OSM विवाद के बीच आज से री-इवैल्यूएशन शुरू, CBSE के 4 लाख छात्रों ने मांगी 11 लाख कॉपियां

Published by : Shambhavi Shivani Updated At : 29 May 2026 10:56 AM

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CBSE

CBSE Class 12 Re Evaluation 2026: CBSE ने री-इवैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन) विंडो खोल दी है. 11 लाख से अधिक आंसर बुक्स की मांग की जा चुकी है.

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CBSE Class 12 Re Evaluation 2026: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) पोस्ट रिजल्ट शुरू हुए विवाद के बीच अब बोर्ड ने री-इवैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन) विंडो खोल दी है. अब तक 4 लाख से ज्यादा छात्रों ने अपनी आंसर कॉपी की कॉपी देखने के लिए आवेदन किया है, जबकि 11 लाख से अधिक आंसर बुक्स की मांग की जा चुकी है. हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि इन छात्रों में से कितने छात्र वास्तव में री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन करेंगे. कई छात्र केवल अपनी कॉपी देखेंगे और कई री-इवैल्यूएशन की प्रक्रिया के लिए आवेदन कर सकते हैं.

शिक्षा मंत्री ने क्या कहा?

28 मई को एक अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने कहा था कि अनुमानित तौर पर करीब 20 प्रतिशत छात्र री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर सकते हैं. हालांकि, सही आंकड़ा आने वाले दिनों में ही स्पष्ट होगा.

11 लाख से ज्यादा आंसर कॉपी की मांग

  • 4,04,319 छात्रों ने आंसर कॉपी देखने के लिए आवेदन किया
  • 11,31,961 आंसर कॉपी की मांग की गई
  • 8,98,214 आंसर कॉपी डिजिटल रूप से उपलब्ध कराई जा चुकी हैं

CBSE ने घटाई री-इवैल्यूएशन फीस

विवाद बढ़ने के बाद CBSE ने पोस्ट-रिजल्ट सेवाओं की फीस में भारी कमी की है. नई फीस स्ट्रक्चर कुछ इस प्रकार है-

  • स्कैन की गई उत्तर पुस्तिका: 100 रुपये प्रति विषय
  • मार्क्स वेरिफिकेशन: 100 रुपये प्रति विषय
  • री-इवैल्यूएशन: प्रति प्रश्न शुल्क लागू

पहले छात्रों को काफी ज्यादा फीस देनी पड़ रही थी:

  • स्कैन कॉपी: 700 रुपये
  • वेरिफिकेशन: 500 रुपये
  • री-इवैल्यूएशन: 100 रुपये प्रति सवाल

CBSE ने यह भी कहा है कि यदि री-इवैल्यूएशन के बाद अंक बढ़ते हैं, तो फीस वापस कर दी जाएगी.

क्या है OSM सिस्टम?

इस वर्ष CBSE ने Class 12 बोर्ड परीक्षाओं में पहली बार On-Screen Marking (OSM) सिस्टम लागू किया. इसके तहत परीक्षकों ने फिजिकल कॉपी की बजाय आसंर कॉपी की स्कैन की गई डिजिटल कॉपी चेक की.

CBSE ने कहा था कि OSM प्रक्रिया से पारदर्शिता बढ़ेगी. लेकिन रिजल्ट घोषित होने के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर छात्रों ने कम मार्क्स, बिना जांचे उत्तर, धुंधले स्कैन, अधूरी कॉपी और पोर्टल क्रैश जैसी कई शिकायतें करनी शुरू कर दीं.

विवाद तब और बढ़ गया जब छात्रों और उनके माता-पिता ने सोशल मीडिया पर स्क्रीनशॉट शेयर कर दावा किया कि कुछ उत्तर पुस्तिकाओं में कई जवाब जांचे ही नहीं गए या कॉपियां गलत तरीके से अपलोड हुईं.

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Shambhavi Shivani

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By Shambhavi Shivani

शाम्भवी शिवानी डिजिटल मीडिया में पिछले 3 सालों से सक्रिय हैं और वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ एजुकेशन बीट पर काम कर रही हैं. शिक्षा और रोजगार से जुड़ी खबरों की समझ रखने वाली शाम्भवी एग्जाम, सरकारी नौकरी, रिजल्ट, करियर, एडमिशन और सक्सेस स्टोरी जैसे विषयों पर रिपोर्टिंग और फीचर राइटिंग करती हैं. सरल भाषा और जानकारी को व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की खासियत है. डिजिटल मीडिया में अपने करियर के दौरान शाम्भवी ने न्यूज़ हाट और राजस्थान पत्रिका जैसी संस्थाओं के साथ काम किया है. यहां उन्होंने एजुकेशन, युवा मुद्दों और ट्रेंडिंग विषयों पर कंटेंट तैयार किया. वर्तमान में प्रभात खबर के साथ जुड़कर वे खास तौर पर बोर्ड परीक्षा, प्रतियोगी परीक्षा, सरकारी नौकरी, करियर ऑप्शंस और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज पर काम कर रही हैं. शाम्भवी की रुचि सिर्फ पत्रकारिता तक सीमित नहीं है. उन्हें सिनेमा और साहित्य में भी गहरी दिलचस्पी है, जिसका असर उनकी लेखन शैली में भी देखने को मिलता है. वे तथ्यों के साथ भावनात्मक जुड़ाव और मानवीय पहलुओं को भी अपनी स्टोरीज में जगह देने की कोशिश करती हैं. पटना में जन्मीं शाम्भवी ने Patna University से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है. इसके बाद Indira Gandhi National Open University (IGNOU) से पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की. पत्रकारिता और जनसंचार की पढ़ाई ने उन्हें न्यूज राइटिंग, डिजिटल कंटेंट और ऑडियंस बिहेवियर की बेहतर समझ दी है. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लगातार बदलते ट्रेंड्स और रीडर्स की जरूरतों को समझते हुए शाम्भवी SEO-फ्रेंडली, इंफॉर्मेटिव और एंगेजिंग कंटेंट तैयार करने पर फोकस करती हैं. उनकी कोशिश रहती है कि पाठकों तक सही, उपयोगी और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाई जा सके.

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