Lok Sabha Election 2024 : हैदराबाद सीट से 5 लाख से अधिक वोटर्स के नाम काटे गए, जानिए माधवी लता के मैदान में आने के बाद कैसा है माहौल
Madhvi Latha
हैदराबाद सीट पर इस बार चुनावी मुकाबला बहुत ही रोचक होने जा रहा है क्योंकि असदुद्दीन ओवैसी के सामने बीजेपी ने फायर ब्रांड नेता माधवी लता को उतारा है.
Lok Sabha Election 2024 : ‘ओवैसी है लापता, जब से आई माधवी लता’. यह स्लोगन आज केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने हैदराबाद में बीजेपी उम्मीदवार माधवी लता के प्रचार के दौरान कही. अनुराग ठाकुर आज हैदराबाद में माधवी लता के पक्ष में रोड शो कर रहे थे. उनका यह रोड शोर चारमीनार के पास आयोजित किया गया था. गौरतलब है कि हैदराबाद से बीजेपी की उम्मीदवार माधवीलता ने आज अपना नामांकन दाखिल किया. इससे पहले वे मंदिर गईं और वहां पूजा अर्चना की.
माधवी लता की छवि हिंदूवादी नेता की
हैदराबाद सीट से असदुद्दीन ओवैसी सांसद हैं और उनके परिवार का यहां दबदबा है. ऐसी सीट पर जब बीजेपी ने माधवी लता जैसी उम्मीदवार को खड़ा किया, तो उनकी चर्चा चारों ओर हो रही है. माधवी लता की छवि एक हिंदूवादी नेता की है. वे अपने अनोखे अंदाज और सामाजिक कार्यों की वजह से भी जानी जाती हैं. महिलाओं के बीच उनकी अच्छी पकड़ है, खासकर मुस्लिम महिलाएं भी उनकी पक्षधर है. जब से तीन तलाक के मुद्दे पर मोदी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं के पक्ष में कानून बनाया है, महिलाओं की सहानुभूति इनके साथ है.
आखिर एआईएमआईएम के खेमे में क्यों है बेचैनी
हैदराबाद संसदीय सीट पर मुसलमानों का प्रभाव है और वे चुनाव का नतीजा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं. वर्तमान सांसद असदुद्दीन ओवैसी यहां 2004 से सांसद हैं, उससे पहले उनके पिता सुलतान सलाउद्दीन ओवैसी 1984 से 1999 तक सांसद रहे थे. जनगणना 2011 के अनुसार हैदराबाद जिले में हिंदू बहुसंख्यक हैं, लेकिन मुसलमानों की संख्या यहां लगभग 45 प्रतिशत है जो चुनाव के परिणाम को प्रभावित करते हैं क्योंकि उनका वोट एकमुश्त पड़ता है. गौर करने वाली बात यह है कि इस बार वोटर लिस्ट से लाखों के नाम काटे गए हैं और हजारों वोटर के नाम जुड़े हैं, जिसकी वजह से विरोधी खेमे में खलबली है. खबर के अनुसार हैदराबाद संसदीय सीट से नवंबर 2023 से अबतक लगभग पांच लाख 41 हजार वोटर्स का नाम सूची से डिलीट किया गया है. इनमें ऐसे मतदाता शामिल हैं, जो या तो दूसरी जगह शिफ्ट हो गए हैं, जिनकी मौत हो गई है या फिर जो डुप्लीकेट वोटर्स हैं.
माधवी लता पर दर्ज हुआ एफआईआर
माधवी लता कट्टर हिंदूवादी छवि की नेता हैं. वे पीएम नरेंद्र मोदी को अपना आदर्श मानती हैं. रजत शर्मा के कार्यक्रम आपकी अदालत में आकर उन्होंने खूब वाहवाही बटोरी और उनकी चर्चा भी बीजेपी की फायर ब्रांड नेता के रूप में हो रही है. रामनवमी के मौके पर निकाली गई शोभायात्रा में उन्होंने एक प्रतीकात्मक चिह्न बनाया था, जिसे लेकर उनकी खूब आलोचना हुई और मुस्लिम संगठन के नेताओं ने उनपर कार्रवाई की मांग भी की. इसी मामले को लेकर उनपर प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी. हालांकि माधवी लता ने बाद में यह कहा था कि उनके वीडियो को आधा-अधूरा दिखाकर गलत तरीके से प्रचारित किया गया है.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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