OSM विवाद के बीच आज से री-इवैल्यूएशन शुरू, CBSE के 4 लाख छात्रों ने मांगी 11 लाख कॉपियां

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CBSE Class 12 Re Evaluation 2026: CBSE ने री-इवैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन) विंडो खोल दी है. 11 लाख से अधिक आंसर बुक्स की मांग की जा चुकी है.
CBSE Class 12 Re Evaluation 2026: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) पोस्ट रिजल्ट शुरू हुए विवाद के बीच अब बोर्ड ने री-इवैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन) विंडो खोल दी है. अब तक 4 लाख से ज्यादा छात्रों ने अपनी आंसर कॉपी की कॉपी देखने के लिए आवेदन किया है, जबकि 11 लाख से अधिक आंसर बुक्स की मांग की जा चुकी है. हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि इन छात्रों में से कितने छात्र वास्तव में री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन करेंगे. कई छात्र केवल अपनी कॉपी देखेंगे और कई री-इवैल्यूएशन की प्रक्रिया के लिए आवेदन कर सकते हैं.
शिक्षा मंत्री ने क्या कहा?
28 मई को एक अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने कहा था कि अनुमानित तौर पर करीब 20 प्रतिशत छात्र री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर सकते हैं. हालांकि, सही आंकड़ा आने वाले दिनों में ही स्पष्ट होगा.
11 लाख से ज्यादा आंसर कॉपी की मांग
- 4,04,319 छात्रों ने आंसर कॉपी देखने के लिए आवेदन किया
- 11,31,961 आंसर कॉपी की मांग की गई
- 8,98,214 आंसर कॉपी डिजिटल रूप से उपलब्ध कराई जा चुकी हैं
CBSE ने घटाई री-इवैल्यूएशन फीस
विवाद बढ़ने के बाद CBSE ने पोस्ट-रिजल्ट सेवाओं की फीस में भारी कमी की है. नई फीस स्ट्रक्चर कुछ इस प्रकार है-
- स्कैन की गई उत्तर पुस्तिका: 100 रुपये प्रति विषय
- मार्क्स वेरिफिकेशन: 100 रुपये प्रति विषय
- री-इवैल्यूएशन: प्रति प्रश्न शुल्क लागू
पहले छात्रों को काफी ज्यादा फीस देनी पड़ रही थी:
- स्कैन कॉपी: 700 रुपये
- वेरिफिकेशन: 500 रुपये
- री-इवैल्यूएशन: 100 रुपये प्रति सवाल
CBSE ने यह भी कहा है कि यदि री-इवैल्यूएशन के बाद अंक बढ़ते हैं, तो फीस वापस कर दी जाएगी.
क्या है OSM सिस्टम?
इस वर्ष CBSE ने Class 12 बोर्ड परीक्षाओं में पहली बार On-Screen Marking (OSM) सिस्टम लागू किया. इसके तहत परीक्षकों ने फिजिकल कॉपी की बजाय आसंर कॉपी की स्कैन की गई डिजिटल कॉपी चेक की.
CBSE ने कहा था कि OSM प्रक्रिया से पारदर्शिता बढ़ेगी. लेकिन रिजल्ट घोषित होने के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर छात्रों ने कम मार्क्स, बिना जांचे उत्तर, धुंधले स्कैन, अधूरी कॉपी और पोर्टल क्रैश जैसी कई शिकायतें करनी शुरू कर दीं.
विवाद तब और बढ़ गया जब छात्रों और उनके माता-पिता ने सोशल मीडिया पर स्क्रीनशॉट शेयर कर दावा किया कि कुछ उत्तर पुस्तिकाओं में कई जवाब जांचे ही नहीं गए या कॉपियां गलत तरीके से अपलोड हुईं.
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By शाम्भवी शिवानी
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