लाल पानी से त्रस्त सारंडा के आधा दर्जन गांव के लोगों का टाटा स्टील लांग प्रोडक्ट के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का एलान
Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 02 Sep 2020 6:41 PM
सारंडा स्थित टाटा स्टील लांग प्रोडक्ट लिमिटेड की विजय-दो लौह अयस्क खदान से बहकर आने वाली मिट्टी-मुरुम और फाइंस से तितलीघाट, जोजोगुटु, राजाबेड़ा, जामकुंडिया समेत कई गांवों के खेत, कोयना नदी, प्राकृतिक जलस्रोत एवं नालों को भारी नुकसान हुआ है. इससे ग्रामीणों में आक्रोश है.
किरीबुरु (शैलेश सिंह) : सारंडा स्थित टाटा स्टील लांग प्रोडक्ट लिमिटेड की विजय-दो लौह अयस्क खदान से बहकर आने वाली मिट्टी-मुरुम और फाइंस से तितलीघाट, जोजोगुटु, राजाबेड़ा, जामकुंडिया समेत कई गांवों के खेत, कोयना नदी, प्राकृतिक जलस्रोत एवं नालों को भारी नुकसान हुआ है. इससे ग्रामीणों में आक्रोश है.
बुधवार (2 सितंबर, 2020) को तितलीघाट के मुंडा मनचुड़िया सिधु, मानकी लागुड़ा देवगम, राजाबेड़ा के मुंडा जामदेव चाम्पिया, जोजोगुटु के मुंडा कानूराम देवगम, बहदा के मुंडा रोया सिधु व अन्य के नेतृत्व में उक्त गांवों के लोगों ने खदान से प्रभावित नदी-नालों एवं खेतों का जायजा लेने के बाद खदान प्रबंधन से आर-पार की लड़ाई का एलान कर दिया.
तितलीघाट के मुंडा मनचुड़िया सिधु ने कहा कि विजय-दो खदान की मिट्टी-मुरुम व फाइंस बहकर दुआरगुई नाला होते हुए हमारे खेतों को बंजर बना रहा है. फसलों को बर्बाद कर रहा है. इतना ही नहीं, कोयना नदी को भी भारी नुकसान पहुंचा रहा है. नदी-नालों में फाइंस भरने की वजह से अब वर्षा के पानी के तेज बहाव से हमारे खेतों का कटाव हो रहा है.

उन्होंने कहा कि उक्त खदान से सबसे ज्यादा प्रभावित हमारा गांव है. लेकिन, कंपनी हमारे गांव में सीएसआर के तहत किसी प्रकार की कोई विकास योजना नहीं चला रही. गांव के बेरोजगारों को खदान में काम नहीं दिया जा रहा है. पूर्व में उक्त खदान के प्रबंधन ने गांव के एक दर्जन से अधिक युवकों पर फर्जी केस करके उन्हें काम से हटा दिया.
Also Read: Unlock 4: पोस्ट ऑफिस में फिर बनने लगे आधार कार्ड और पासपोर्ट, झारखंड में कहां-कहां है सुविधा, देखें पूरी लिस्टमुंडा ने मांग की कि गांव में पेयजल, शिक्षा, चिकित्सा आदि की सुविधाएं कंपनी उपलब्ध कराये. साथ ही तथा खदान की मिट्टी-मुरुम को रोकने के लिए जल्द से जल्द चेकडैम का निर्माण कराये. इतना ही नहीं, नालों में भरी फाइंस को हटाकर उसे पहले जैसा गहरा करे. उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन ने खदान से प्रभावित गांवों में डीएमएफटी फंड से विकास का कोई काम नहीं कर रहा.
इस बैठक में वार्ड सदस्य मुगा चाम्पिया, मोसो बुरमा, लेबेया सिधु, राजेश सांडिल, वीर सिंह हंसदा, गोनो चाम्पिया, टीशु चाम्पिया, कोल्यान चाम्पिया, मोहन सुरीन, मंगल हुरद, अनिल सुरीन, बेहरा सुरीन, मधु सिधु, शंकर सोरेन, मंगल सिधु, दुल्गु चाम्पिया समेत सैकड़ों ग्रामीण मौजूद थे.

ग्रामीणों के आरोप पर टाटा स्टील लांग प्रोडक्ट लिमिटेड के महाप्रबंधक नवीन श्रीवास्तव ने ‘प्रभात खबर’ को बताया कि अत्यधिक वर्षा होने की वजह से ऐसी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है. इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए हम खदान क्षेत्र में नया रिटर्निंग वाल बना रहे हैं. कंक्रीट की इस दीवार की लंबाई लगभग डेढ़ सौ मीटर होगी.
Also Read: Health News: नयी चिकित्सा पद्धति से एक दिन में कालाजार का इलाज, झारखंड के इन 4 जिलों में शुरू हुआ कालाजार उन्मूलन अभियानउन्होंने यह भी कहा कि वह अपनी एक टीम तितलीघाट क्षेत्र में जांच के लिए भेजेंगे. जहां भी कुछ कराने की आवश्यकता होगी, वह इस बहाव को रोकने के लिए करेंगे. उन्होंने कहा कि भारी वर्षा पर किसी का इख्तियार नहीं है. बारिश का पानी बहकर जायेगा ही. इसे पूरी तरह से रोक पाना संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि वर्षा की वजह से थोड़ी समस्या उत्पन्न हो जाती है. हम इसके स्थायी समाधान की दिशा में प्रयास कर रहे हैं.
Posted By : Mithilesh Jha
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