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Sarkari Naukri: झारखंड के विश्वविद्यालयों में होगी 260 शिक्षकों की नियुक्ति

Updated at : 15 Jan 2025 11:15 AM (IST)
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Sarkari Naukri in Jharkhand

Sarkari Naukri in Jharkhand: झारखंड के विश्वविद्यालयों में जल्दी ही 260 शिक्षकों की बहाली होगी. राज्य में 150 एसोसिएट प्रोफेसर और 110 प्रोफेसर के पद रिक्त हैं.

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Sarkari Naukri in Jharkhand| रांची, संजीव सिंह : झारखंड के सरकारी विश्वविद्यालय में लगभग 260 एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर के पदों पर नियुक्ति होगी. इसके लिए एक बार फिर प्रक्रिया शुरू की गयी है. उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग ने सभी सरकारी विश्वविद्यालयों को जल्द से जल्द रोस्टर क्लियर करके उच्च शिक्षा निदेशालय को भेजने का निर्देश दिया है. राज्य में लगभग 150 एसोसिएट प्रोफेसर और 110 प्रोफेसर के पद रिक्त हैं. झारखंड के विश्वविद्यालयों में 2,404 पदों पर असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति के लिए रोस्टर क्लियर कर झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (जेपीएससी) के पास नियुक्ति के लिए प्रस्ताव भेजा गया है. हालांकि, नियुक्ति प्रक्रिया रुकी हुई है.

2016 में भेजा गया था नियुक्ति का प्रस्ताव

झारखंड में एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर के पद पर सीधी नियुक्ति के लिए राज्य के विश्वविद्यालयों ने वर्ष 2016 में जेपीएससी को प्रस्ताव भेजा था. इनमें एसोसिएट प्रोफेसर के 162 पद और प्रोफेसर के 70 पद शामिल थे. एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति की प्रक्रिया 15 जनवरी 2019 को रोक दी गयी.

2021 में अंतिम बार प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति की हुई थी अनुशंसा

प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति के लिए आयोग ने अंतिम बार एक अक्टूबर 2021 को 11 विषयों में डॉ एनके बेरा, डॉ गौरी शंकर झा, डॉ जितेंद्र शुक्ला, डॉ मिथिलेश कुमार सिंह, डॉ मुदिता चंद्रा, डॉ हीरानंदन प्रसाद, डॉ आशा कुमारी, डॉ रवींद्र सिंह चौधरी, डॉ अर्चना दुबे और डॉ मंजर हुसैन के नाम की अनुशंसा की थी.

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3 प्रोफेसर की हुई नियुक्ति, तीनों रांची लौटे

डॉ जितेंद्र शुक्ला और डॉ हीरानंदन प्रसाद की नियुक्ति नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय में और आशा कुमारी की नियुक्ति कोल्हान विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के पद पर हुई थी. तीनों शिक्षक बाद में रांची विश्वविद्यालय लौट गए. कॉमर्स, अर्थशास्त्र और समाजशास्त्र विषय में उम्मीदवार ही नहीं मिले. विश्वविद्यालयों में कई शिक्षक प्रोन्नत होकर यानी प्रमोश पाकर एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर के पद पर पहुंचे हैं.

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रांची विवि पीजी में प्रोफेसर के 47 पद में 38 खाली हैं

रांची के सबसे बड़े रांची विश्वविद्यालय के पीजी विभागों में वर्तमान में प्रोफेसर के कुल 47 पद हैं. इनमें सिर्फ 9 प्रोफेसर हैं. इनमें 7 पुरुष और 2 महिला हैं. 38 पद अब भी खाली हैं. इसी प्रकार पीजी विभागों में एसोसिएट प्रोफेसर के कुल 103 पद हैं, जिनमें 52 पद पर एसोसिएट प्रोफेसर हैं. इनमें 28 पुरुष और 24 महिलाएं हैं. 51 पद अब भी खाली हैं. असिस्टेंट प्रोफेसर की बात करें, तो पीजी विभागों में कुल 118 पद हैं. इनमें 99 असिस्टेंट प्रोफेसर हैं. इनमें 52 पुरुष और 47 महिलाएं हैं. 19 पद खाली हैं. 18 पुरुष और 6 महिला असिस्टेंट प्रोफेसर कांट्रैक्ट पर काम कर रहे हैं.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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