बिहार की बेटी, चौथे प्रयास तक हार नहीं मानी, AIR 28 से UPSC में रचा इतिहास

प्राची हनी (PC-सोशल मीडिया)
Success Story: प्राची हनी की सफलता उन सभी उम्मीदवारों के लिए प्रेरणा है जो बार-बार असफल होने के बाद निराश हो जाते हैं. उनकी कहानी साफ बताती है कि अगर आप लगातार कोशिश करते रहें, तो सफलता देर से ही सही, लेकिन जरूर मिलती है.
Success Story: UPSC सिविल सेवा परीक्षा में इस बार कई कैंडिडेट्स ने अपनी मेहनत से सफलता की नई कहानी लिखी है. इन्हीं में से एक नाम है प्राची हनी का, जिन्होंने ऑल इंडिया 28वीं रैंक हासिल कर अपने परिवार और शहर का नाम रोशन किया है. खास बात यह है कि प्राची ने यह सफलता अपने चौथे प्रयास में हासिल की, जो उनकी लगन और धैर्य को दिखाती है.
मुजफ्फरपुर की बेटी ने किया कमाल
प्राची हनी बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की रहने वाली हैं. उनकी शुरुआती पढ़ाई यहीं से हुई. उन्होंने DAV पब्लिक स्कूल, मुजफ्फरपुर से स्कूलिंग पूरी की. उनके माता-पिता दोनों ही शिक्षक हैं, जिस वजह से बचपन से ही पढ़ाई का माहौल मिला.
दिल्ली यूनिवर्सिटी से की पढ़ाई
स्कूलिंग के बाद प्राची ने हायर एजुकेशन के लिए दिल्ली का रुख किया. उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जियोग्राफी में ग्रेजुएशन किया. इसी दौरान उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें UPSC की तैयारी करनी है और सिविल सेवा में जाना है.
तीन बार असफलता, चौथे में मिली सफलता
प्राची के लिए यह सफर आसान नहीं था. उन्होंने तीन बार UPSC परीक्षा दी, लेकिन सफलता नहीं मिली. इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी गलतियों से सीखते हुए तैयारी जारी रखी. आखिरकार चौथे प्रयास में उन्होंने 28वीं रैंक हासिल कर अपना सपना पूरा कर लिया.
इंटरव्यू में यूनिक नाम के पीछे का कारण पूछा
प्राची हनी से UPSC मॉक इंटरव्यू में उनके यूनिक नाम के पीछे की वजह पूछी गई तो उन्होंने कहा कि मां ने उन्हें ये नाम दिया है. प्राची ने बताया कि मेरे जन्म से पहले मां ने मुझे हनी नाम दिया था.
मेहनत और धैर्य से मिली सफलता
प्राची हनी की कहानी यह बताती है कि UPSC जैसी कठिन परीक्षा में सफलता पाने के लिए लगातार मेहनत और धैर्य बेहद जरूरी है. असफलताओं के बावजूद खुद पर भरोसा बनाए रखना ही असली ताकत होती है.
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By Shambhavi Shivani
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