रफी को ताउम्र गुरु मानते रहे महेंद्र कपूर

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महेंद्र कपूर हमेशा ही खुद को रफी साहब का शिष्य कहा करते थे. जब वह 13 साल के थे, तब से वह रफी के पास संगीत सीखने जाया करते थे. हालांकि रफी बहुत व्यस्त रहते थे, लेकिन जितना हो सकता था, उन्होंने महेंद्र को सिखाया. महेंद्र भी ताउम्र उन्हें गुरु मानते रहे. बात 1979 की […]

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महेंद्र कपूर हमेशा ही खुद को रफी साहब का शिष्य कहा करते थे. जब वह 13 साल के थे, तब से वह रफी के पास संगीत सीखने जाया करते थे. हालांकि रफी बहुत व्यस्त रहते थे, लेकिन जितना हो सकता था, उन्होंने महेंद्र को सिखाया. महेंद्र भी ताउम्र उन्हें गुरु मानते रहे. बात 1979 की है. लंदन के रॉयल अल्बर्ट हॉल में महेंद्र कपूर नाइट आयोजित हुई थी.

वहां रफी के बेटे खालिद व सय्यद भी मौजूद थे. जैसे ही महेंद्र को यह बात मालूम हुई, आयोजकों से दो फूलों का हार लाने कहा. महेंद्र ने रफी के दोनों बेटों को मंच पर बुलाया व माला पहनायी. फिर पैरों को छुआ और कहा कि मैं इनके पैरों को नहीं छू रहा, अपने गुरु के पैर छू रहा हूं, जो मुंबई में बैठे हैं.

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