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ट्रंप परिवार का क्या है पाकिस्तान कनेक्शन, जो राष्ट्रपति ने भारत के साथ तोड़ा संबंध?

Updated at : 05 Sep 2025 5:48 PM (IST)
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Tump Family Pakistan Connection

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

Trump Family Pakistan Connection: डोनाल्ड ट्रंप परिवार के पाकिस्तान कनेक्शन ने भारत-अमेरिका रिश्तों को गहरे संकट में डाल दिया है. राष्ट्रपति रहते हुए ट्रंप ने भारत पर भारी टैरिफ लगाकर रणनीतिक साझेदारी कमजोर कर दी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप परिवार के पाकिस्तान में ब्लॉकचेन, तेल और रियल एस्टेट निवेश जुड़े हैं. जेंट्री बीच जैसे सहयोगियों ने पाकिस्तान की वैश्विक छवि सुधारने में भी भूमिका निभाई. विशेषज्ञ मानते हैं कि निजी कारोबारी हितों से प्रेरित यह नीति भारत के लिए बड़ा रणनीतिक खतरा है.

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Trump Family Pakistan Connection: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी राजनीति की ऐसी शख्सियत हैं, जिनके फैसले हमेशा से अप्रत्याशित और विवादों से भरे रहे हैं. राष्ट्रपति रहते हुए उन्होंने कई बार ऐसे कदम उठाए हैं, जिन्हें देखकर न केवल अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया चौंक गई. भारत-अमेरिका संबंध भी उनके इसी अंदाज का शिकार हो गए. दो दशकों से अधिक की मेहनत के बाद जो रिश्ते एक नई ऊंचाई पर पहुंचने वाले थे, उन्हें ट्रंप ने अचानक अपने टैरिफ वॉर से ध्वस्त कर दिया. यह बात दीगर है कि उन्होंने भारत पर भारी टैरिफ लादकर गहरे संबंधों को मटियामेट कर दिया, लेकिन असली सवाल यह है कि आखिर ट्रंप ने ऐसा क्यों किया? क्या यह सिर्फ आर्थिक नीतियों का हिस्सा था या इसके पीछे पाकिस्तान से उनके परिवार के गहरे व्यावसायिक संबंध छिपे हैं? यही रहस्य इस पूरे विवाद का केंद्र है.

भारत-अमेरिका रिश्तों की लंबी यात्रा

अंग्रेजी की वेबसाइट फर्स्ट पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच रिश्तों को बेहतर बनाने की प्रक्रिया अचानक शुरू नहीं हुई थी. यह एक लंबा और लगातार चलने वाला प्रयास था, जिसमें कई सरकारों का योगदान रहा. जॉर्ज डब्ल्यू बुश के समय में हुई न्यूक्लियर डील ने भारत-अमेरिका रिश्तों को नई दिशा दी. बराक ओबामा ने इस रिश्ते को “नेचुरल पार्टनरशिप” तक पहुंचाया. डोनाल्ड ट्रंप के शुरुआती दिनों में भी रक्षा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को लेकर सकारात्मक संकेत दिखाई दिए. लेकिन, जैसे ही ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 50% तक का टैरिफ लगाने का फैसला किया, सारी मेहनत खतरे में पड़ गई. भारत जो अमेरिका को एक स्थिर और भरोसेमंद सहयोगी मान रहा था, अचानक खुद को असमंजस में पाता है. यह कदम न केवल आर्थिक दृष्टि से गलत था बल्कि रणनीतिक रूप से भी खतरनाक साबित हुआ.

टैरिफ वॉर से ट्रंप ने एक झटके में तोड़ा संबंध

रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी उद्योग को भारतीय आयातों से नुकसान हो रहा है और इसीलिए इतने भारी शुल्क लगाए जा रहे हैं. लेकिन अमेरिका के भीतर ही इस कदम को लेकर व्यापक असहमति बनी हुई है और लोग इसकी कड़े स्वर में आलोचना भी कर रहे हैं. खुद राष्ट्रपति ट्रंप के दोस्त एलन मस्क का संबंध उनसे टूट गया. कई डेमोक्रेट नेताओं ने कहा कि यह टैरिफ अंततः अमेरिकियों को ही नुकसान पहुंचाएगा. उपभोक्ताओं को महंगे उत्पाद खरीदने पड़ेंगे और दोनों देशों के बीच भरोसा टूटेगा.

