कबाड़ बीनने वाले के बेटे सागर रेगर ने क्रैक किया NEET, जानिए उनकी सफलता की कहानी
सागर रेगर के साथ उनके माता और पिता (Image- Instagram and AI Generated)
Sagar Regar Success Story: कोटा के गोड्ल्याहेड़ी गांव के रहने वाले सागर रेगर ने आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के बावजूद NEET UG 2026 में 564 अंक और AIR 27,157 हासिल की. कबाड़ बीनने वाले पिता के बेटे की यह प्रेरणादायक कहानी बताती है कि मेहनत और सही मार्गदर्शन से हर सपना पूरा किया जा सकता है.
Sagar Regar Success Story: आर्थिक तंगी, सीमित संसाधनों और निरंतर संघर्ष के बीच कोटा के एक बेटे सागर रेगर ने अपनी मेहनत के दम पर मिसाल पेश की है. वह कोटा के कैथून कस्बे के पास स्थित गोड्ल्याहेड़ी गांव के रहने वाले हैं. आइए जानते हैं कि उनकी सक्सेस स्टोरी के बारे में.
NEET Rank and Marks: जानिए कितने मार्क्स और रैंक के साथ क्रैक किया NEET?
सागर रेगर ने NEET UG में 564 अंक और 98.6296 परसेंटाइल हासिल किया है. अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने अखिल भारतीय रैंक (AIR) 27,157 और SC कैटेगरी में 684वीं रैंक प्राप्त की. इस मार्क्स के साथ उन्हें अच्छे मेडिकल काॅलेज में एडमीशन मिलनी की संभावना है.
Education Background: क्या है उनका एजुकेशन बैकग्राउंड?
सागर रेगर ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कैथून के सरकारी स्कूल से पूरी की है. यहां उन्होंने क्लास 10 में 76% प्राप्त किया। वहीं क्लास 12 में उन्होंने 92% अंक प्राप्त किए हैं.
मीडिया के साथ इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि डॉक्टर बनने के बाद वे न केवल मरीजों का इलाज करना चाहते हैं, बल्कि आज के जनरेशन में एजुकेशन और ड्रग्स फ्री लाइफ के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाना चाहते हैं.
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Study Motivation: क्या थी उनकी मोटिवेशन?
सागर बताते हैं कि उनकी बुआ की बेटी को लंबे समय तक गुटखा के सेवन के बाद कैंसर हो गया था. बहन की बीमारी और उसके दर्द को देखने के बाद सागर को डॉक्टर बनकर लोगों का इलाज करना और समाज को ड्रग्स फ्री बनाने का सूझा था.
Family Background: क्या है उनकी फैमली बैकग्राउंड?
इंटरव्यू में सागर रेगर ने बताया कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि उनके पिता ने साफ कह दिया था, कि वे मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी का खर्च नहीं उठा सकते हैं. इस दौरान कैथून के सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल ने उनका मार्गदर्शन किया और उन्हें शिक्षा संबल योजना के बारे में बताया. इस योजना के तहत, उन्हें पूरे एक साल तक NEET की फ्री कोचिंग, रहने और भोजन की सुविधा भी मिली थी.
Family Occupation: क्या करते थे उनके पिता?
सागर रेगर के पिता मुरली रेगर, घर-घर जाकर कबाड़ इकट्ठा करके पूरे परिवार का भरण-पोषण करते हैं. सागर की मां हाउस वाइफ हैं, मगर जब सागर के पिता इकट्ठा किया हुआ कबाड़ लेकर घर लौटते हैं, तो सागर की मां उसे छांटने में उनकी मदद करती हैं.
पिता ने बताया कि आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण मेडिकल की कोचिंग का खर्च उठाना उनके लिए नामुमकिन था. हालांकि सागर ने काफी सीमित संसाधन और अपनी मेहनत के बल पर यह परीक्षा पास की है.
2 Rooms for Living: रहने के लिए मात्र 2 कमरे
पूरा परिवार एक साधारण से दो कमरों के घर में रहता है. सागर की दो छोटी बहनें भी हैं. बड़ी बहन मानसी कक्षा 12 में बायोलाॅजी की पढ़ाई कर रही है, जबकि छोटी बहन इशिका कक्षा 10 में पढ़ती हैं.
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लेखक के बारे में
By प्रगति सिन्हा
मैं प्रगति सिन्हा पिछले लगभग 3 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ी हूं। मुझे मुख्य रूप से शिक्षा से जुड़ी खबरों और उसमे हो रहे बदलावों व अपग्रेडेशन को समझना एवं उसे लोगों तक पहुंचाना पसंद है। प्रभात खबर डिजिटल के माध्यम से मेरा प्रयास रहता है कि शिक्षा जगत में हो रहे महत्वपूर्ण घटनाक्रम, विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दे और नई योजनाओं की जानकारी रीडर्स तक पहुंचा सकूं। मैं इससे पहले कोलकाता स्थित सन्मार्ग हिंदी डेली में एजुकेशन रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुकी हूं.
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