जगदीश शेट्टार चुनाव नहीं जीतेंगे यह मैं अपने खून से लिखकर दे सकता हूं, बीएस येदियुरप्पा ने किया दावा

Published by : Rajneesh Anand Updated At : 26 Apr 2023 2:27 PM

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भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा ने हाल ही में मीडिया से बात करते हुए यह भी कहा था कि जगदीश शेट्टार धोखेबाज हैं और उन्हें अपने कर्मों की सजा जरूर मिलेगी. येदियुरप्पा ने कहा कि उन्हें जनता सबक सिखायेगी वे किसी भी कीमत पर चुनाव नहीं जीत पायेंगे.

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जगदीश शेट्टार हुबली धारवाड़ सेंट्रल विधानसभा सीट से चुनाव नहीं जीतेंगे, यह बात मैं अपने खून से लिखकर दे सकता हूं. उक्त बातें आज भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा ने हुबली में आयोजित एक सभा में कही. उन्होंने कहा कि जगदीश शेट्टार किसी भी कीमत पर इस सीट से चुनाव नहीं जीत पायेंगे.

धोखेबाज हैं जगदीश शेट्टार

भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा ने हाल ही में मीडिया से बात करते हुए यह भी कहा था कि जगदीश शेट्टार धोखेबाज हैं और उन्हें अपने कर्मों की सजा जरूर मिलेगी. येदियुरप्पा ने कहा कि उन्हें जनता सबक सिखायेगी वे किसी भी कीमत पर चुनाव नहीं जीत पायेंगे.


भाजपा ने महेश तेंगिनाकाई को टिकट दिया

हुबली धारवाड़ सेंट्रल सीट से भाजपा ने महेश तेंगिनाकाई को टिकट दिया है जो पहली बार चुनाव मैदान में हैं. जगदीश शेट्टार लिंगायत समुदाय के कद्दावर भाजपा नेता थे, लेकिन टिकट नहीं मिलने पर वे बागी हो गये और कांग्रेस का दामन थाम लिया.

कांग्रेस के साथ गये जगदीश शेट्टार

जगदीश शेट्टार ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुग खरगे की उपस्थिति में पार्टी का दामन थामा. उन्होंने इस मौके पर कहा कि मैं यह सोच भी नहीं सकता था कि पार्टी मुझे टिकट नहीं देगी. इतना ही नहीं मेरा साथ बहुत अपमानजनक व्यवहार किया गया. मुझे फोन करके सिर्फ यह बता दिया गया कि मुझे टिकट नहीं दिया जा रहा है. मुझसे बात भी नहीं की गयी कि आखिर ऐसा क्यों किया गया.

10 मई को है मतदान

वहीं इस मसले पर बीएस येदियुरप्पा का जगदीश शेट्टार ने पार्ट के साथ धोखा किया है. उनकी पत्नी को टिकट देने की बात हुई थी और उन्हें फोन करके दिल्ली बुलाया गया था, उन्हें राज्यसभा भेजने की बात थी, लेकिन वे नहीं आये.कर्नाटक में 10 मई को विधानसभा चुनाव होना है और 13 मई को रिजल्ट घोषित किये जायेंगे. चुनाव को लेकर सियासी पारा गर्म है और आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है.

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लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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