Modi Cabinet : प्रफुल्ल पटेल ने कहा-हमारे गठबंधन में कोई मतभेद नहीं, बस मैं डिमोशन नहीं चाहता

प्रफुल्ल पटेल ने कहा- मैं पहले कैबिनेट मंत्री रह चुका है, इसलिए व्यक्तिगत तौर पर यह मेरे लिए डिमोशन जैसा होगा, इसलिए मैं अभी मंत्री पद की शपथ नहीं लेना चाहता हूं.
Modi Cabinet : हमारे गठबंधन में कोई मतभेद नहीं है, हमसब मिलकर काम कर रहे हैं. हमारे बीच कोई तनाव नहीं है. उक्त बातें एनसीपी के नेता प्रफुल्ल पटेल ने आज मीडिया से बात करते हुए कही. उन्होंने बताया कि कल रात हमें बताया गया कि हमारी पार्टी को एक स्वतंत्र प्रभार वाला राज्यमंत्री का पद दिया जाएगा. मैं पहले कैबिनेट मंत्री रह चुका है, इसलिए व्यक्तिगत तौर पर यह मेरे लिए डिमोशन जैसा होगा, इसलिए मैं अभी मंत्री पद की शपथ नहीं लेना चाहता हूं. इस बारे में बीजेपी के नेताओं को सूचना दे दी गई है, जिसके बाद उन्होंने यह कहा है कि वे इस मामले में कोई रास्ता निकालेंगे.
एनडीए के तमाम घटक दल शामिल
गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी आज प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे और उनके साथ उनका मंत्रिमंडल भी शपथ लेगा. अब तक जो सूचना आई है उसके अनुसार नरेंद्र मोदी के साथ 65 या उससे अधिक मंत्री शपथ लेंगे. मंत्री बनने वालों की सूची में बीजेपी और उनके तमाम सहयोगी दल जो एनडीए के सदस्य है, उनकी उपस्थिति नजर आ रही है, लेकिन एनसीपी का कोई व्यक्ति संभावित मंत्रियों की सूची में नजर नहीं आया, जिसके बाद यह से यह चर्चा गर्म हो गई थी कि गठबंधन में सबकुछ ठीक नजर नहीं आ रहा है.
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प्रफुल्ल पटेल ने दिया स्पष्टीकरण
इसी कयास के बाद प्रफुल्ल पटेल ने मीडिया के सामने स्पष्टीकरण दिया है. नरेंद्र मोदी अब से कुछ देर बाद यानी शाम 7:15 बजे प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे. यह उनका लगातार तीसरा कार्यकाल है. एनडीए को इस चुनाव में पूर्ण बहुमत मिला है और कुल 292 सीटें उनके खाते में आई हैं, बीजेपी को कुल 240 सीटें मिली हैं. वहीं इंडिया गठबंधन को 232 सीटें मिली हैं.
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By रजनीश आनंद
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.
राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.
रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.
आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.
रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
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