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Sanchar Saathi App: संचार साथी ऐप हुआ अनिवार्य तो एप्पल-सैमसंग को क्यों लगी मिर्ची? अब सरकार से करेगी बात

2 Dec, 2025 10:05 pm
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Sachar Saathi App

मोबाइल में संचार साथी ऐप अनिवार्य हुआ.

Sanchar Saathi App: संचार साथी ऐप को सभी नए मोबाइल फोनों में अनिवार्य करने के सरकारी निर्देश के बाद एप्पल और सैमसंग ने तकनीकी और प्राइवेसी चुनौतियों पर चिंता जताई है. यह कदम डिजिटल सुरक्षा मजबूत करने के लिए उठाया गया है, लेकिन सिस्टम-लेवल इंस्टॉल की बाध्यता कंपनियों के लिए बड़ा मुद्दा बन गई है. सरकार और उद्योग के बीच समाधान पर जल्द चर्चा होने की संभावना है.

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Sachar Saathi App: भारत सरकार की ओर से संचार साथी ऐप (Sanchar Saathi App) को सभी नए मोबाइल फोन में अनिवार्य रूप से इंस्टॉल करने के निर्देश के बाद स्मार्टफोन उद्योग में हलचल बढ़ गई है. सूत्रों की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, एप्पल और सैमसंग जैसे शीर्ष वैश्विक निर्माता कंपनियां इस आदेश को लागू करने में कई व्यावहारिक चुनौतियां देख रही हैं और जल्द ही सरकार से बातचीत कर समाधान खोजने की दिशा में आगे बढ़ने वाली हैं. यह फैसला डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया है, लेकिन इसकी तकनीकी जटिलताएं कंपनियों के लिए नई चिंता बन गई हैं.

सरकार का नया निर्देश और उसकी अनिवार्यता

दूरसंचार विभाग ने 28 नवंबर 2025 को एक अधिसूचना जारी की, जिसके अनुसार अगले 90 दिनों के भीतर भारत में बेचे जाने वाले सभी नए मोबाइल फोन में संचार साथी ऐप को सिस्टम स्तर पर इंस्टॉल करना अनिवार्य होगा. यह नियम न केवल भारत में निर्मित मोबाइल फोनों पर बल्कि विदेशी ब्रांडों द्वारा आयात किए जाने वाले सभी मॉडलों पर भी लागू होगा. सरकार ने यह भी कहा है कि जिन फोन की बिक्री अभी नहीं हुई है या जो पहले से उपभोक्ताओं के पास मौजूद हैं, उनमें यह ऐप सॉफ्टवेयर अपडेट के माध्यम से जोड़ा जाना चाहिए. सरकार का मानना है कि इससे मोबाइल चोरी, फर्जी सिम कार्ड, साइबर ठगी और डिजिटल सुरक्षा से जुड़े खतरों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी.

एप्पल और सैमसंग की चिंताओं का कारण

उद्योग सूत्रों के अनुसार, एप्पल इस आदेश को मौजूदा रूप में लागू करने में असमर्थता जता रहा है. एप्पल के ऑपरेटिंग सिस्टम आईओएस में किसी भी थर्ड-पार्टी ऐप को सिस्टम-लेवल पर जोड़ना तकनीकी और सुरक्षा नीति दोनों के लिहाज से जटिल है. कंपनी अपनी प्राइवेसी नीति के लिए वैश्विक स्तर पर जानी जाती है और यूजर्स के डेटा की सुरक्षा इसके मूल सिद्धांतों में शामिल है. इसलिए ऐप के डेटा एक्सेस, उपयोग और नियंत्रण से जुड़े सवाल कंपनी के लिए गंभीर मुद्दे बन गए हैं. सैमसंग भी इस निर्देश की समीक्षा कर रहा है और वह भी सरकार से बातचीत करना चाहता है, क्योंकि सिस्टम ऐप के रूप में किसी ऐप को अनिवार्य रूप से जोड़ना एंड्रॉयड आधारित मॉडलों में भी व्यापक परीक्षण और सुरक्षा अनुमोदन की मांग करता है.

उद्योग जगत की प्रतिक्रियाएं और सरकारी दृष्टिकोण

एप्पल और सैमसंग दोनों ने इस संबंध में भेजे गए ई-मेल का कोई प्रत्यक्ष उत्तर नहीं दिया है, लेकिन उद्योग के भीतर यह स्पष्ट रूप से माना जा रहा है कि दोनों कंपनियां सरकार से समाधान निकालने के लिए साझा चर्चा चाहती हैं. दूसरी ओर, बीएसएनएल के पूर्व चेयरमैन और वर्तमान में लावा इंटरनेशनल के स्वतंत्र निदेशक अनुपम श्रीवास्तव का मानना है कि मोबाइल हैंडसेट में धोखाधड़ी रोकने और दूरसंचार सुरक्षा मजबूत करने के लिए संचार साथी ऐप को अनिवार्य करना एक सही कदम है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यूजर्स की डिजिटल गोपनीयता से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि डेटा का उपयोग कैसे और किस हद तक किया जाएगा.

घरेलू कंपनियों का समर्थन और साइबर सुरक्षा पर प्रभाव

घरेलू मोबाइल निर्माता लावा इंटरनेशनल ने इस कदम का समर्थन किया है. कंपनी के प्रबंध निदेशक सुनील रैना का कहना है कि उपभोक्ता की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले हर कदम का स्वागत किया जाना चाहिए और कंपनी दिशानिर्देशों का पूर्ण पालन करेगी. उनका मानना है कि यह कदम साइबर धोखाधड़ी और डेटा चोरी की घटनाओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ अखिलेश शुक्ला का कहना है कि ऑपरेटिंग सिस्टम में किसी ऐप को सिस्टम ऐप के तौर पर जोड़ना यूजर्स के नियंत्रण को सीमित कर देता है, क्योंकि ऐसे ऐप हटाए नहीं जा सकते और कई बार बैकग्राउंड में चलते भी रहते हैं, जिससे प्राइवेसी को लेकर चिंता बढ़ती है.

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भविष्य की दिशा और संभावित समाधान

संचार साथी ऐप को अनिवार्य करना निश्चित रूप से उपभोक्ता सुरक्षा और साइबर सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसे लागू करने के दौरान तकनीकी पारदर्शिता, डेटा गोपनीयता और ऑपरेटिंग सिस्टम की सुरक्षा नीतियों को ध्यान में रखना आवश्यक है. आने वाले समय में सरकार और मोबाइल निर्माता कंपनियों के बीच वार्ता से ऐसे समाधानों की उम्मीद की जा सकती है, जिनमें यूजर्स अधिकारों, डेटा सुरक्षा और तकनीकी अनुकूलता तीनों का संतुलन सुनिश्चित किया जा सके. यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह नीति वैश्विक स्मार्टफोन उद्योग में भारत की भूमिका को किस दिशा में ले जाती है.

भाषा इनपुट के साथ

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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