धनबाद SNMMCH में तीन घंटे तक नहीं पहुंची एंबुलेंस, बुजुर्ग मरीज ने तोड़ा दम

Updated at : 17 May 2023 8:23 AM (IST)
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धनबाद SNMMCH में तीन घंटे तक नहीं पहुंची एंबुलेंस, बुजुर्ग मरीज ने तोड़ा दम

शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसएनएमएमसीएच) में ब्रेन हेमरेज से पीड़ित एक बुजुर्ग की मौत हो गयी. फोन करने के बाद भी लगभग तीन घंटे तक एंबुलेंस नहीं आयी.

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धनबाद समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने से मंगलवार को शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसएनएमएमसीएच) में ब्रेन हेमरेज से पीड़ित एक बुजुर्ग की मौत हो गयी. फोन करने के बाद भी लगभग तीन घंटे तक एंबुलेंस नहीं आयी. जानकारी के अनुसार मनईटांड़ निवासी केशर साव (73) को ब्रेन हेमरेज के बाद मंगलवार की सुबह पांच बजे एसएनएमएमसीएच में भर्ती कराया गया था. जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें रिम्स रांची रेफर कर दिया. इसके बाद परिजनों ने 108 एंबुलेंस से संपर्क किया और मरीज की गंभीर स्थिति की जानकारी दी. बाद में मृतक के परिजनों ने ससमय एंबुलेंस नहीं पहुंचने की शिकायत सिविल सर्जन डॉ आलोक विश्वकर्मा से की. सीएस ने 108 एंबुलेंस संचालक एजेंसी को शोकॉज किया है.

दो घंटे में लगा फोन

परिजनों ने बताया कि मंगलवार सुबह पांच बजे केशर साव को रिम्स रेफर किये जाने के बाद 108 एंबुलेंस से संपर्क करना शुरू किया. सुबह लगभग सात बजे 108 एंबुलेंस के टोल फ्री नंबर पर संपर्क हुआ. सुबह 10 बजे तक परिजन एंबुलेंस का इंतजार करते रहे, लेकिन नहीं पहुंची. करीब 10.10 बजे केशर साव की मौत हो गई.

जिले में संचालित हैं 28 एंबुलेंस

बता दें कि जिले में 108 एंबुलेंस की कुल संख्या 28 है. जिकितजा हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी इसे संचालित करती है. 24 एंबुलेंस में बेसिक लाइफ सपोर्ट यानी ऑक्सीजन, मॉनिटर, पल्स मीटर आदि की व्यवस्था है. चार एंबुलेंस एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) से लैस हैं. गाड़ियों में डीएलएस की सारी सुविधा के साथ वेंटिलेटर समेत कई अन्य चिकित्सा उपकरण लगे हुए हैं. हर गाड़ी पर दो ड्राइवर और दो इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (ईएमटी) अपनी सेवा देते हैं.

कॉल बुक होने के आधे घंटे में मरीज तक पहुंचनी है सेवा

108 एंबुलेंस के लिए कॉल बुक होने के आधे घंटे के अंदर मरीजों तक सेवा उपलब्ध होना जरूरी है. मरीज के परिजनों द्वारा 108 के टॉल फ्री नंबर पर कॉल करते ही लोकेशन के आस-पास स्थित एंबुलेंस को मैसेज भेजा जाता है. ऑपरेटर द्वारा एंबुलेंस चालक को मरीज की सारी जानकारी उपलब्ध करायी जाती है. जिसके बाद एंबुलेंस चालक उक्त अस्पताल अथवा दर्ज कराए गए पते वाले स्थान में पहुंच मरीज को हायर सेंटर लेकर जाते है.

लापरवाही सामने आयी, तो होगी कार्रवाई : सीएस

सिविल सर्जन डॉ आलोक विश्वकर्मा ने कहा कि मामला गंभीर है. समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने की पूरी जांच करायी जाएगी. फिलहाल एजेंसी को शोकॉज किया गया है. एजेंसी ने मरीज के लिए जिस एंबुलेंस को नियुक्त किया था, उसका जीपीएस ट्रैक किया जाएगा. लापरवाही सामने आने पर एजेंसी व एंबुलेंस चालक पर कार्रवाई की जाएगी.

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