Dilip Kumar Property Case: ट्रस्टी ने बताया बंगले के किरायेदार नहीं, पट्टाधारक हैं दिलीप कुमार

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मुंबई : मुंबई स्थित 250 करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिकाना हक के विवाद में सुप्रसिद्ध अभिनेता दिलीप कुमार को राहत देते हुए उसके मूल मालिकों ने कहा है कि अभिनेता संपत्ति के ‘किरायेदार नहीं बल्कि स्थायी पट्टाधारक’ हैं. दिलीप कुमार और उनकी अभिनेत्री पत्नी सायरा बानो का शहर के एक बिल्डर समीर भोजवानी के […]

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मुंबई : मुंबई स्थित 250 करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिकाना हक के विवाद में सुप्रसिद्ध अभिनेता दिलीप कुमार को राहत देते हुए उसके मूल मालिकों ने कहा है कि अभिनेता संपत्ति के ‘किरायेदार नहीं बल्कि स्थायी पट्टाधारक’ हैं.

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दिलीप कुमार और उनकी अभिनेत्री पत्नी सायरा बानो का शहर के एक बिल्डर समीर भोजवानी के साथ बांद्रा के पाली हिल्स में एक बंगले के मालिकाना हक को लेकर विवाद चल रहा है. दंपति ने जनवरी 2018 में एक पुलिस शिकायत दर्ज करायी थी, जिसमें उन्होंने भोजवानी पर बांद्रा के पॉश पाली हिल इलाके में स्थित संपत्ति के मालिकाना हक के कागजात में जालसाजी करने का आरोप लगाया था.

भोजवानी ने 21 दिसंबर 2018 को एक सार्वजनिक नोटिस जारी करके दावा किया था कि वह संपत्ति का ‘वैध मालिक’ है. उसने दावा किया था कि कुमार संपत्ति के अस्थायी किरायेदार हैं. इसके बाद दंपति ने लगत और मानहानिकारक बयान के जरिये जनता को गुमराह करने के लिये 31 दिसंबर 2018 को भोजवानी को मानहानि का नोटिस भेजा और क्षतिपूर्ति के रूप में 200 करोड़ रुपये मांगे.

संपत्ति के मूल मालिकों के कानूनी वारिस सुनील खटाऊ सेठ मूलराज खटाऊ ट्रस्ट सेटलमेंट के लाभार्थी हैं. उन्होंने सोमवार को एक सार्वजनिक नोटिस जारी करके कहा कि ट्रस्ट इसका मालिक है और दिलीप कुमार 999 वर्षों के लिए इस संपत्ति के एक स्थायी पट्टाधारक हैं. नोटिस में यह स्पष्ट किया गया है कि कुमार संपत्ति के किरायेदार नहीं हैं.

ट्रस्ट के वकील अल्तमस शेख की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि संपत्ति का किराया पहले ही दे दिया गया है और ‘पट्टा अब भी वैध और लागू है’. नोटिस में कहा गया है, समीर भोजवानी सम्पत्ति का मालिक होने का दावा नहीं कर सकते. संपत्ति कार्ड चंद्रकात खटाऊ (न्यासियों में शामिल) को संपत्ति के मालिकों में से एक बताता है और युसूफ खान उर्फ दिलीप कुमार को 25 सितंबर 1953 के विक्रय पत्र में पट्टाधारक दिखाता है.

इसमें कहा गया है कि भोजवानी ने सेठ मूलराज खटाऊ सेटलमेंट ट्रस्ट के न्यासी होने का दावा करने वाले हितेन खटाऊ, महेंद्र खटाऊ और दिलीप खटाऊ के साथ मिलकर न्यास की कई संपत्तियों के पूर्व दिनांक के कई अवैध दस्तावेज तैयार किये हैं.

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