8 घंटे फोन चलाकर किया NEET में टॉप, नहीं डांटते थे मम्मी-पापा

पांशुल बंसल की AI जेनरेटेड तस्वीर
NEET Success Story: सोशल मीडिया पर एक्टिव रहना और हर दिन कम-से-कम 6-7 फोन घंटे चलाना, ये सब NEET UG रैंक 2 हासिल करने वाले पांशुल बंसल की आदतों में शामिल था. उन्होंने खुलकर बताया कि वे 10-12 घंटे नहीं पढ़ते थे और एग्जाम के दिनों में वीडियो गेम्स खेलते थे.
NEET Success Story: नीट यूजी 2026 के रिजल्ट में हरियाणा के फरीदाबाद के रहने वाले पांशुल बंसल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑल इंडिया रैंक (AIR) 2 हासिल की है. उन्हें परीक्षा में 720 में से 715 मार्क्स मिले हैं. पांशुल ने एक मीडिया चैनल को दिए इंटरव्यू में बताया कि वो रोजाना कई घंटे मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते थे. सोशल मीडिया देखते थे, यूट्यूब पर वीडियो देखते थे और मोबाइल गेम भी खेलते थे. पढ़ाई को सिर्फ 6-7 घंटे दिया करते थे. इसके बाद भी पांशुल ने ये परीक्षा पास कर ली.
8वीं क्लास में देखा था डॉक्टर बनने का सपना
पांशुल ने बताया कि उन्होंने 8वीं कक्षा में ही डॉक्टर बनने का सपना देख लिया था. तभी उन्होंने तय कर लिया था कि आगे साइंस स्ट्रीम से पढ़ाई करेंगे और NEET परीक्षा की तैयारी करेंगे. वे 8वीं क्लास से साइंस और मैथ्स पर जोर देकर पढ़ते रहे.
सिर्फ दो साल की तैयारी में हासिल की AIR 2
पढ़ाई में शुरू से अच्छे रहे पांशुल ने 11वीं कक्षा से NEET की तैयारी शुरू की. उन्होंने करीब दो साल की मेहनत के बाद पहली ही कोशिश में शानदार सफलता हासिल कर ली. NEET री-एग्जाम में 720 में से 715 मार्क्स लाकर उन्होंने देशभर में AIR 2 प्राप्त की.
सोशल मीडिया और गेमिंग से नहीं बनाई दूरी
पांशुल ने बताया कि वह पढ़ाई के साथ-साथ सोशल मीडिया का इस्तेमाल भी करते थे. यूट्यूब पर वीडियो देखते थे और मोबाइल गेम भी खेलते थे. कई बार उनका स्क्रीन टाइम 8 घंटे तक पहुंच जाता था. लेकिन उन्होंने कभी भी मोबाइल को अपनी पढ़ाई पर हावी नहीं होने दिया और समय का सही से मैनेजमेंट किया.
मम्मी-पापा ने नहीं डांटा
पांशुल के पिता ने उन्हें कभी मोबाइल इस्तेमाल करने को लेकर डांटा नहीं. परिवार को उन पर भरोसा था कि वह अपनी जिम्मेदारी समझते हैं. माता-पिता के अनुसार, पांशुल जिस काम को करते थे पूरी लगन और मेहनत से करते थे.
स्कूल में भी रहे शानदार छात्र
पांशुल ने 10वीं की पढ़ाई डीपीएस फरीदाबाद से पूरी की, जबकि 12वीं समरफील्ड्स स्कूल, ग्रेटर कैलाश से की. दोनों बोर्ड परीक्षाओं में उन्होंने 90 प्रतिशत से अधिक मार्क्स हासिल किए.
सफलता का संदेश
पांशुल की कहानी बताती है कि सफलता के लिए केवल लंबे समय तक पढ़ाई करना ही जरूरी नहीं है, बल्कि समय का सही मैनेजमेंट और क्लियर गोल सेट करने से मिलती है. मनोरंजन और पढ़ाई के बीच बैलेंस बनाकर भी बड़ी परीक्षाओं में शानदार सफलता हासिल की जा सकती है.
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By शाम्भवी शिवानी
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