ट्रंप के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने तो इसे “विनाशकारी फैसला” बताया. उनका कहना था कि पश्चिमी देशों ने दशकों की मेहनत से भारत के साथ मजबूत साझेदारी बनाई थी, जिसे ट्रंप ने एक झटके में नष्ट कर दिया. यही चिंता बाद में बाइडेन प्रशासन में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे जेक सुलिवन ने भी जताई.

ट्रंप की विदेश नीति पर पारिवारिक कारोबार हावी

जेक सुलिवन ने द बुलवार्क पॉडकास्ट पर साफ कहा कि भारत पर ट्रंप के भारी टैरिफ़ बेहद चिंताजनक हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि इससे भारत को अमेरिका के बजाय चीन के करीब जाने का बहाना मिल सकता है. सुलिवन ने कहा कि अमेरिका का लक्ष्य हमेशा से यह रहा है कि भारत को अपनी ओर रखकर चीन के प्रभाव का संतुलन बनाया जाए. लेकिन ट्रंप की नीतियाँ इस संतुलन को बिगाड़ रही हैं. सबसे बड़ा आरोप उन्होंने यह लगाया कि पाकिस्तान की ट्रंप परिवार के साथ व्यावसायिक सौदे करने की इच्छा के कारण ही ट्रंप ने भारत को दरकिनार किया. यह बयान सीधा उस बिंदु की ओर इशारा करता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति की विदेश नीति उनके निजी कारोबार से प्रभावित हो रही है.

पाकिस्तान में ब्लॉकचेन कारोबार

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस पूरे विवाद की जड़ में पाकिस्तान के साथ ट्रंप परिवार का एक बड़ा व्यावसायिक सौदा है. अप्रैल में जब भारत में पहलगाम आतंकी हमला हुआ और 26 पर्यटक मारे गए, उसी समय पाकिस्तान ने ब्लॉकचेन तकनीक को बढ़ावा देने के लिए वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल नामक कंपनी के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। रिपोर्टों के अनुसार, इस कंपनी में 60% हिस्सेदारी ट्रंप परिवार की है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असीम मुनीर से मुलाकात के बाद इस समझौते को औपचारिक रूप दिया गया. समझौते में ब्लॉकचेन इनोवेशन, स्टेबलकॉइन अपनाने और विकेंद्रीकृत वित्तीय ढांचे को पाकिस्तान में तेजी से लागू करने की बात कही गई है.

यहीं नहीं, इस कंपनी ने डोनाल्ड ट्रंप को “चीफ क्रिप्टो एडवोकेट” घोषित किया. उनके बेटे एरिक और डोनाल्ड जूनियर को “वेब3 एम्बेसडर” की भूमिका दी गई, जबकि बैरन ट्रंप को “डेफी विजनरी” बताया गया. ऐसे खिताब साफ संकेत देते हैं कि ट्रंप परिवार इस कारोबारी सौदे को अपनी निजी ब्रांडिंग और राजनीतिक ताकत से जोड़ रहा है.

बिकाऊ है ट्रंप की विदेश नीति और न्याय

ट्रंप के इस सौदे ने न केवल नैतिकता बल्कि अमेरिकी विदेश नीति की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए. उपभोक्ता अधिकार समूह पब्लिक सिटीजन के प्रमुख रॉबर्ट वीसमैन ने कहा कि यह स्थिति दिखाती है कि “विदेश नीति और न्याय दोनों ही बिकाऊ हैं.” हालांकि, व्हाइट हाउस की ओर से उप प्रेस सचिव एना केली ने सफाई दी कि राष्ट्रपति की संपत्ति उनके बच्चों द्वारा प्रबंधित एक ट्रस्ट में है और इसमें किसी भी तरह का हितों का टकराव नहीं है. लेकिन, आलोचक इस तर्क को मानने को तैयार नहीं हैं. उनके अनुसार, जब किसी देश के साथ राष्ट्रपति के परिवार का सीधा व्यापारिक संबंध होगा, तो विदेश नीति स्वतः प्रभावित होगी.

जेंट्री बीच और पाकिस्तान निवेश

पाकिस्तान में ट्रंप परिवार के संबंध सिर्फ ब्लॉकचेन तक सीमित नहीं हैं. अमेरिका के प्रसिद्ध व्यवसायी जेंट्री थॉमस बीच पाकिस्तान में अरबों डॉलर के निवेश की घोषणा कर चुके हैं. जेंट्री थॉमस बीच ट्रंप जूनियर के पुराने मित्र और कारोबारी साझेदार हैं. बीच ने जनवरी में इस्लामाबाद की यात्रा की, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सहित कई बड़े नेताओं से मुलाकात की. इसके बाद उन्होंने अपनी कंपनी व्हाइट ब्रिज रियल एस्टेट के माध्यम से पाकिस्तान में निवेश करने का एलान किया. इतना ही नहीं, व्हाइट ब्रिज और एपेक्स एनर्जी ने सिंधु नदी के पास सोने के भंडार की खोज के लिए भी करार किया. इस तरह पाकिस्तान को विदेशी निवेश और राजनीतिक समर्थन दोनों का फायदा मिलने लगा.

