Chhath Puja 2025:पंचायत फेम अशोक पाठक ने कहा बिन मांगे छठी मईया ने बहुत कुछ दे दिया है

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chhath puja 2025

पंचायत फेम अशोक पाठक ने इस इंटरव्यू में छठ पूजा से जुड़ी अपनी यादें शेयर की है

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chhath puja 2025:वेब सीरीज पंचायत में बिनोद का किरदार निभा कर घर घर का परिचित चेहरा बनने वाले अशोक पाठक आस्था के पर्व छठ से जुड़ी अपनी यादों को उर्मिला कोरी से सांझा की. पेश है बातचीत के प्रमुख अंश

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छठ से जुड़ी यादें

छठ पूजा से जुड़ी बहुत प्यारी यादें रही हैं. मेरी पैदाइश हरियाणा की है तो छठ पूजा में अपने  गांव हिसुवा जाने का मौका मिलता था, जो नवादा में आता है। दरवेशपुर में मेरे गांव का नाम है.  दिवाली पर ही हम सब लोग हरियाणा से बिहार पहुंच  जाते थे ताकि दिवाली मनाकर उसके बाद छठ की तैयारी में जाए . छठ पर अपने दादा और दूसरे सभी रिश्तेदारों से मिलता था.जो काम के सिलसिले में गांव से दूर रहते थे लेकिन छठ पर सब लोग आते थे। जिन चेहरों को साल साल नहीं देखते थे। उनको देखते थे और एक अलग ही ख़ुशी मिलती थी.

छठ के काम की जिम्मेदारी

छठ के ढेरों काम होते हैं। आपको घर ही नहीं बल्कि पूरे मोहल्ले को साफ़ सुथरा रखने की जिम्मेदारी में भागीदारी देनी होती है. मैं हर काम को करता हूं .घर की बात करूं तो सिर्फ दौरा उठाने ही नहीं. गेहूं सुखाने से लेकर गेहूं गेंहू पिसवाने तक सबकुछ करता हूं.छठ पूजा के लिए गेहूं सुखाना आसान काम नहीं होता है. आपको ध्यान रखना होता है कि एक भी कबूतर गेहूं को ना खाये. नहीं तो गेहूं जूठा माना जाता है,तो इस बात का खास ख्याल रखना पड़ता है. ठकुआ छनवाने के भी काम में मैं बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेता हूं

छठ माई से अर्जी

मैं मानता हूँ कि सब खुश रहे. सब खुश रहेंगे तो चारों तरफ खुशियां होंगी.सब खुश रहेंगे तो हम भी खुश ही रहेंगे. अकेले खुश होकर हम क्या ही कर लेंगे. मुझे बिन मांगे छठी मइया ने बहुत कुछ दिया है. मैंने जो सपने में भी नहीं सोचा था. वो मिला है तो छठी मइया का ही ये आशीर्वाद है

छठ से जुड़ी सबसे खास रस्म

छठ पूजा हम बिहारियों के लिए इमोशन का नाम है इसलिए उससे जुड़ी हर बात बहुत ज्यादा कनेक्टेड फील होती है.सूरज को अर्ग देना वह बहुत खास लगता है लेकिन अगर सबसे ख़ास रस्म की बात करें तो घाट से शाम का अर्ध्य देकर लौटते हैं और कोसी भराया जाता है. उस वक़्त छठी माई के पारम्परिक जो गीत होते हैं. उनको गाना बहुत ही खास होता है.चाची और भाभी इन पारम्परिक गीतों को गाते हुए घर के सभी सदस्यों का नाम लेते हुए गाती जाती है. मुझे वह सुनना बहुत पसंद है. छठ के गीत मुझे गुनगुना भी बहुत पसंद है तो मैं भी सभी के साथ मिलकर गुनगुनाता हूं.

इस बार का छठ इस तरह से मनेगा

हम बिहारियों के लिए छठ पूजा इमोशन का नाम है इसलिए छठ में हर साल बिहार अपने घर आने की कोशिश रहती है ताकि परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर इस पर्व से जुड़ सकूं, लेकिन अभिनेता बनने के बाद और पिछले कुछ सालों से लगातार काम मिलने की वजह से एक दो बार मिस हो जा रहा है. इस साल भी नहीं जा पाऊंगा.शूटिंग में व्यस्त हूं तो छठ पर गांव और अपने परिवार को मिस करूंगा. हां जहां भी रहूंगा वहां से सूरज देवता को प्रणाम कर आशीर्वाद लूंगा.

युवाओं से अपील

मैं युवा पीढ़ी से यही कहूंगा कि दुनिया भले ही एआई के ज़माने में पहुंच गयी है. दुनिया मुट्ठी में करना अच्छी बात है लेकिन अपनी जड़ों को ना भूले और छठ पूजा से अच्छा और कोई भी समय नहीं हो सकता है. आप कहीं भी रहे लेकिन छठ पर अपने परिवार और अपनी जड़ों से जुड़ें. ये हमारी धरोहर हैं और आपको उन्हें संजो कर रखना है

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