अच्छी फिल्में और साथी ही मुझे घर से निकाल सकते हैं: अरशद वारसी

By Prabhat Khabar Digital Desk
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मुंबई : खुद को आलसी और संतोषप्रद बताते हुए अभिनेता अरशद वारसी का कहना है कि वह किसी भी फिल्म की शूटिंग के लिए घर से तब ही निकलते हैं जब वह फिल्म उनके अंतर्मन पर अपना प्रभाव छोड़ती है.

उन्होंने यहां एक साक्षात्कार में कहा, लालच और चाहत की कोई सीमा नहीं है. मैं अलग तरह का व्यक्ति हूं. अभिनेता के तौर पर मैं सही मॉडल नहीं हूं. अभिनेता को समझदार और अधिकाधिक के लिए लालची होना चाहिए. मैं संतुष्ट हूं और मुझे कोई परवाह नहीं है. मैं एकदम आलसी व्यक्ति हूं.

वारसी ने कहा कि अच्छी फिल्म और अच्छे साथी ही उन्हें घर से निकालकर फिल्म के सेट पर पहुंचा सकते हैं. 'गोलमाल', 'धमाल' और 'मुन्नाभाई' जैसी सफल फिल्मों में अभिनय कर चुके अरशद वारसी की अगली फिल्म 'पागलपंती' है, जिसे अनीस बामजई ने निर्देशित किया है.

उनका मानना है कि यह फिल्म फ्रेंचाइजी बन सकती है. उन्होंने कहा, मुझे ऐसा महसूस हो रहा है कि यह अच्छी बनेगी और इसकी शृंखला भी बनेगी. मैं मानता हूं कि लोग किरदारों को देखना चाहते हैं. किरदार शृंखला बनाते हैं फिल्में नहीं. इसलिए आपको शृंखला बनाने के लिए असल जिंदगी के लोगों जैसे चरित्र गढ़ने होंगे.

हालांकि अरशद ने 'दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे' और 'मुन्नाभाई' का उदाहरण देते हुए यह भी कहा कि हर सफल फिल्म की शृंखला नहीं बन सकती. अरशद ने खुलासा किया कि उन्होंने इंद्र कुमार की 'ग्रैंड मस्ती' और 'ग्रेट ग्रैंड मस्ती' जैसी फ्रेंचाइजी फिल्में इसलिए नहीं कीं क्योंकि वह सेक्स कॉमेडी फिल्मों में सहज महसूस नहीं करते.

उन्होंने कहा कि वह एक ही जैसा रोल दोबारा नहीं करते और लेखक द्वारा गढ़े गए किरदार को निभाते हैं. उन्होंने कहा, जैसे ही आप लेखक द्वारा आपके लिए लिखे गए किरदार को निभाने लगते हैं वैसे ही आपका अभिनय बदल जाता है.

51 वर्षीय अभिनेता का मानना है कि यदि किरदार फिल्म की कहानी के हिसाब से महत्वपूर्ण है तो वह यह परवाह नहीं करते कि किरदार कितना बड़ा है. अरशद इस समय अपनी फिल्म 'पागलपंती' के प्रचार में व्यस्त हैं, जो 22 नवंबर को रिलीज होने वाली है.

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