शिखर धवन-बाबा बागेश्वर को मिली विदेशों से चंदा लेने की मंजूरी, गृह मंत्रालय ने दिया FCRA लाइसेंस

Fcra Licence
FCRA Licence: पूर्व क्रिकेटर शिखर धवन और बाबा बागेश्वर की संस्था अब विदेशों से चंदा ले सकेगी. गृह मंत्रालय ने फाउंडेशन को FCRA रजिस्ट्रेशन दे दिया है, जबकि धवन खुद ED की जांच के घेरे में हैं.
FCRA Licence: पूर्व भारतीय क्रिकेटर शिखर धवन की सामाजिक संस्था ‘शिखर धवन फाउंडेशन’ और बाबा बागेश्वर फाउंडेशन अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फंड जुटा सकेगी. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने फाउंडेशन को FCRA (Foreign Contribution Regulation Act) के तहत रजिस्ट्रेशन दे दिया है.
यह मंजूरी ऐसे समय में मिली है जब शिखर धवन खुद एक कानूनी विवाद का सामना कर रहे हैं. पिछले साल प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने प्रतिबंधित सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म 1xBet से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में धवन से जुड़ी ₹4.5 करोड़ की संपत्ति कुर्क की थी.
क्या है FCRA और यह क्यों जरूरी है?
भारत में किसी भी NGO या संस्था को विदेशों से दान (Foreign Donation) लेने के लिए FCRA रजिस्ट्रेशन की जरूरत होती है. गृह मंत्रालय यह लाइसेंस तभी देता है जब इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) संस्था की पूरी जांच कर लेती है.
इस साल की स्थिति
साल 2026 में अब तक 38 NGOs को यह रजिस्ट्रेशन मिल चुका है. शिखर धवन फाउंडेशन के साथ-साथ बागेश्वर धाम, रामकृष्ण मिशन (पश्चिम बंगाल), और राधा स्वामी सत्संग (आगरा) जैसी संस्थाओं को भी मंजूरी मिली है. पिछले साल कुल 444 संस्थाओं को यह लाइसेंस दिया गया था.
कैसे मिलता है FCRA रजिस्ट्रेशन?
कोई भी संस्था जो सांस्कृतिक, आर्थिक, शैक्षिक, धार्मिक या सामाजिक कार्यों में लगी है, वह इसके लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकती है.
- वेरिफिकेशन: आवेदन के बाद गृह मंत्रालय IB के जरिए बैकग्राउंड और गतिविधियों की जांच करता है.
- वैधता: यह रजिस्ट्रेशन 5 साल के लिए मान्य होता है, जिसके बाद इसे रिन्यू कराना पड़ता है.
विदेशी फंडिंग पर सरकार की नई तैयारी
सरकार ने विदेशी फंड के इस्तेमाल पर लगाम कसने के लिए संसद में विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया है. अगर किसी NGO का लाइसेंस रद्द या सस्पेंड होता है, तो सरकार उसकी संपत्तियों को अपने कब्जे में लेने के लिए एक विशेष अथॉरिटी बना सकती है. विपक्ष ने इस बिल का विरोध किया है, क्योंकि उनका मानना है कि इससे सरकार को NGOs पर बहुत ज्यादा कंट्रोल मिल जाएगा.
शिखर धवन फाउंडेशन का काम
यह फाउंडेशन मुख्य रूप से सामाजिक कल्याण, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में काम करता है. अब विदेशी फंडिंग मिलने से इसके प्रोजेक्ट्स को और मजबूती मिलने की उम्मीद है.
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By अभिषेक पाण्डेय
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अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।
करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।
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अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।
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