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आईटी और मीडिया सेक्टर में काम करने वाले लोग सबसे ज्यादा तनाव में, रिपोर्ट में खुलासा, क्या है वजह

Updated at : 01 Mar 2025 11:56 AM (IST)
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Job Stress IT and Media Sectors

आईटी और मीडिया क्षेत्र में नौकरी का तनाव

Job Stress IT and Media Sectors: आज जिस तरह से आईटी सेक्टर और मीडिया इंडस्ट्री में काम का दबाव है, उसके कारण बहुत से लोग मानसिक और शारीरिक तनाव का सामना कर रहे हैं और इसका सीधा असर उनके परिवार पर भी दिखाई दे रहा है. इसके कई कारण हैं जैसे कार्यस्थल का माहौल, काम, पैसा आदि. इस लेख के माध्यम से जानिए कितने प्रतिशत लोग तनाव का सामना कर रहे हैं और किन कारणों से.

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Job Stress IT and Media Sectors: केरल राज्य युवा आयोग के एक नए सर्वेक्षण के अनुसार, मीडिया और आईटी उद्योगों में काम करने वाले युवा पेशेवर नौकरी के तनाव के चिंताजनक स्तर का अनुभव कर रहे हैं. सर्वेक्षण के अनुसार, 83.5% मीडिया पेशेवर और 84.3% आईटी कर्मचारी काम पर बहुत अधिक तनाव महसूस करते हैं. सर्वेक्षण के आंकड़ों से पता चला कि बैंकिंग और बीमा (80.6%) और गिग अर्थव्यवस्था (75.5%) में काम करने वाले कर्मचारी अन्य क्षेत्रों की तुलना में काफी अधिक तनावग्रस्त हैं, जबकि खुदरा और औद्योगिक क्षेत्रों में कर्मचारियों में तनाव का स्तर अपेक्षाकृत कम है.

18-40 वर्ष की आयु के लोग सबसे अधिक तनावग्रस्त

सर्वेक्षण में पांच क्षेत्रों के 18-40 आयु वर्ग के 1,548 कर्मचारियों के उत्तर शामिल थे, जिसमें पाया गया कि 30-39 आयु वर्ग के व्यक्ति नौकरी के तनाव के उच्चतम स्तरों का सामना करते हैं. महिलाओं ने पुरुषों (73.7%) की तुलना में थोड़ा अधिक तनाव स्तर (74.7%) की सूचना दी. एक महत्वपूर्ण बहुमत, लगभग 68.25% ने कहा कि कार्यभार के दबाव के कारण उनके कार्य-जीवन संतुलन पर असर पड़ा है.

वित्तीय असुरक्षा और कार्य-जीवन संतुलन के मुद्दे इन पेशेवरों के बीच मानसिक और शारीरिक तनाव से जुड़े हैं. सर्वेक्षण में यह भी पाया गया कि कार्यस्थल पर भेदभाव, गैर-बाइनरी कर्मचारियों के लिए एक सामान्य तनाव, भी एक कारक हो सकता है, जबकि कम वेतन और खराब लाभ पुरुष कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण तनाव हैं.

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युवाओं ने आयोग को कई उपाय सुझाए हैं

इन मुद्दों को संबोधित करने के लिए युवाओं ने आयोग को कई उपाय सुझाए हैं. इनमें कार्यस्थलों पर तनाव से राहत प्रदान करने के लिए मनोरंजक स्थान स्थापित करना, मानसिक और मनोवैज्ञानिक तनाव जैसे मुद्दों को देखने के लिए बड़ी कंपनियों के द्वारा मानसिक स्वास्थ्य अधिकारियों की नियुक्ति करना और छोटे व्यवसायों के लिए सरकार के मॉडल को लागू करना शामिल है. इसके अतिरिक्त, थेरेपी, परामर्श और मानसिक देखभाल को कवर करने के लिए मानसिक स्वास्थ्य बीमा को कर्मचारी लाभ का अनिवार्य हिस्सा बनाने का सुझाव दिया गया है.

आयोग ने रिपोर्ट में कहा कि ‘आधुनिक कार्य जगत और युवाओं का मानसिक स्वास्थ्य’ विषय पर 3 और 4 मार्च को यहां कजाककोट्टम में एक राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की जाएगी, जिसमें सर्वेक्षण के निष्कर्षों पर चर्चा की जाएगी और युवा पेशेवरों के बीच बेहतर मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने तथा सहायक कार्य वातावरण बनाने के लिए रणनीतियां तलाशी जाएंगी.

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Govind Jee

लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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