पहली बार में क्रैक होगा UPSC मेन्स! NCERT सिलेबस से जुड़े इन सवालों को जरूर पढ़ें

बुक्स की सांकेतिक तस्वीर (PC-Freepik)
NCERT Books PDF: पॉलिटिकल साइंस की गहरी समझ बनानी है तो आप NCERT की किताबें पढ़ें. UPSC और अन्य सिविल सेवा परीक्षा में इससे जुड़े सवाल आते हैं. अगर आपका भी विषय पॉलिटिकल साइंस है तो ये खबर आपके काम आएगी. यहां हम आपके लिए NCERT बुक से कुछ महत्वपूर्ण सवाल लेकर आए हैं, जो आपकी UPSC की तैयारी में मदद करेगा.
NCERT Books PDF: यूपीएससी परीक्षा खासकर मेन्स की तैयारी के लिए NCERT की थ्योरी बहुत काम आती है. NCERT से न सिर्फ बेस तैयार होता है बल्कि गहराई से नॉलेज मिलता है. UPSC परीक्षा में धर्मनिरपेक्षता से जुड़े प्रश्न अक्सर संविधान, मौलिक अधिकार, सामाजिक न्याय और समकालीन घटनाओं से जोड़कर पूछे जाते हैं.
अगर आप भी यूपीएससी या बीपीएससी जैसी सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो आप NCERT की बुक से पढ़ाई कर सकते हैं. NCERT की ऑफिशियल वेबसाइट ncert.nic.in पर जाकर अपने सब्जेक्ट के बुक का पीडीएफ डाउनलोड कर सकते हैं.

UPSC Books के आधार पर यहां देखें कुछ महत्वपूर्ण सवाल-जवाब
- नीचे दिए गए स्टेटमेंट के बारे में बताइए कि वे सही हैं या गलत
(क) राजनीतिक सिद्धांत उन विचारों की चर्चा करता है जो राजनीतिक संस्थाओं का आधार बनते हैं.
उत्तर: सही
(ख) राजनीतिक सिद्धांत विभिन्न धर्मों के बीच संबंधों की व्याख्या करता है. उत्तर: गलत
(ग) राजनीतिक सिद्धांत समानता और स्वतंत्रता जैसी अवधारणाओं के अर्थ स्पष्ट करता है.
उत्तर: सही
(घ) राजनीतिक सिद्धांत राजनीतिक दलों के प्रदर्शन की भविष्यवाणी करता है.
उत्तर: गलत
- राजनीति केवल वही नहीं है जो राजनेता करते हैं. क्या आप इस कथन से सहमत हैं? उदाहरण दीजिए.
उत्तर: हां, मैं सहमत हूं. राजनीति में नागरिकों की भागीदारी, मतदान, विरोध प्रदर्शन, जन आंदोलनों और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा भी शामिल होती है.
- लोकतंत्र के सफल संचालन के लिए जागरूक नागरिक क्यों आवश्यक हैं? टिप्पणी कीजिए.
उत्तर: जागरूक नागरिक सरकार को जवाबदेह बनाते हैं, अपने अधिकारों और कर्तव्यों का पालन करते हैं तथा लोकतंत्र को मजबूत बनाते हैं.
- राजनीतिक सिद्धांत का अध्ययन हमारे लिए किन-किन प्रकार से उपयोगी है? चार प्वॉइंट्स में लिखिए.
उत्तर: राजनीतिक अवधारणाओं को समझने में सहायता करता है. सही और गलत नीतियों का मूल्यांकन करना सिखाता है. लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जागरूक बनाता है. जिम्मेदार और सक्रिय नागरिक बनने में मदद करता है.
- क्या आपको लगता है कि एक अच्छा और तर्कपूर्ण तर्क दूसरों को आपकी बात सुनने के लिए प्रेरित कर सकता है?
उत्तर: हां, स्पष्ट और तथ्यपूर्ण तर्क लोगों को सोचने और हमारी बात पर ध्यान देने के लिए प्रेरित करते हैं.
- क्या राजनीतिक सिद्धांत का अध्ययन गणित के अध्ययन जैसा है? अपने उत्तर का कारण बताइए.
