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RKDF यूनिवर्सिटी रांची में संगोष्ठी : पर्यावरण और समाज से संबंधित समाजिक विज्ञान और मानविकी पर हुई चर्चा

Updated at : 27 Nov 2021 5:52 PM (IST)
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RKDF यूनिवर्सिटी रांची में संगोष्ठी : पर्यावरण और समाज से संबंधित समाजिक विज्ञान और मानविकी  पर हुई चर्चा

आरके डीएफ विश्वविद्यालय रांची में पांच दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है. कला एवं मानविकी संकाय की ओर से सम्पन्न हुई परिचर्चा का विषय था "पर्यावरण और समाज से संबंधित समाजिक विज्ञान और मानविकी" पूरी खबर आगे पढ़ें.

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आरकेडीएफ विश्वविद्यालय की संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में आरकेडीएफ विश्वविद्यालय भोपाल के प्रबंधन निदेशक डॉ बी एन सिंह उपस्थित हुए. उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और मानव जीवन को एक दूसरे का पूरक बताया. आरके डीएफ विश्वविद्यालय रांची के कुलपति डा एस चटर्जी ने कहा स्वयं को सुविधा संपन्न करने के लिए पर्यावरण को हम सभी विपन्न कर रहे हैं यह प्रकृति के लिए और मानव समुदाय के लिए घातक सिद्ध हो रहा है. कुलसचिव डॉ अमित कुमार पांडे ने कहा कि प्रकृति और पर्यावरण हमारी धरोहर है इनका संरक्षण हम सबका कर्तव्य है.

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इस संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में रांची विश्वविद्यालय रांची के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ जंग बहादुर पांडे ने अपने वक्तव्य में कहा कि पर्यावरण हमारे चहूं ओर आच्छादित है इससे सम्पूर्ण जीव और जगत जुड़ा है. इसके संरक्षण में ही मानव जीवन का संरक्षण है.

मुख्य वक्ता केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के अंग्रेजी विभाग के संकायाध्यक्ष डॉ बीपी सिन्हा ने अपने वक्तव्य में कहा कि प्रकृति और पर्यावरण से जुड़ने का मतलब है अपनी सभ्यता और संस्कृति से जुड़ना तभी हमारा वजूद कायम रह सकता है. संत जेवियर महाविद्यालय रांची में स्नातकोत्तर भूगोल विभाग सहायक प्राध्यापक डॉ राजीव रंजन श्रीवास्तव ने अपने वक्तव्य में कहा कि मनुष्य जन्म से लेकर अंतिम क्षण तक प्रकृति समाज और साहित्य से जुड़ा रहता है.

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अमेठी विश्वविद्यालय झारखंड के डॉ अमरीश गौतम ने अपने वक्तव्य में कहा कि मानव जीवन ईश्वर का दिया हुआ वरदान है. प्रकृति और पर्यावरण से जुड़कर ही हम सब की पहचान है. रांची विश्वविद्यालय रांची में स्नातकोत्तर विभाग राजनीति विज्ञान प्राध्यापक डॉ जेपी खरे ने अपने वक्तव्य में कहा कि मनुष्य आदि काल से ही प्रकृति के निकट रहा है उनकी रक्षा करता आया है और वर्तमान में भी हमें उन्ही विचारों को अपनाना चाहिए. जिसे हमारे पूर्वजों ने अपनाया था.

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इस संगोष्ठी में शामिल होने के लिए विभिन्न राज्यों के शोधार्थी उपस्थित हुए जिसमें बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, लखनऊ, झारखंड आदि से थे. इस संगोष्ठी में 50 शोध आलेख प्रस्तुत किया गया. मंच संचालन का कार्य हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ ललिता कुमारी ने किया. इस अवसर पर आरकेडीएफ विश्वविद्यालय की शैक्षणिक निर्देशिका डॉ अनिता कुमारी, परीक्षा नियंत्रक डॉ कुमकुम ख्वास, कला एवं मानविकी संकाय अध्यक्ष डॉ शीतल टोप्पनो, समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ निभा रानी पांडे, राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ रेणुका पोद्दार, अभियांत्रिकी संकाय अध्यक्ष डॉ राजीव रंजन, प्रबंधन संकाय अध्यक्ष डॉक्टर सोमनाथ रॉय, जैव प्रौद्योगिकी संकाय अध्यक्ष डॉक्टर स्नेहा पांडे, सराय में प्रबंधन निदेशक पंकज चटर्जी, विश्वविद्यालय के सभी प्राध्यापक, प्राध्यापिका वृंद एवं समस्त सहकर्मी इस संगोष्ठी में मौजूद हुए.

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