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Swiggy News : आइसक्रीम की डिलीवरी नहीं देने पर स्विगी को लगा तगड़ा झटका, 5000 का जुर्माना

Updated at : 28 Apr 2024 5:35 PM (IST)
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Swiggy news

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फूड डिलीवरी कंपनी स्विगी को एक आइसक्रीम की डिलीवरी ना करने पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगा है. शिकायतकर्ता ने डिलीवरी नहीं देने और रिफंड देने से इनकार करनेे के बाद शिकायत दर्ज कराई थी.

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Swiggy News : फूड डिलीवरी करने वाली कंपनी स्विगी को तगड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने एक ग्राहक को आॅर्डर उपलब्ध नहीं कराने के एक मामले में स्विगी को पांच हजार रुपये ग्राहक को जुर्माना देने का आदेश दिया है. पांच हजार में से तीन हजार रुपये जुर्माना और दो हजार रुपये कोर्ट केस की लागत के रूप में दिया गया है. जिस ग्राहक को जुर्माना दिया गया, उसने एप के माध्यम से एक आइसक्रीम की बुकिंग की थी, आइसक्रीम की डिलीवरी नहीं करने पर कंपनी के खिलाफ ग्राहक ने मुकदमा दायर किया था.

आइसक्रीम की कीमत 187 रुपये थी

बेंगलुरू के एक कंज्यूमर कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए स्विगी को आइसक्रीम की राशि, जो 187 रुपये थी, उसे भी उसे वापस करने का निर्देश दिया. ग्राहक की शिकायत के अनुसार डिलीवरी एजेंट ने आइसक्रीम की दुकान से ऑर्डर तो उठाया, लेकिन उसने उसकी डिलीवरी नहीं दी, जबकि एप पर आइसक्रीम की डिलीवरी कंफर्म दिखाई गई. जब ग्राहक ने इस संबंध में स्विगी से शिकायत की, तो उसने ना तो ऑर्डर का रिफंड दिया और ना ही ऑर्डर रिप्लेस किया. इसके बाद ग्राहक ने कंपनी के खिलाफ कोर्ट में शिकायत दर्ज की.

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स्विगी ने भूमिका से इनकार किया

शिकायतकर्ता ने स्विगी के खिलाफ याचिका दाखिल करते हुए 10 हजार रुपये जुर्माना और साढ़े सात हजार रुपये कोर्ट के खर्चे के मांगे थे, जिसे कोर्ट ने अधिक बताया और तीन हजार रुपये जुर्माना और 2000 रुपये मुकदमे के खर्चे के रूप में ग्राहक को देने का आदेश स्विगी को दिया. हालांकि स्विगी ने कंज्यूमर कोर्ट में कहा कि इसमें उसकी कोई भूमिका नहीं है, क्योंकि उसने ग्राहक और रेस्टोरेंट के बीच सिर्फ एक चेन की भूमिका निभाई थी. डिलीवरी एजेंट की गलती के लिए उसे जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है. लेकिन कोर्ट ने यह माना कि शिकायतकर्ता अपनी बात साबित करने में सफल रहा है और यह मामला सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का है.

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Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

राजनीति,सामाजिक, इतिहास, खेल और महिला संबंधी विषयों पर गहन लेखन किया है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में रुचि. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक. IM4Change, झारखंड सरकार तथा सेव द चिल्ड्रन के फेलो के रूप में कार्य किया है. पत्रकारिता के प्रति जुनून है. प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव.

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