उत्तर: नहीं. गणित में उत्तर निश्चित होते हैं, जबकि राजनीतिक सिद्धांत में विभिन्न विचार, तर्क और परिस्थितियों के आधार पर अलग-अलग मत हो सकते हैं. इसलिए इसमें चर्चा और विश्लेषण का अधिक महत्व होता है.
- स्वतंत्रता से क्या अभिप्राय है? क्या व्यक्ति की स्वतंत्रता और राष्ट्र की स्वतंत्रता के बीच कोई संबंध है?
उत्तर: स्वतंत्रता का अर्थ है बिना अनुचित बाधाओं के अपने जीवन से जुड़े निर्णय लेने का अधिकार. हां, व्यक्ति और राष्ट्र की स्वतंत्रता एक-दूसरे से जुड़ी हैं. स्वतंत्र राष्ट्र में ही नागरिक अपनी स्वतंत्रता का पूर्ण रूप से आनंद ले सकते हैं.
- स्वतंत्रता की नकारात्मक (Negative) और सकारात्मक (Positive) अवधारणा में क्या अंतर है?
उत्तर: नकारात्मक स्वतंत्रता: अनावश्यक हस्तक्षेप या रोक-टोक का अभाव. सकारात्मक स्वतंत्रता: अपनी क्षमता का विकास करने और अपने लक्ष्य प्राप्त करने का अवसर.
- सामाजिक प्रतिबंध (Social Constraints) से क्या अभिप्राय है? क्या स्वतंत्रता का आनंद लेने के लिए किसी प्रकार के प्रतिबंध आवश्यक हैं?
उत्तर: सामाजिक प्रतिबंध वे नियम और कानून हैं जो समाज में व्यवस्था बनाए रखने के लिए बनाए जाते हैं. हां, उचित और न्यायसंगत प्रतिबंध आवश्यक हैं ताकि सभी लोगों की स्वतंत्रता सुरक्षित रह सके.

- अपने नागरिकों की स्वतंत्रता बनाए रखने में राज्य की क्या भूमिका है?
उत्तर: राज्य कानून बनाकर नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है, कानून-व्यवस्था बनाए रखता है तथा समान अवसर और सुरक्षा प्रदान करता है.
- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Expression) से क्या अभिप्राय है? आपके विचार में इस स्वतंत्रता पर कौन-से उचित प्रतिबंध होने चाहिए? उदाहरण दीजिए.
उत्तर: अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ है अपने विचारों को बोलने, लिखने या अन्य माध्यमों से व्यक्त करने का अधिकार. इस पर ऐसे उचित प्रतिबंध हो सकते हैं जो राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था, मानहानि, हिंसा भड़काने और घृणा फैलाने से संबंधित हों.
उदाहरण: किसी व्यक्ति या समुदाय के खिलाफ हिंसा भड़काने वाला भाषण प्रतिबंधित किया जा सकता है.
- कुछ लोगों का मानना है कि असमानता प्राकृतिक है, जबकि अन्य मानते हैं कि समानता प्राकृतिक है और असमानताएं समाज द्वारा उत्पन्न की जाती हैं. आप किस विचार का समर्थन करते हैं? कारण दीजिए.
उत्तर: मैं इस विचार का समर्थन करता/करती हूं कि समानता प्राकृतिक है. अधिकांश सामाजिक और आर्थिक असमानताएं समाज, परंपराओं और अवसरों की असमान उपलब्धता के कारण उत्पन्न होती हैं.
- एक मत है कि पूर्ण आर्थिक समानता न तो संभव है और न ही वांछनीय. समाज केवल अमीर और गरीब के बीच की खाई को कम करने का प्रयास कर सकता है. क्या आप सहमत हैं?
उत्तर: हां, मैं सहमत हूं. सभी लोगों की आय समान होना संभव नहीं है, लेकिन सरकार ऐसी नीतियां बना सकती है जिससे आर्थिक असमानता कम हो और सभी को समान अवसर मिलें.
- सरकार की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि छोटे और सीमांत किसानों को बाजार में उचित मूल्य नहीं मिल पाता. इसलिए सरकार केवल छोटे और सीमांत किसानों के लिए बेहतर मूल्य सुनिश्चित करे. क्या यह सिफारिश समानता के सिद्धांत के अनुरूप है?
