चाय बेचने वाले का बेटा बना अफसर, बिहार के बेटे ने UPSC CAPF ने हिसिल किया 81वां रैंक, जानें उनकी सफलता की कहानी

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AIR 81 घनश्याम जायसवाल की फोटो (Image- Instagram and AI)

Ghanshyam Success Story: बिहार के घनश्याम जायसवाल ने UPSC CAPF (AC) 2025 में AIR 81 हासिल किया. वह इस परीक्षा को पास करके असिस्टेंट कमांडेंट बने हैं. जानिए उनकी फैमिली, एजुकेशन, संघर्ष, करियर जर्नी और सफलता की कहानी.

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Ghanshyam Success Story: सच्ची लगन और लगातार मेहनत हो, तो जीवन में हर कुछ पाना मुमकिन है. इस बात को बिहार के बेटे घनश्याम जायसवाल ने सच साबित किया है. परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के बावजूद, घनश्याम ने UPSC (यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन) की परीक्षा पास की हैं. आइए इस बारे में डिटेल में जानते हैं.

Ghanshyam Family Background: जानिए क्या है घनश्याम का फैमिली बैकग्राउंड?

घनश्याम जायसवाल बिहार के मुजफ्फरपुर में बैरिया के रहने वाले हैं. उनके पिता शत्रुधन शाह बैरिया बस स्टैंड पर एक ठेले पर चाय और स्नैक्स की दुकान चलाते हैं. उनकी मां एक हाउस वाइफ है और घर संभालती हैं. घनश्याम सात भाई-बहनों में तीसरे नंबर पर हैं.

Ghanshyam Marks Scored: कितना किया स्कोर?

UPSC CAPF (AC) 2025 की रिजल्ट में घनश्याम ने ऑल इंडिया रैंक 81वां हासिल किया है. वह इस परीक्षा को पास करके असिस्टेंट कमांडेंट बने हैं. यह उनकी लगातार मेहनत और लगन का परिणाम है.

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Ghanshyam Educational Background: जानिए इस बारे में

मीडिया के साथ इंटरव्यू में घनश्याम ने बताया कि उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई मुजफ्फरपुर बैरिया स्थित नथुनी भगत विद्यालय से 10वीं कक्षा तक पूरी की. इसके बाद उन्होंने मुजफ्फरपुर के रामेश्वर सिंह कॉलेज से साइंस स्ट्रीम में 12वीं की पढ़ाई पूरी की. बाद में, उन्होंने पॉलिटिकल साइंस में ऑनर्स के साथ बैचलर डिग्री हासिल की. ​​ग्रेजुएशन के दौरान ही उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी.

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Childhood Dream: बचपन में क्या बनने का था सपना?

बचपन में घनश्याम का सपना IIT में पढ़ने और इंजीनियर बनने का था. हालांकि उन्होंने JEE की परीक्षा दी, मगर सफलता नहीं मिली. इसके बाद में उन्होंने अपना रास्ता बदला और सिविल सेवा की तैयारी करने का फैसला किया.

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Career Journey: कैसी रही उनकी करियर जर्नी?

सफलता पाने से पहले घनश्याम को कई बार असफलता का सामना करना पड़ा. घनश्याम बताते हैं कि वे 10 से ज़्यादा अलग-अलग परीक्षाओं में फेल हुए और छह बार UPSC की परीक्षा में भी बैठे, लेकिन पास नहीं हो पाए. फिर भी, उन्होंने हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहे. घनश्याम के अनुसार, उनकी सफलता लगभग 5 साल के लगातार संघर्ष, कड़ी मेहनत और लगन का नतीजा थी.

Started Teaching: बच्चों काे शुरू किया पढ़ाना

जानकारी के अनुसार कोविड-19 महामारी के बाद, घनश्याम ने 12वीं कक्षा तक के बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया. पढ़ाने से उन्हें आर्थिक मदद मिली, जबकि वे अपनी पढ़ाई और सिविल सेवा की तैयारी भी जारी रखे हुए थे.

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प्रगति सिन्हा

लेखक के बारे में

By प्रगति सिन्हा

मैं प्रगति सिन्हा पिछले लगभग 3 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ी हूं। मुझे मुख्य रूप से शिक्षा से जुड़ी खबरों और उसमे हो रहे बदलावों व अपग्रेडेशन को समझना एवं उसे लोगों तक पहुंचाना पसंद है। प्रभात खबर डिजिटल के माध्यम से मेरा प्रयास रहता है कि शिक्षा जगत में हो रहे महत्वपूर्ण घटनाक्रम, विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दे और नई योजनाओं की जानकारी रीडर्स तक पहुंचा सकूं। मैं इससे पहले कोलकाता स्थित सन्मार्ग हिंदी डेली में एजुकेशन रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुकी हूं.

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