डीसी साहब! कब सुधरेगी जमुनिया नदी की हालत, धनबाद की जनता आपसे पूछ रही है सवाल


Dhanbad News: धनबाद जिले की लाइफलाइन मानी जाने वाली जमुनिया नदी अवैध कोल माइनिंग के कारण गंभीर संकट में है. तोपचांची फॉरेस्ट एरिया के माटीगढ़ा से केशरगढ़ के बीच नदी की धारा रोककर खुलेआम अवैध माइनिंग की जा रही है. फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने इस पूरे मामले की शिकायत डीसी आदित्य रंजन और कोल मिनिस्ट्री से की है. लाखों लोगों की जरूरतें पूरी करने वाली जमुनिया नदी पर अब बड़ा खतरा मंडरा रहा है. पूरी खबर नीचे पढ़ें.
Dhanbad News: झारखंड के धनबाद जिले की लाइफलाइन मानी जाने वाली जमुनिया नदी आज खुद अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है. तोपचांची फॉरेस्ट एरिया में बाघमारा सर्किल के माटीगढ़ा से केशरगढ़ के बीच जमुनिया नदी और उसके आसपास के फॉरेस्ट लैंड और गैरमजरुआ जमीन पर धड़ल्ले से अवैध तरीके से कोल माइनिंग की जा रही है. इस गंभीर स्थिति को लेकर डिवीजनल फॉरेस्ट ऑफिसर विकास पालीवाल ने धनबाद डिप्टी कमिश्नर (डीसी) आदित्य रंजन को चिट्ठी लिखकर पूरे मामले की जानकारी दी है.
नदी से की जा रही अवैध माइनिंग
फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की रिपोर्ट के मुताबिक, माटीगढ़ा से केशरगढ़ तक जमुनिया नदी की धारा को रोककर बीच नदी में ही कोल की अवैध माइनिंग और निकासी की जा रही है. इससे नदी का नेचुरल फ्लो बाधित हो रहा है. माटीगढ़ा एरिया के फॉरेस्ट लैंड के नीचे गुफाएं बनाकर कोल निकाला जा रहा है. इससे भू-धंसान और बड़े हादसे की का डर बना हुआ है.
कोल मिनिस्ट्री तक शिकायत, सेंटर की टीम करेगी इंस्पेक्शन
अवैध माइनिंग की शिकायत कोल मिनिस्ट्री तक भी पहुंच चुकी है. जानकारी के अनुसार, 26 और 27 जनवरी को कोल मिनिस्ट्री की एक टीम जमुनिया नदी और अवैध माइनिंग प्लेसेज का इंस्पेक्शन करने पहुंच सकती है. इसकी इन्फॉर्मेशन ब्लॉक-दो मैनेजमेंट को भी दे दी गई है. हाई लेवल पर शिकायत के बाद अब एडमिनिस्ट्रेशन की जिम्मेदारी और बढ़ गई है.
लाखों लोगों की जरूरतें पूरी करती है जमुनिया नदी
करीब 22 किलोमीटर लंबी जमुनिया नदी दोनों किनारों पर बसे इलाकों की लाइफलाइन है. नदी पर एक दर्जन से अधिक सरकारी इंटेकवेल निर्भर हैं. गैर-सरकारी रूप से लाखों लोग रोजमर्रा की जरूरतों के लिए इसी नदी के पानी का इस्तेमाल करते हैं. माटीगढ़ा के पास बीसीसीएल की ओर से बनाए गए डैम से ब्लॉक-दो और बरोरा की कॉलोनियों के साथ-साथ आसपास के गांवों को पानी की सप्लाई होती है.
नदी किनारे एक किलोमीटर में 100 से ज्यादा अवैध माइंस
फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के अनुसार, जमुनिया नदी के दोनों किनारों पर एक किलोमीटर के दायरे में 100 से अधिक अवैध माइंस ऑपरेट की जा रही हैं. अवैध कारोबार बड़े पैमाने पर फैल चुका है. खनन माफिया के पास एडवांस्ड मशीनें और पंप मौजूद हैं, जिनसे नदी के अंदर और नीचे तक कोल निकाला जा रहा है.
कार्रवाई के बाद भी नहीं रुक रहा अवैध कारोबार
दिसंबर महीने में फॉरेस्ट डिपार्टमेंट, बीसीसीएल और लोकल थाना के ज्वाइंट एक्शन में कोल और पंप जब्त किए गए थे. अवैध तरीके से बनाए गए मुहानों को भी भरवाया गया था, लेकिन इस एक्शन के कुछ दिनों बाद ही माइन्स माफिया फिर से मुहानों को खोदकर कोयला निकालने लगे. उन पर कार्रवाई का परमानेंट असर नहीं दिख रहा है.
डीसी आदित्य रंजन से पूछे गए सवाल और उसका जवाब
- सवाल: फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की चिट्ठी मिलने के बाद क्या कार्रवाई हुई?
- जवाब: चिट्ठी मिलते ही संबंधित जगह पर अवैध माइनिंग बंद कराई गई. फिलहाल वहां माइनिंग पूरी तरह बंद है.
- सवाल: अवैध माइनिंग चिंता का विषय है, आगे क्या होगा?
- जवाब: अवैध कोल माइनिंग किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगा. पुलिस और दूसरी एजेंसियों के साथ मिलकर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी.
- सवाल: पर्यावरण नुकसान की भरपाई कैसे होगी?
- जवाब: जमुनिया नदी समेत सभी नदियों के नेचुरल फ्लो को सुरक्षित रखना एडमिनिस्ट्रेशन की प्रायोरिटी है.
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अब जनता की निगाहें एडमिनिस्ट्रेशन पर
जमुनिया नदी को बचाने की लड़ाई अब सिर्फ डिपार्टमेंटल लेटरबाजी तक सीमित नहीं रह सकती. सवाल साफ है कि क्या एडमिनिस्ट्रेशन परमानेंट सॉल्यूशन निकाल पाएगा या फिर जमुनिया यूं ही अवैध माइनिंग की भेंट चढ़ती रहेगी? धनबाद की जनता अब ठोस कार्रवाई की उम्मीद कर रही है.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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