उत्तर: हां. यह सकारात्मक भेदभाव (Affirmative Action) का उदाहरण है. इसका उद्देश्य कमजोर वर्गों को विशेष सहायता देकर वास्तविक समानता स्थापित करना है. इसलिए यह समानता के सिद्धांत के अनुरूप है.
- प्रत्येक व्यक्ति को उसका उचित अधिकार (Due) देना क्या कहलाता है? समय के साथ इसके अर्थ में क्या परिवर्तन आया है?
उत्तर: प्रत्येक व्यक्ति को उसके अधिकार, योग्यता और आवश्यकता के अनुसार उचित अवसर और सम्मान देना ही न्याय है. पहले न्याय का आधार जन्म और सामाजिक स्थिति था, जबकि आज समान अधिकार, अवसर और निष्पक्षता को महत्व दिया जाता है.
- अध्याय में बताए गए न्याय के तीन सिद्धांतों का संक्षेप में वर्णन कीजिए. प्रत्येक को उदाहरण सहित समझाइए.
उत्तर: (क) समानता (Equality): सभी को समान अधिकार और अवसर मिलें. उदाहरण: सभी वयस्कों को मतदान का अधिकार.
(ख) योग्यता के आधार पर पुरस्कार (Desert): व्यक्ति को उसके कार्य और क्षमता के अनुसार पुरस्कार मिले. उदाहरण: मेहनती कर्मचारी को पदोन्नति मिलना.
(ग) आवश्यकता के अनुसार सहायता (Need): जरूरतमंद लोगों को विशेष सहायता दी जाए. उदाहरण: गरीब छात्रों को छात्रवृत्ति देना.
- क्या लोगों की विशेष आवश्यकताओं का ध्यान रखने का सिद्धांत, सभी के साथ समान व्यवहार करने के सिद्धांत के विरुद्ध है?
उत्तर: नहीं. विशेष आवश्यकताओं वाले लोगों को अतिरिक्त सहायता देना वास्तविक समानता स्थापित करने के लिए आवश्यक है. इसलिए यह समानता के सिद्धांत के विरुद्ध नहीं है.
- रॉल्स (Rawls) ने "अज्ञानता के आवरण" (Veil of Ignorance) की अवधारणा का उपयोग यह सिद्ध करने के लिए कैसे किया कि न्यायपूर्ण वितरण तर्कसंगत है?
उत्तर: रॉल्स के अनुसार यदि लोग यह न जानते हों कि समाज में उनका स्थान क्या होगा, तो वे ऐसे नियम बनाएंगे जो सभी के लिए निष्पक्ष और न्यायपूर्ण हों. इसे ही अज्ञानता का आवरण कहा जाता है.
- स्वस्थ और उत्पादक जीवन जीने के लिए लोगों की न्यूनतम आवश्यकताएं क्या मानी जाती हैं? इन्हें सभी तक पहुंचाने में सरकार की क्या जिम्मेदारी है?
उत्तर: न्यूनतम आवश्यकताएं: भोजन, स्वच्छ पानी, आवास, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और रोजगार.
सरकार की जिम्मेदारी: सरकार का दायित्व है कि सभी नागरिकों को ये मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराए और कमजोर वर्गों के कल्याण के लिए योजनाएं चलाए.
- अधिकार (Rights) क्या हैं और वे क्यों महत्वपूर्ण हैं? अधिकारों का दावा किन आधारों पर किया जा सकता है?
उत्तर: अधिकार वे सुविधाएं और स्वतंत्रताएं हैं जो व्यक्ति के सम्मानपूर्ण जीवन और विकास के लिए आवश्यक हैं. इनका दावा मानव गरिमा, समानता, न्याय और समाज की आवश्यकताओं के आधार पर किया जा सकता है.
- कुछ अधिकारों को सार्वभौमिक (Universal) क्यों माना जाता है? ऐसे तीन अधिकार बताइए जिन्हें आप सार्वभौमिक मानते हैं तथा कारण दीजिए.
उत्तर: सार्वभौमिक अधिकार वे हैं जो हर व्यक्ति को केवल मानव होने के कारण प्राप्त होते हैं.
तीन सार्वभौमिक अधिकारी
जीवन का अधिकार – प्रत्येक व्यक्ति के लिए आवश्यक है.