पाकिस्तान की छवि सुधारने की कोशिश

जेंट्री बीच ने मार-ए-लागो में आयोजित एक कार्यक्रम में पाकिस्तान की खुलकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को दुनिया ने हमेशा गलत समझा है. उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में पाकिस्तान की भूमिका को सराहा और उसके नेताओं को “दुनिया के सबसे बेहतरीन लोगों” में से एक बताया. यह बयान ऐसे समय में आया, जब भारत लगातार पाकिस्तान को आतंकवाद के लिए जिम्मेदार ठहराता रहा है. स्पष्ट है कि ट्रंप परिवार के करीबी कारोबारी न केवल पाकिस्तान में निवेश कर रहे हैं, बल्कि उसकी वैश्विक छवि सुधारने के लिए भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं.

तेल भंडार पर समझौता

रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर यह घोषणा करके सभी को चौंका दिया कि अमेरिका और पाकिस्तान ने तेल भंडार विकसित करने के लिए समझौता किया है. यह कदम भारत के लिए सीधी चुनौती जैसा था. ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग भारत-अमेरिका रिश्तों का अहम हिस्सा रहा है, लेकिन पाकिस्तान के साथ ऐसे समझौते भारत को रणनीतिक रूप से कमजोर कर सकते हैं.

भारत के लिए रणनीतिक खतरा

फर्स्ट पोस्ट ने लिखा है कि भारत की विदेश नीति लंबे समय से इस विचार पर आधारित रही है कि अमेरिका उसका सबसे बड़ा रणनीतिक सहयोगी है. चीन की बढ़ती ताकत का मुकाबला करने के लिए भारत ने अमेरिका पर भरोसा किया. लेकिन, अगर अमेरिकी राष्ट्रपति के निजी कारोबारी हित पाकिस्तान के पक्ष में झुकते हैं, तो यह भारत के लिए सीधा खतरा बन सकता है. यही कारण है कि जेक सुलिवन और अन्य विशेषज्ञ इसे अमेरिका के “सबसे बड़ी रणनीतिक भूल” बता रहे हैं.

विशेषज्ञों की आलोचना

पूर्व विदेश मंत्री जॉन केरी ने कहा कि महान राष्ट्र अल्टीमेटम और धमकियों से नहीं बल्कि कूटनीति से महान बनते हैं. विदेश नीति विशेषज्ञ क्रिस्टोफर पैडिला ने चेतावनी दी कि ट्रंप के टैरिफ़ से अमेरिका की वैश्विक विश्वसनीयता को गहरी चोट पहुँचेगी. वहीं, शीर्ष अर्थशास्त्री जेफरी सैक्स ने भारत पर लगाए गए दंडात्मक शुल्क को अमेरिकी विदेश नीति का “सबसे मूर्खतापूर्ण कदम” बताया.

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भारत-अमेरिका रिश्तों पर लंबी छाया

डोनाल्ड ट्रंप का पाकिस्तान कनेक्शन सिर्फ एक कारोबारी सौदा नहीं बल्कि अमेरिकी विदेश नीति की दिशा पर सवाल है. अगर राष्ट्रपति के निजी व्यावसायिक हित भारत और अमेरिका की साझेदारी को कमजोर करते हैं, तो इसका सबसे बड़ा फायदा चीन और पाकिस्तान को मिलेगा. भारत, जो दशकों से अमेरिका के साथ संबंधों को रणनीतिक रूप से देखता रहा है, अब खुद को असमंजस और अनिश्चितता की स्थिति में पा रहा है. यह कहानी सिर्फ एक देश के रिश्तों की नहीं, बल्कि इस सवाल की भी है कि क्या दुनिया की सबसे ताकतवर लोकतांत्रिक व्यवस्था की विदेश नीति भी निजी हितों की गिरफ्त में है? अगर हां, तो इसके नतीजे न केवल भारत-अमेरिका साझेदारी बल्कि पूरी वैश्विक राजनीति पर गहरी छाप छोड़ेंगे.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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