैं. फ़िल्म का बैकग्राउंड स्कोर बेबी फ़िल्म की कॉपी लगता है. गीतों की फ़िल्म में ज़रूरत नहीं थी वो बस फ़िल्म की लंबाई को बढ़ाते हैं. फ़िल्म के दूसरे पहलू औसत हैं कुलमिलाकर इस बार नीरज चूक गए हैं.

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