समानता का अधिकार – सभी के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करता है.
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार – व्यक्ति को अपने विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता देता है.
22. आज हमारे देश में उठाए जा रहे कुछ नए अधिकारों के दावों पर संक्षेप में चर्चा कीजिए.
उत्तर: आज आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन की रक्षा का अधिकार, बच्चों को बंधुआ मजदूरी से मुक्ति का अधिकार, स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार तथा शिक्षा के अधिकार जैसे नए अधिकारों की मांग की जा रही है
- राजनीतिक समुदाय की पूर्ण और समान सदस्यता के रूप में नागरिकता में अधिकार और कर्तव्य दोनों शामिल होते हैं. आज अधिकांश लोकतांत्रिक देशों में नागरिक किन अधिकारों की अपेक्षा कर सकते हैं? राज्य और अन्य नागरिकों के प्रति उनके क्या कर्तव्य होते हैं?
उत्तर: अधिकार: मतदान का अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता का अधिकार, शिक्षा और न्याय पाने का अधिकार. कर्तव्य: संविधान का पालन करना, कानून का सम्मान करना, कर देना, मतदान करना तथा अन्य नागरिकों के अधिकारों का सम्मान करना.
- सभी नागरिकों को समान अधिकार मिल सकते हैं, लेकिन सभी उनका समान रूप से उपयोग नहीं कर पाते. स्पष्ट कीजिए.
उत्तर: गरीबी, अशिक्षा, सामाजिक भेदभाव और आर्थिक असमानता के कारण कई लोग अपने अधिकारों का पूरा लाभ नहीं उठा पाते, जबकि अधिकार सभी को समान रूप से प्राप्त होते हैं.
- भारत में हाल के वर्षों में नागरिक अधिकारों के पूर्ण उपयोग के लिए हुए किसी दो आंदोलनों पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए. प्रत्येक में कौन-से अधिकारों की मांग की गई?
उत्तर:
(क) सूचना का अधिकार (RTI) आंदोलन: सरकार से जानकारी प्राप्त करने के अधिकार की मांग की गई.
(ख) शिक्षा का अधिकार (RTE) आंदोलन: सभी बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार की मांग की गई.
- शरणार्थियों (Refugees) को किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है? वैश्विक नागरिकता (Global Citizenship) की अवधारणा उन्हें किस प्रकार लाभ पहुंचा सकती है?
उत्तर: शरणार्थियों को पहचान, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. वैश्विक नागरिकता की अवधारणा उन्हें मानवाधिकारों की रक्षा, समान अवसर और अंतरराष्ट्रीय सहयोग प्राप्त करने में सहायता कर सकती है.
- देश के भीतर विभिन्न क्षेत्रों में लोगों के प्रवास (Migration) का स्थानीय लोग अक्सर विरोध करते हैं. प्रवासी स्थानीय अर्थव्यवस्था में क्या योगदान दे सकते हैं?
उत्तर: प्रवासी श्रमशक्ति बढ़ाते हैं, उद्योगों और व्यवसायों में काम करते हैं, नए कौशल लाते हैं, उत्पादन बढ़ाते हैं तथा स्थानीय व्यापार और अर्थव्यवस्था के विकास में योगदान देते हैं.
- राष्ट्र (Nation) सामूहिक पहचान (Collective Belonging) के अन्य रूपों से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर: राष्ट्र उन लोगों का समूह है जो समान इतिहास, संस्कृति, परंपराओं और साझा राजनीतिक पहचान से जुड़े होते हैं. यह जाति, धर्म या भाषा जैसे अन्य समूहों से अधिक व्यापक और राजनीतिक रूप से संगठित होता है.
- राष्ट्रीय आत्मनिर्णय (Right to National Self-Determination) के अधिकार से आप क्या समझते हैं? इस विचार ने राष्ट्र-राज्यों के निर्माण और उनके सामने चुनौतियां कैसे उत्पन्न की हैं?
उत्तर: राष्ट्रीय आत्मनिर्णय का अर्थ है कि प्रत्येक राष्ट्र को अपनी सरकार और राजनीतिक व्यवस्था स्वयं चुनने का अधिकार हो. इससे नए राष्ट्र-राज्यों का निर्माण हुआ, लेकिन कई क्षेत्रों में अलगाववादी आंदोलनों और सीमाविवाद जैसी चुनौतियां भी पैदा हुईं.
