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फीफा विश्व कप फुटबॉल: गेंद में लगी है चिप, स्मार्टफोन से कनेक्ट कर सकेंगे

Updated at : 29 May 2018 8:24 AM (IST)
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फीफा विश्व कप फुटबॉल: गेंद में लगी है चिप, स्मार्टफोन से कनेक्ट कर सकेंगे

फीफा विश्व कप फुटबॉल के लिए एक विशेष तरह के गेंद का इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि पहली बार जब 1930 में विश्व कप खेला गया था, तो 12 टूकड़ों से बनी बॉल का हुआ था इस्तेमाल. हालांकि बड़ी कंपनियों को जुड़ने के बाद इस बार शोध होने लगे और अब गेंद काफी जांच परख […]

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फीफा विश्व कप फुटबॉल के लिए एक विशेष तरह के गेंद का इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि पहली बार जब 1930 में विश्व कप खेला गया था, तो 12 टूकड़ों से बनी बॉल का हुआ था इस्तेमाल. हालांकि बड़ी कंपनियों को जुड़ने के बाद इस बार शोध होने लगे और अब गेंद काफी जांच परख कर बनायी जा रही है. इस बार जिस गेंद का इस्तेमाल होगा, फीफा के अनुसार उसमें चिप लगी है, जिसको मोबाइल फोन से जोड़ सकते हैं.

1930
उरुग्वे : 12 टुकड़ों से गेंद बनी थी. गेद का दायरा 68 से 70 सेमी के बीच का था. गेंद पर अर्जेंटीना व उरुग्वे में विवाद हुआ था.

1938
फ्रांस : स्थानीय निर्माताओं ने बॉल बनायी थी. यह गेंद भी 12 टूकड़ों से बनी थी, लेकिन इसका रंग बदल कर ब्राउन कर दिया गया था.

1950
ब्राजील : विश्व युद्ध के बाद भी 12 टुकड़ों वाले गेंद का इस्तेमाल हुआ,लेकिन इसके आखिरी छोर घुमावदार थे, जिससे सिलाई पर जोर कम पड़े.

1954
स्विट्जरलैंड : फीफा वर्ल्ड कप में पहली बार 18 पैनल की गेंद का इस्तेमाल किया गया. इसी बॉल का इस्तेमाल 1966 तक विश्व कप में हुआ.

1958
स्वीडन : पहली बार 18 टुकड़ों में गेंद बनी. इसे थोड़ा पहले से बेहतर बनाया गया, सिलाई ऐसी की गयी, जिससे दबाव कम हो गया.

1962
चिली : नमी वाले मौसम में शिकायतें आयी कि बॉल पानी शोख रही है. धूप में रंग बदल रही है, तब रेफरी ने 5 बदलाव के विकल्प दिये.

1966

इंग्लैंड : इंग्लैंड की कंपनी ने पहली बार बॉल के नमूने दिये. इसे 24 टुकड़ों को जोड़ बनाया गया. छह को टुकड़ों से जोड़ा गया.

1970
मैक्सिको : फीफा एसोसिएशन और एडिडास के बीच करार हुआ. बॉल का नाम टेलस्टार रखा गया. यह चमड़े का था.

1974
जर्मनी: डिजाइन में कोई खास बदलाव नहीं किया गया. इस बॉल को लेस्टार डुरस्टार का नाम दिया गया.

1978
अर्जेंटीना : एडिडास ने बॉल को टैगो नाम दिया था. पहली बार एडिडास ने अपना ट्रेडमार्क बॉल पर दिया था.

1982
स्पेन : टेंगो स्पाना नाम की बॉल को खास तौर पर इस मैच के लिए तैयार किया गया था. मैटेरियल लेदर और सिंथेटिक का मिश्रण था.

1986
मैक्सिको : पहली बार अनूठे फीचर के साथ बॉल बनायी गयी. सिंथेटिक मैटेरियल की लेयर के साथ बनी बॉल का नाम एजटेका दिया गया.

1990
इटली : एक बार बॉल पूरी तरह से सिंथेटिक फाइवर लेयर की बनायी गयी. तेज रफ्तार के लिए अलग वस्तु का इस्तेमाल किया गया.

1994
यूएसए: इस टूर्नामेंट के लिए क्यूस्टरा नाम की बॉल फ्रांस ने बनायी थी. इसका टेस्ट यूरोप और यूएसए ने मिल कर दिया था.

1998
फ्रांस : फीफा वर्ल्ड कप के इतिहास में पहली बार मेजबान राष्ट्र के संकेत के रूप में बदल पर ट्राइकलर के रंग देने का प्रयास हुआ.

2002
कोरिया/जापान : एडिडास रिसर्च सेंटर में ट्राइकलर पर तीन साल की मेहनत के बाद बनी यह बॉल कई मायनों में अलग थी.

2006
जर्मनी : एक बार फिस से तीन साल की रिसर्च के बाद एडिडास की रचनात्मक टीम मे कई टेस्ट करने के बाद बॉल का निर्माण किया था.

2010
साउथ अफ्रीका : एडिडास की एसोसिएट कंपनी जबुलानी ने 11वीं एडिडास के बॉल का निर्माण किया. इसमें 11 रंगों का इस्तेमाल किया गया.

2014
ब्राजील : ब्राजूका गेंद का इस्तेमाल किया गया. ब्राजूका का मतलब स्थानीय भाषा में ब्राजीली होता है. नाम का चयन लोगों ने किया था.

2018
रूस : इस बार ऑफिसियल बॉल टेलस्टार-18 का इस्तेमाल होगा. यह 32 पैनल का है. इसमें सिलाई नहीं किया गया है. फीफा वेबसाइट के अनुसार बॉल में एनएफसी चिप भी है. गेंद को स्मार्टफोन से जोड़ा जा सकता है.

-704 गेंदों का इस्तेमाल विश्व कप फुटबॉल के 64 मैचों के दौरान किया जाता है, 11 गेंदों का इस्तेमाल विश्व कप फुटबॉल के दौरान प्रति मैच किये जाते हैं.

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