नौकरी के साथ की पढ़ाई, IRS नीरज ने 5वें प्रयास में हासिल की UPSC AIR 180

Author Smita dey
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नीरज तरार UPSC AIR 180 (Social Media)

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Neeraj Trar AIR 180: यूपीएससी जैसे कठिन परीक्षा में चंडीगढ़ के नीरज को AIR 180 मिला है. इससे पहले वे असिस्टेंट कमिश्नर के पोस्ट पर काम कर रहे हैं. जानें कैसे नीरज ने ड्यूटी के साथ पांचवें प्रयास में अपनी यह सफलता हासिल की है.

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Neeraj Trar AIR 180: यूपीएससी सिविल सर्विस एग्जाम में चंडीगढ़ के नीरज तरार ने ऑल इंडिया रैंक (AIR) 180 हासिल कर अपने परिवार और शहर का नाम रोशन किया है. यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि नीरज पहले से ही आईआरएस (IRS) अधिकारी के रूप में देश की सेवा कर रहे हैं. नीरज की कहानी मेहनत, धैर्य और कभी हार न मानने वाले जज्बे की मिसाल है. आइए उनकी जर्नी (Neeraj Trar AIR 180) को करीब से जानते हैं. 

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Neeraj Trar AIR 180: कहां के रहने वाले हैं नीरज? 

नीरज मूल रूप से राजस्थान के बीकानेर के रहने वाले हैं, लेकिन उनका परिवार लंबे समय से चंडीगढ़ में रह रहा है. उनके पिता देव राज पीजीजीसी-11 (PGGC-11) में एसोसिएट प्रोफेसर हैं और उनकी मां बसंती देवी एक हाउसवाइफ है. उनके घर में पढ़ाई-लिखाई का बेहतरीन माहौल है. उनकी दो बड़ी बहनें पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट में कार्यरत हैं और बड़े भाई राजस्थान से पीएचडी कर रहे हैं. 

चंडीगढ़ से दिल्ली तक का सफर

नीरज की शुरुआती पढ़ाई चंडीगढ़ में ही हुई. उन्होंने अपनी स्कूलिंग जीएमएसएसएस-10 (GMSSS-10) और जीएमएसएसएस-16 (GMSSS-16) से पूरी की. बचपन से ही पढ़ाई में नीरज होनहार स्टूडेंट रहे हैं. इसके बाद वे एनआईटी दिल्ली (NIT Delhi) से बीटेक की डिग्री हासिल की. टेक्निकल पढ़ाई करने के बाद भी उनका लक्ष्य हमेशा से सिविल सर्विस में जाकर समाज के लोगों के लिए कुछ अच्छा करने का था.

नीरज तरार अपने पिता देव राज तरार के साथ

पांचवें प्रयास में मिली सफलता 

UPSC 2025 की परीक्षा उनका पांचवां प्रयास था जिसमें उन्होंने 180वीं रैंक हासिल की. इससे पहले उनका सिलेक्शन तीसरे अटेम्प्ट में भी हुआ था, जिसके बाद वे असिस्टेंट कमिश्नर (IRS), कस्टम्स, जीएसटी और नारकोटिक्स के पद पर तैनात हुए. ड्यूटी पर रहते हुए भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और अपनी रैंक सुधारने के लिए कोशिश करते रहे.

8-9 घंटे की कड़ी मेहनत

तैयारी के दौरान नीरज ने अनुशासन को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया. वे रोजाना आठ से नौ घंटे पढ़ाई करते थे. शुरुआत के पहले और दूसरे प्रयास में वे थोड़े अनिश्चित थे कि परीक्षा पास कर पाएंगे या नहीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. उन्होंने ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों तरीकों से पढ़ाई की. नीरज रोजाना एक से दो घंटे इंटरनेट की भी मदद लेते थे.

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