- "राष्ट्रवाद लोगों को एकजुट भी कर सकता है और विभाजित भी, उन्हें स्वतंत्र भी कर सकता है और कटुता तथा संघर्ष भी उत्पन्न कर सकता है." उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए.
उत्तर: राष्ट्रवाद ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में लोगों को एकजुट किया. वहीं धार्मिक या जातीय राष्ट्रवाद कई देशों में संघर्ष, हिंसा और विभाजन का कारण भी बना.
- न तो वंश (Descent), न भाषा, न धर्म और न ही जातीयता (Ethnicity) दुनिया के सभी राष्ट्रवादों का समान आधार हो सकते हैं. टिप्पणी कीजिए.
उत्तर: यह कथन सही है. अलग-अलग देशों में राष्ट्रवाद के आधार अलग होते हैं. कहीं साझा इतिहास महत्वपूर्ण होता है, कहीं संविधान, लोकतांत्रिक मूल्य, संस्कृति या स्वतंत्रता का संघर्ष राष्ट्रवाद का आधार बनता है.
- राष्ट्रवादी भावना के उदय में कौन-कौन से कारक योगदान देते हैं? उपयुक्त उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए.
उत्तर: राष्ट्रवादी भावना के प्रमुख कारक हैं-
साझा इतिहास समान संस्कृति और परंपराएं स्वतंत्रता का संघर्ष साझा राजनीतिक आदर्श राष्ट्रीय प्रतीकों (ध्वज, राष्ट्रगान आदि) के प्रति सम्मान
उदाहरण: भारत का स्वतंत्रता आंदोलन, जिसमें विभिन्न धर्मों, भाषाओं और क्षेत्रों के लोग एकजुट होकर राष्ट्रीय भावना से प्रेरित हुए.
- निम्नलिखित कथनों से क्या आप सहमत हैं? प्रत्येक के समर्थन या विरोध में कारण दीजिए.
(क) धर्मनिरपेक्षता हमें धार्मिक पहचान रखने की अनुमति नहीं देती.
उत्तर: असहमत. धर्मनिरपेक्षता प्रत्येक व्यक्ति को अपनी पसंद का धर्म मानने, उसका पालन करने और उसका प्रचार करने की स्वतंत्रता देती है.
(ख) धर्मनिरपेक्षता किसी धार्मिक समूह के भीतर या विभिन्न धार्मिक समूहों के बीच असमानता का विरोध करती है.
उत्तर: सहमत. धर्मनिरपेक्षता सभी धर्मों के प्रति समान व्यवहार और समानता का समर्थन करती है तथा भेदभाव का विरोध करती है.
(ग) धर्मनिरपेक्षता की उत्पत्ति पश्चिमी ईसाई समाज से हुई है, इसलिए यह भारत के लिए उपयुक्त नहीं है.
उत्तर: असहमत. भारत की धर्मनिरपेक्षता सभी धर्मों के सम्मान और समान व्यवहार पर आधारित है. इसलिए यह भारतीय समाज की विविधता के अनुकूल है.
- निम्नलिखित में से कौन-सी बातें धर्मनिरपेक्षता की अवधारणा के अनुकूल हैं? कारण सहित उत्तर दीजिए.
- (क) एक धार्मिक समूह का दूसरे धार्मिक समूह पर प्रभुत्व न होना.
उत्तर: अनुकूल. धर्मनिरपेक्षता सभी धर्मों के साथ समान व्यवहार का समर्थन करती है.
(ख) किसी एक धर्म को राज्य धर्म घोषित करना.
उत्तर: अनुकूल नहीं. धर्मनिरपेक्ष राज्य किसी एक धर्म को विशेष दर्जा नहीं देता.
(ग) सभी धर्मों को राज्य द्वारा समान समर्थन देना.
उत्तर: अनुकूल. भारतीय धर्मनिरपेक्षता सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान की नीति अपनाती है.
(घ) विद्यालयों में अनिवार्य प्रार्थना कराना.
उत्तर: अनुकूल नहीं. अनिवार्य धार्मिक प्रार्थना धर्म की स्वतंत्रता का उल्लंघन कर सकती है.
