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लंबी दौड़ से हांफ रहा बाजार या सामने खड़ा है थर्ड वर्ल्ड वार? जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट

Updated at : 30 May 2024 4:26 PM (IST)
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लंबी दौड़ से हांफ रहा बाजार या सामने खड़ा है थर्ड वर्ल्ड वार? जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट

लंबी दौड़ से हांफ रहा बाजार या सामने खड़ा है थर्ड वर्ल्ड वार. फोटो: सोशल मीडिया

Stock Market: बाजार कोई ऐसी गाड़ी नहीं है, जो हमेशा सीधा ही जाएगा. थोड़ा दो कदम आगे जाएगा, फिर दो कदम पीछे आएगा. फिर एक कदम आगे जाएगा और दो कदम पीछे आएगा, लेकिन यह जाएगा आगे-पीछे ही.

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Stock Market: भारतीय शेयर बाजार लगातार पिछले पांच कारोबारी सत्रों में गिर चुका है और छठे कारोबारी दिन गुरुवार को भी गिरावट के साथ शुरू हुआ है. आलम यह बुधवार को शेयर बाजार में 29 मई 2019 के मुकाबले बड़ी गिरावट दर्ज की गई और कारोबार के आखिर में बीएसई सेंसेक्स 667.55 अंकों की बड़ी गिरावट के साथ 74,502.90 अंक बंद हुआ. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी 183.45 अंक के नुकसान से 22,704.70 अंक पर बंद हुआ. पांच साल पहले की बात करें, तो 29 मई 2019 को सेंसेक्स 247.68 अंक या 0.62 फीसदी गिरकर 39,502.05 अंक पर बंद हुआ था. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के 50 शेयरों का संवेदी सूचकांक निफ्टी 67.65 अंक या 0.57 फीसदी टूटकर 11,861.10 अंक पर बंद हुआ था. पांच पहले से तुलना करें, तो 29 मई 2024 को सेंसेक्स 29 मई 2019 के मुकाबले 419.87 अंक अधिक बढ़कर गिरा. वहीं, निफ्टी की बात करें, तो यह पांच साल पहले के मुकाबले 115.8 अंक बढ़कर गिर गया.

घरेलू शेयर बाजार की यह बड़ी गिरावट विशेषज्ञों को भी असमंजस की स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है. उन्हें यह समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर बाजार किस वजह से लगातार गिरता जा रहा है. हालांकि, इसका तात्कालिक कारण तो यह बताया जा रहा है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की मुनाफावसूली की वजह से शेयर बाजार लगातार गिर रहा है. वहीं, आशंका यह भी जाहिर की जा रही है कि भू-राजनीतिक कारणों से भी बाजार का असर पड़ रहा है. इसका कारण यह है कि 24 फरवरी 2022 से रूस-यूक्रेन का युद्ध लगातार जारी है. इसके बाद अक्टूबर 2023 के बाद इजरायल और हमास के बीच संघर्ष शुरू हो गया. इस बीच, ईरान और सऊदी अरब में प्राकृतिक गैस को लेकर तनाव बना हुआ है और सबसे ताजा घटनाक्रम में चीन का ताइवान पर हमला है. इन्हीं भू-राजनीतिक कारकों से लोगों में तीसरे विश्व युद्ध का डर पैदा हो रहा है, जिसका असर बाजार पर दिखाई दे रहा है? आखिर, बाजार के गिरने के क्या कारण हैं? आइए, विशेषज्ञों की राय जानते हैं.

30 मई 2019 को रिकॉर्ड हाई पर बंद हुआ था बाजार

घरेलू शेयर बाजार में आ रही गिरावट पर विशेषज्ञों की राय जानने से पहले पांच साल पहले 29 मई 2019 में बाजार की स्थिति में जानना बेहद जरूरी है. मीडिया की रिकॉर्ड के अनुसार, 29 मई 2019 को बीएसई सेंसेक्स 329 अंक बढ़कर 39,831 पर बंद हुआ, जो इसका रिकॉर्ड हाई था. वहीं, एनएसई निफ्टी 0.71 फीसदी बढ़कर 11,945 पर बंद हुआ था, जो उसका नया रिकॉर्ड हाई था.

असमंजस की बनी है स्थिति

चाटर्ड अकाउंटेंट विनोद बंका का कहना है कि बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर तो जारी रहेगा. फिलहाल, सरकार के विरोध में किसी प्रकार की कोई अवधारणा नहीं है. ऐसी अवधारणा बनने के बाद भी निवेशक पैसा निकालने लग जाते हैं. दरअसल, ये मिली-जुली प्रतिक्रिया है. हालांकि, सेंसेक्स में हाल के दिनों में अभी तक 667.55 अंक की गिरावट नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि सेंसेक्स में 100-200 अंकों का उतार-चढ़ाव होता था. यह सबसे बड़ी गिरावट है. इसका कारण किसी को भी समझ में नहीं आ रहा है. वैसे तो इकोनॉमिक फंड भी अच्छा परफॉर्मेंस कर रहा है. सरकार के बारे में भी कोई अंदेशा नहीं है. ऐसा लगता है कि किसी अन्य वजह से बाजार गिर रहा है.

तीसरे विश्व युद्ध का अंदेशा हो रहा मजबूत

विनोद बंका ने आगे कहा कि वैश्विक संकेतों का भी बाजार पर असर पड़ रहा है. खासकर, भू-राजनीतिक तनाव से बाजार अधिक प्रभावित हो रहा है. रूस-यूक्रेन का युद्ध लंबे समय से चल रहा है. इजरायल और हमास के बीच संघर्ष जारी है. इस बीच, चीन और ताइवान का बखेड़ा भी खड़ा हो गया. ईरान को बड़ा झटका लगा है. ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की दुर्घटना में मौत के बाद वहां खुद ही राजनीतिक संकट पैदा हो गया. उन्होंने कहा कि ताजा हालात में अगर चीन-ताइवान के बीच तनाव बढ़ता है, तो अमेरिका ताइवान के समर्थन में उतर सकता है. वहीं, रूस चीन का समर्थन करेगा. ऐसी स्थिति में तीसरे विश्व युद्ध की अंदेशा बन गया है. विशेषज्ञों की मानें, तो दुनिया में युद्ध और बढ़ेगा. ऐसी स्थिति में तीसरे विश्व युद्ध का अंदेशा और मजबूत होता है, जिसका प्रभाव बाजार पर दिखाई दे रहा है.

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बड़ी दौड़ के बाद सांस ले रहा बाजार

टैक्स एंड इन्वेस्टमेंट एक्सपर्ट बलवंत जैन कहते हैं कि बाजार कोई ऐसी गाड़ी नहीं है, जो सीधा ही जाएगा. थोड़ा दो कदम आगे जाएगा, फिर दो कदम पीछे आएगा. फिर एक कदम आगे जाएगा और दो कदम पीछे आएगा, लेकिन यह जाएगा आगे-पीछे ही. जहां तक इसके गिरने के पीछे के कारण की बात है, तो बाजार के दोनों सूचकांक सेंसेक्स-निफ्टी ने अब तक बहुत दौड़ लगाई है. इसलिए अभी थोड़ा रुककर वे हांफते हुए सांस ले रहे हैं. आप देखिएगा, तो साल भर में सेंसेक्स 29-30 पर्सेंट बढ़ गया. साल भर में जब वह इतना बढ़ गया, तो फिर यह रुकेगा या नहीं. कुल मिलाकर यह कि बाजार ने अब तक बड़ी दौड़ लगा ली है. इसलिए फिलहाल वह सांस ले रहा है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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