Modi 3.0 Cabinet: फिल्मों के शौकीन एचडी कुमारस्वामी बने मंत्री, ली शपथ
Kumaraswamy
पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के बेटे और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री रहे एचडी कुमारस्वामी को पीएम मोदी के मंत्रिमंडल में जगह मिली है.
Modi 3.0 Cabinet: जेडीएस के सांसद एचडी कुमारस्वामी ने पीएम मोदी के तीसरे कार्यकाल में मंत्री पद की शपथ ली. एचडी कुमारस्वामी कर्नाटक के मंड्या लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं. शपथ से पहले एचडी कुमारस्वामी पीएम मोदी के आवास पर उनसे मुलाकात भी की थी. पीएम मोदी के साथ संभावित मंत्रियों ने चाय पर चर्चा की थी, इस बैठक में प्रधानमंत्री ने उनसे अपने 100 दिन के एजेंडे पर बात की थी. उन्होंने कहा था कि विकास के लिए काम करना मंत्रियों का दायित्व है.
एचडी देवगौड़ा के बेटे हैं कुमारस्वामी
एचडी कुमारस्वामी कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं. वे पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के बेटे हैं. कुमारस्वामी 2006-07 और 2018 से 2019 तक कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया है. वे कर्नाटक में विपक्ष के नेता भी रहे हैं. वर्तमान में वे जेडीएस के अध्यक्ष हैं. कुमारस्वामी एक बड़े फिल्मनिर्माता भी हैं. 65 वर्षीय कुमारस्वामी का जन्म कर्नाटक के हासन जिले में हुआ है. उनकी प्रारंभिक शिक्षा हासन जिले में ही हुई है, उसके बाद उन्होंने बेंगलुरु से आगे की पढ़ाई की. उन्होंने बैचलर ऑफ साइंस की डिग्री नेशनल कॉलेज बसवनगुड़ी, बेंगलुरु से पूरी की है. 13 मार्च 1986 को कुमारस्वामी ने अनिता कुमारस्वामी से शादी की. उनका एक बेटा है, जिसका नाम निखिल गौड़ा है.
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राजनीतिक कैरियर
कुमारस्वामी ने 1996 के आम चुनाव से राजनीति में प्रवेश किया था. वे यहां से चुनाव जीते थे. 1999 में वे सथानुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़े थे, लेकिन कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार से चुनाव हार गए थे. 2004 में वे रामनगर विधाससभा क्षेत्र से चुनाव जीते और उस वक्त कांग्रेस और जेडीएस की सरकार बनी. 28 मई 2004 को उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली,लेकिन सरकार चली नहीं. 2006 में वे एक बार फिर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन 2007 तक ही पद पर बने रह पाए.
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लेखक के बारे में
By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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