(ङ) किसी अल्पसंख्यक समुदाय को अलग शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने की अनुमति देना.
उत्तर: अनुकूल. भारतीय संविधान अल्पसंख्यकों को अपने शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने का अधिकार देता है.
(च) सरकार द्वारा मंदिर प्रबंधन समितियों की नियुक्ति करना.
उत्तर: अनुकूल. यदि इसका उद्देश्य पारदर्शिता, सुशासन और सार्वजनिक हित सुनिश्चित करना हो, तो यह धर्मनिरपेक्षता के अनुरूप है.
GK Questions For UPSC: NCERT आधारित जनरल नॉलेज के 20 सवाल-जवाब
- धर्मनिरपेक्षता (Secularism) का अर्थ क्या है?
उत्तर: सभी धर्मों के प्रति समान व्यवहार.
- भारत में धर्मनिरपेक्षता का आधार क्या है?
उत्तर: भारतीय संविधान.
- भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को किसकी स्वतंत्रता देता है?
उत्तर: धर्म की स्वतंत्रता.
- क्या भारत का कोई राजधर्म (State Religion) है?
उत्तर: नहीं.
- भारतीय धर्मनिरपेक्षता किस सिद्धांत पर आधारित है?
उत्तर: सभी धर्मों का समान सम्मान.
- किस अनुच्छेद में धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार दिया गया है?
उत्तर: अनुच्छेद 25.
- धर्मनिरपेक्ष राज्य का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: धार्मिक समानता.
- क्या राज्य किसी एक धर्म को विशेष दर्जा देता है?
उत्तर: नहीं.
- अल्पसंख्यकों को अपने शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने का अधिकार किस अनुच्छेद में है?
उत्तर: अनुच्छेद 30.
- भारत में धर्मनिरपेक्षता का उद्देश्य क्या समाप्त करना है?
उत्तर: धार्मिक भेदभाव.
- क्या सभी धर्मों को समान संरक्षण देना धर्मनिरपेक्षता का हिस्सा है?
उत्तर: हां.
- दलितों के मंदिर प्रवेश को सुनिश्चित करने के लिए राज्य का हस्तक्षेप किस सिद्धांत का उदाहरण है?
उत्तर: सामाजिक समानता.
- धर्मनिरपेक्षता का संबंध किस मूल अधिकार से है?
उत्तर: धार्मिक स्वतंत्रता.
- क्या किसी धर्म को मानने या न मानने की स्वतंत्रता भारत में है?
उत्तर: हां.
- भारत में धर्मनिरपेक्षता किस प्रकार की है?
उत्तर: सकारात्मक धर्मनिरपेक्षता.
- भारतीय धर्मनिरपेक्षता का प्रमुख आधार क्या है?
उत्तर: समान सम्मान.
- धर्मनिरपेक्षता किस प्रकार के भेदभाव का विरोध करती है?
उत्तर: धार्मिक भेदभाव.
- क्या सरकार सामाजिक सुधार के लिए धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप कर सकती है?
उत्तर: हां.
- धर्मनिरपेक्षता लोकतंत्र के किस मूल्य को मजबूत करती है?
उत्तर: समानता.
- UPSC के अनुसार भारतीय धर्मनिरपेक्षता का मूल मंत्र क्या है?
उत्तर: सर्व धर्म समभाव.
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By शाम्भवी शिवानी
शाम्भवी शिक्षा, रोजगार, एडमिशन और सक्सेस स्टोरी पर खास नजर रखती हैं. उन्होंने प्रभात खबर के लिए कई UPSC और BPSC टॉपर्स के इंटरव्यू लिए हैं. साथ ही इस प्लेटफॉर्म के लिए AI एजुकेशन और करियर गाइडेंस पर एक्सपर्ट ओपनियन भी बनाती हैं. उनकी खासियत है कि वो डाटा रिलेटेड खबरों और फैक्ट्स को आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाती हैं. शाम्भवी को डिजिटल मीडिया में 3 सालों से अधिक का अनुभव है. प्रभात खबर से पहले वे राजस्थान पत्रिका और पटना स्थित न्यूज़ हाट में भी काम कर चुकी हैं.
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