Residential Sales: रियल एस्टेट में लौट रहे अच्छे दिन, कोरोना महामारी के बाद प्रीमियम घरों की मांग बढ़ी

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Residential Sales: कोरोना महामारी के बाद भारत के आवासीय रियल एस्टेट सेक्टर में तेज रिकवरी दर्ज की गई है. क्रिसिल रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार, 2025-26 तक बिक्री में 10-12% की स्थिर वृद्धि की उम्मीद है. प्रीमियम और लग्जरी घरों की मांग तेजी से बढ़ी है, जबकि किफायती सेगमेंट में गिरावट आई है. बढ़ती आपूर्ति के बावजूद मजबूत संग्रह और डिलीवरेजिंग से डेवलपर्स की वित्तीय स्थिति बेहतर बनी हुई है. लोन-से-सीएफओ अनुपात में सुधार ने क्रेडिट प्रोफाइल को भी मजबूती दी है.

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Residential Sales: रियल एस्टेट कारोबारियों के अच्छे दिनों की शुरुआत हो गई है. खबर है कि कोरोना महामारी के बाद पिछले तीन सालों में भारत के आवासीय रियल एस्टेट सेक्टर में तेज रिकवरी देखी गई है. अब यह क्षेत्र स्थिरता की ओर बढ़ रहा है. वित्त वर्ष 2025 और 2026 में घरों की बिक्री में 10-12% की स्थिर वृद्धि की संभावना है. क्रिसिल रेटिंग्स के अनुसार, मात्रा के लिहाज से मांग में 5-7% और औसत कीमतों में 4-6% की वृद्धि देखी जा रही है.

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प्रीमियम और लग्जरी घरों की मांग में बढ़ोतरी

क्रिसिल रेटिंग्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना महामारी के बाद उपभोक्ताओं की पसंद में बड़ा बदलाव आया है. प्रीमियम और लग्जरी घरों की मांग में लगातार वृद्धि हो रही है. कैलेंडर वर्ष 2020 में जहां इस श्रेणी के लॉन्च की हिस्सेदारी केवल 9% थी, वहीं 2024 में यह बढ़कर 37% हो गई. 2025-26 में यह 38-40% तक पहुंचने की संभावना है. इस बदलाव का मुख्य कारण लोगों की आदमनी में वृद्धि, शहरीकरण और बेहतर जीवनशैली की चाह है.

किफायती घरों की बिक्री में गिरावट

रिपोर्ट में कहा गया है कि किफायती और मध्यम श्रेणी के सेगमेंट में गिरावट देखी जा रही है. 2025-26 में इनकी लॉन्च हिस्सेदारी क्रमश: 10-12% और 19-20% रहने की उम्मीद है, जो 2020 में 30% और 40% थी. भूमि और कच्चे माल की बढ़ती लागत ने इन्हें डेवलपर्स के लिए कम लाभकारी बना दिया है.

इन्वेंट्री में हल्का इजाफा

मजबूत मांग के पूर्वानुमान के चलते डेवलपर्स ने पिछले तीन वर्षों में अधिक प्रोजेक्ट लॉन्च किए, जिससे आपूर्ति ने मांग को पीछे छोड़ दिया. नतीजतन, इन्वेंट्री का स्तर 2.9-3.1 वर्षों तक बढ़ सकता है, जो पहले 2.7-2.9 वर्षों पर था.

डिलीवरेजिंग और क्रेडिट प्रोफाइल में सुधार

हालांकि, आपूर्ति अधिक है, लेकिन मजबूत बिक्री, समय पर परियोजना निष्पादन और एसेट-लाइट मॉडल (जैसे संयुक्त विकास) ने डेवलपर्स को बैलेंस शीट डिलीवरेज करने में मदद की है. क्यूआईपी (क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट) के माध्यम से इक्विटी फ्लो में भी जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है. यह पिछले वित्त वर्ष में 24% रही, जबकि पहले 13-16% थी.

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लोन-से-सीएफओ अनुपात में गिरावट

क्रेडिट प्रोफाइल की मजबूती को दिखाने वाला लोन-से-ऑपरेटिंग कैश फ्लो अनुपात भी सुधरा है. यह अनुपात 2020 में 5.6 गुना था, जो अब घटकर 1.1-1.3 गुना तक पहुंच गया है.

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